AI से चलने वाले ‘किलर ड्रोन’ पर छिड़ी बहस, 30 से ज्यादा देश करना चाहते हैं बैन

अमेरिका, रूस, चीन और इजराइल जैसे बड़े सैन्य देश इस प्रतिबंध के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध में यह तकनीक बड़ी रणनीतिक बढ़त दे सकती है। यही वजह है कि किलर ड्रोन को लेकर दुनिया में बहस लगातार तेज होती जा रही है।

किलर ड्रोन
किलर ड्रोन

नई दिल्ली: आधुनिक युद्ध में तकनीक तेजी से बदल रही है और अब ऐसे हथियार सामने आ रहे हैं जो बिना इंसानी आदेश के खुद फैसला लेकर हमला कर सकते हैं। इन्हें लेथल ऑटोनॉमस वेपन सिस्टम (LAWS) या आम भाषा में AI किलर ड्रोन कहा जाता है। यही वजह है कि दुनिया के 30 से ज्यादा देश इन हथियारों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहे हैं।

ये किलर ड्रोन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक सेंसर तकनीक से लैस होते हैं। इनकी खासियत यह है कि ये खुद ही लक्ष्य ढूंढ सकते हैं, उसे पहचान सकते हैं और उस पर हमला भी कर सकते हैं। कई मामलों में इंसान सिर्फ इन्हें एक्टिवेट करता है, उसके बाद पूरा नियंत्रण मशीन के एल्गोरिद्म के पास चला जाता है।

इन ड्रोन में अलग-अलग तरह के सेंसर लगे होते हैं, जो आसपास के इलाके को लगातार स्कैन करते रहते हैं। थर्मल कैमरे अंधेरे में भी इंसानों की गर्मी पहचान सकते हैं, जबकि रडार और अन्य तकनीकें दूर तक हो रही गतिविधियों पर नजर रखती हैं। इन सभी जानकारियों को AI सिस्टम कुछ ही सेकंड में विश्लेषण कर तय करता है कि सामने दिख रहा लक्ष्य सैनिक है या कोई आम व्यक्ति।

सबसे ज्यादा विवाद इसी बात को लेकर है कि अंतिम फैसला मशीन खुद लेती है। यानी यह तय करने का अधिकार भी उसी के पास होता है कि हमला करना है या नहीं। आलोचकों का कहना है कि किसी मशीन को इंसानों की जान लेने का फैसला करने का अधिकार देना नैतिक रूप से गलत है।

दुनिया में ऐसे कई ड्रोन पहले से मौजूद हैं। इजराइल का हारोप ड्रोन, रूस की कंपनी द्वारा विकसित ZALA KYB, और तुर्की का कार्गु-2 ड्रोन इसी तकनीक के उदाहरण माने जाते हैं। कुछ ड्रोन तो लंबे समय तक आसमान में मंडराते रहते हैं और लक्ष्य मिलते ही सीधे उस पर टकराकर विस्फोट कर देते हैं।

संयुक्त राष्ट्र में कई देश इन हथियारों पर बैन की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि AI भी गलती कर सकता है और अगर किसी आम नागरिक को सैनिक समझ लिया गया तो बड़ा नुकसान हो सकता है। इसके अलावा साइबर हमले का खतरा भी है, क्योंकि अगर इन ड्रोन को हैक कर लिया गया तो वे उल्टा अपने ही सैनिकों के खिलाफ इस्तेमाल हो सकते हैं।

अमेरिका, रूस, चीन और इजराइल जैसे बड़े सैन्य देश इस प्रतिबंध के खिलाफ हैं। उनका मानना है कि भविष्य के युद्ध में यह तकनीक बड़ी रणनीतिक बढ़त दे सकती है। यही वजह है कि किलर ड्रोन को लेकर दुनिया में बहस लगातार तेज होती जा रही है।