असम के गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नॉर्थ-ईस्ट को लेकर सरकार की सोच और योजनाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट के बाद यह उनका पहला नॉर्थ-ईस्ट दौरा है और इस बजट में क्षेत्र के विकास को विशेष प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री ने नॉर्थ-ईस्ट को “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए कहा कि यह इलाका देश की प्रगति का अहम आधार बन रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि बीते वर्षों में नॉर्थ-ईस्ट को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर लगातार काम हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले इस क्षेत्र को नजरअंदाज किया गया, लेकिन अब सरकार यहां आधारभूत ढांचे, कनेक्टिविटी और रोजगार से जुड़े कामों पर ध्यान दे रही है। उनके अनुसार, इस साल का बजट भी नॉर्थ-ईस्ट के लिए तय किए गए विकास के विजन को और मजबूत करता है।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने असम की भूमिका की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि असम की धरती ने देश की रक्षा, आज़ादी और संस्कृति को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। इसी क्रम में उन्होंने समाज सेवा से जुड़े एक वरिष्ठ व्यक्ति कबीन्द्र पुरकायस्थ को याद करते हुए उनके योगदान की सराहना की और बताया कि उन्हें पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वर्ष 2014 के बाद नॉर्थ-ईस्ट के 125 से ज्यादा लोगों को पद्म पुरस्कार दिए गए हैं। उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि इस क्षेत्र की प्रतिभा और योगदान को अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट की यही ताकत विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में सहायक बनेगी।
कुल मिलाकर, गुवाहाटी के इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने नॉर्थ-ईस्ट के विकास, असम के योगदान और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में भी इस क्षेत्र के लिए योजनाओं और कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जाएगी।




