नई दिल्ली: सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 140 सीटों वाली केरल विधानसभा में UDF को 88 से 92 सीटें मिलने का अनुमान है, जो बहुमत के आंकड़े 70 से काफी ज्यादा है। यानी अगर यह आंकड़े सही साबित होते हैं तो केरल में सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा सकता है। वहीं LDF को 42 से 46 सीटों तक सीमित रहने का अनुमान है, जो उसके पारंपरिक मजबूत क्षेत्रों में गिरावट का संकेत देता है।
दूसरी ओर National Democratic Alliance यानी NDA के लिए तस्वीर ज्यादा उत्साहजनक नहीं दिख रही है। सर्वे में उसे सिर्फ 0 से 2 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है, जो राज्य में उसकी सीमित पकड़ को दर्शाता है।
मत प्रतिशत की बात करें तो UDF को करीब 41.5% वोट मिलते दिख रहे हैं, जो LDF के 33.4% से काफी आगे है। यानी करीब 8% की सीधी बढ़त UDF को मिलती नजर आ रही है। वहीं NDA को 17.2% वोट और अन्य को 2.3% वोट मिलने का अनुमान है। खास बात ये है कि सिर्फ 5.6% मतदाता ही अब तक अनिर्णीत हैं, जिससे साफ है कि इस बार वोटर का रुझान काफी हद तक तय हो चुका है।
सर्वे के मुताबिक इस बार चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा ‘परिवर्तन की चाह’ बनकर उभरा है। करीब 22.8% मतदाता बदलाव चाहते हैं। इसके बाद महंगाई और जीवनयापन की लागत (24.5%) और रोजगार जैसे मुद्दे (20.2%) लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं। यानी साफ है कि जनता आर्थिक दबाव और रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर वोट देने जा रही है।
मुख्यमंत्री चेहरे की बात करें तो वीडी सतीशन को 21.3% लोगों की पसंद मिली है, जबकि मौजूदा मुख्यमंत्री पिनराई विजयन 18.5% पर हैं। हालांकि पिछले कुछ समय में चेहरों की लोकप्रियता में बदलाव भी देखा गया है।
सर्वे यह संकेत दे रहा है कि केरल में इस बार चुनाव एकतरफा हो सकता है, जहां UDF को बढ़त मिल रही है और LDF को एंटी-इंकम्बेंसी का नुकसान झेलना पड़ सकता है। अब देखना होगा कि असली नतीजे इस अनुमान को कितना सही साबित करते हैं।




