नई दिल्ली: मालदा के कालियाचक इलाके में हाल ही में हुई घटना अब और गंभीर होती जा रही है। जानकारी सामने आई है कि इस हिंसा से कई दिन पहले ही न्यायिक अधिकारियों ने जिला प्रशासन को खत लिखकर अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
बताया जा रहा है कि सात में से चार न्यायिक अधिकारियों ने 23 मार्च को जिला मजिस्ट्रेट को पत्र भेजा था। इस पत्र में उन्होंने साफ लिखा था कि बीडीओ कार्यालय का माहौल लगातार तनावपूर्ण हो रहा है और वहां काम करना सुरक्षित नहीं है। अधिकारियों ने यहां तक मांग की थी कि उनके कामकाज को किसी सुरक्षित जगह शिफ्ट किया जाए।
लेकिन प्रशासन ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। न तो अतिरिक्त सुरक्षा दी गई और न ही कार्यालय को कहीं और स्थानांतरित किया गया। नतीजा यह हुआ कि कुछ ही दिनों बाद भीड़ ने कार्यालय को घेर लिया और अधिकारियों को घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया।
यह पूरा मामला मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने को लेकर शुरू हुआ था। जैसे-जैसे प्रक्रिया आगे बढ़ी, स्थानीय स्तर पर दबाव और तनाव बढ़ता गया। इसी बीच भीड़ ने उग्र रूप ले लिया और हालात बिगड़ गए।
इस घटना के बाद अब प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जब पहले ही खतरे की जानकारी दे दी गई थी, तो समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए गए? विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेर रहा है और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
मामला इतना बढ़ गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त निर्देश भी दिए गए हैं।
यह घटना सिर्फ एक कानून-व्यवस्था की चूक नहीं, बल्कि चुनाव के दौरान सुरक्षा तैयारियों पर बड़ा सवाल बनकर सामने आई है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।




