ईरान का ‘Karrar Drone’ चर्चा में, तेज रफ्तार और घातक हमले की क्षमता से बढ़ी चिंता

इस ड्रोन की एक खास बात यह भी है कि इसे उड़ाने के लिए रनवे की जरूरत नहीं होती। इसे रॉकेट बूस्टर की मदद से रेल लॉन्चर से उड़ाया जाता है और मिशन पूरा होने के बाद पैराशूट के जरिए नीचे उतारा जा सकता है।

Karrar UAV
Karrar UAV

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का एक खास ड्रोन इन दिनों काफी चर्चा में है। इस ड्रोन का नाम Karrar UAV है। यह एक जेट इंजन से चलने वाला मल्टी-पर्पस ड्रोन है, जिसे इंटरसेप्टर, बॉम्बर और सुसाइड मिशन जैसे कई तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी तेज रफ्तार और लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता की वजह से इसे खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों के लिए संभावित खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने इस ड्रोन को पहली बार साल 2010 में सार्वजनिक तौर पर पेश किया था। इसे देश के रक्षा उद्योग की बड़ी उपलब्धि माना जाता है, क्योंकि यह ईरान का पहला स्वदेशी जेट इंजन वाला ड्रोन बताया जाता है। माना जाता है कि यह ड्रोन ईरान की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है, खासकर उस रणनीति का जिसमें दुश्मन की पहुंच को सीमित करने और उसके सैन्य ठिकानों पर दबाव बनाने की कोशिश की जाती है।

अगर इसके तकनीकी फीचर्स की बात करें तो कर्रार ड्रोन करीब 1,000 किलोमीटर तक की रेंज में उड़ान भर सकता है। जेट टर्बो इंजन की वजह से इसकी रफ्तार लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटा तक बताई जाती है, जो सामान्य प्रोपेलर वाले ड्रोनों से काफी ज्यादा है। यह ड्रोन करीब 250 से 500 किलोग्राम तक हथियार या विस्फोटक ले जाने में सक्षम है। इसमें एंटी-शिप मिसाइल और हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल जैसे हथियार भी लगाए जा सकते हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत में ज्यादा मारक क्षमता होने की वजह से ऐसे ड्रोन आधुनिक युद्ध में काफी अहम होते जा रहे हैं। खासकर अगर इन्हें बड़ी संख्या में एक साथ इस्तेमाल किया जाए तो ये दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित कर सकते हैं। यही कारण है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कर्रार जैसे ड्रोन को भविष्य के युद्धों में अहम हथियार माना जा रहा है।