नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट में बहुचर्चित आबकारी नीति मामले को लेकर गुरुवार को सुनवाई के दौरान दिलचस्प और अहम घटनाक्रम देखने को मिला। इस केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर बहस चल रही है, जिसमें ट्रायल कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को हटाने की मांग की गई है।
दरअसल, प्रतिवादी पक्ष की ओर से कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया। उनका कहना था कि केस से जुड़े करीब 600 पन्नों के दस्तावेज़ पढ़ने के लिए अतिरिक्त वक्त चाहिए। लेकिन ED की ओर से पेश वकीलों ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि सभी पक्षों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है, ऐसे में अब देरी की कोई जरूरत नहीं है।
इस दौरान ED की तरफ से पेश हुए SV Raju ने कोर्ट में कहा कि प्रतिवादी पक्ष जानबूझकर सुनवाई को टालने की कोशिश कर रहा है। वहीं कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि पहले जवाब दाखिल करने की बात कही गई थी, लेकिन अब अचानक और समय मांगना सही नहीं लगता।
हाईकोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में यह तय करना जरूरी है कि क्या ट्रायल कोर्ट ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर टिप्पणियां की थीं या नहीं। इसी को लेकर ED ने यह याचिका दायर की है।
फिलहाल कोर्ट ने सभी पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए थोड़ा समय दिया है और निर्देश दिया है कि याचिका की कॉपी सभी को उपलब्ध कराई जाए।




