नई दिल्ली: Assam की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता Jayant Kumar Das ने पार्टी से इस्तीफा देकर सभी को चौंका दिया है। करीब 35 साल तक पार्टी के लिए काम करने के बाद भी जब उन्हें दिसपुर सीट से टिकट नहीं मिला, तो उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला कर लिया।
जयंत दास संगठन के मजबूत और जमीनी नेता माने जाते रहे हैं। वे असम बीजेपी के पूर्व उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं और पार्टी को मजबूत करने में उनका अहम योगदान रहा है। लेकिन इस बार टिकट वितरण में उनका नाम नहीं आने से वे नाराज हो गए और उन्होंने बगावती रुख अपना लिया।
दास ने खुलकर पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बीजेपी अब अपने पुराने सिद्धांतों से भटक चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि वे Atal Bihari Vajpayee और Lal Krishna Advani की विचारधारा से प्रेरित होकर पार्टी में आए थे, लेकिन अब वही सोच नजर नहीं आती।
उन्होंने यह भी दावा किया कि इतने सालों की सेवा के बावजूद उनकी बात शीर्ष नेतृत्व तक नहीं पहुंच पाई। उनका कहना है कि अगर Narendra Modi को इस बारे में जानकारी होती, तो वे जरूर दुखी होते। साथ ही, उन्होंने असम बीजेपी में तानाशाही जैसे हालात होने का भी आरोप लगाया।
जयंत दास के इस फैसले से दिसपुर सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अब यहां बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच त्रिकोणीय लड़ाई देखने को मिल सकती है। उनके समर्थकों का कहना है कि इलाके में पानी की समस्या, बाढ़ और खराब प्रशासन जैसे मुद्दों को लेकर जनता में नाराजगी है, जिसका फायदा दास को मिल सकता है।
वहीं बीजेपी ने इस बगावत को ज्यादा महत्व नहीं दिया है। पार्टी का कहना है कि कोई भी व्यक्ति पार्टी से बड़ा नहीं होता और उनके उम्मीदवार ही जीत दर्ज करेंगे।
असम में इस बार चुनाव सिर्फ सीट का नहीं, बल्कि साख और वर्चस्व की लड़ाई बन गया है। अब देखना होगा कि जयंत दास की बगावत चुनावी नतीजों पर कितना असर डालती है।




