नई दिल्ली: केरल में यूडीएफ उम्मीदवार रमेश पिशारोडी के चुनाव प्रचार में बाधा डालने के आरोप में भाजपा पार्षद सिंधु राजन, उनकी बेटी और भाई के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक, यह कार्रवाई एक स्थानीय महिला की शिकायत के आधार पर की गई है।
आरोप है कि 1 अप्रैल की शाम को वडक्कंथारा के मनक्कलथोडी इलाके में पिशारोडी को प्रचार के दौरान एक क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका गया। बताया जा रहा है कि यह इलाका भाजपा का प्रभाव वाला क्षेत्र है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों ने पिशारोडी और उनके समर्थकों को धमकाने की कोशिश की।
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और जानकारी सामने आ सकती है।
इस घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के खिलाफ हैं और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है। उन्होंने इसे असहिष्णुता का उदाहरण बताया।
वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी नेता शोभा सुरेंद्रन का कहना है कि पिशारोडी को महिलाओं के विरोध के कारण रोका गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूडीएफ उम्मीदवार ने महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिए थे, जिसके चलते स्थानीय लोगों में नाराजगी थी।
इस पूरे घटनाक्रम ने केरल की राजनीति में गर्मी बढ़ा दी है। यूडीएफ और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जिससे साफ है कि चुनावी मुकाबला अब और तीखा होने वाला है।
गौरतलब है कि केरल विधानसभा की 140 सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है। ऐसे में हर छोटी-बड़ी घटना चुनावी माहौल पर असर डाल सकती है। अब देखना होगा कि यह विवाद आगे क्या मोड़ लेता है और इसका चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है।




