रूसी तेल पर भारत का साफ संदेश: फैसला हमारा होगा, दबाव में नहीं

भारत ने साफ कर दिया है कि ऊर्जा नीति पर उसका रुख स्वतंत्र है। वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के बजाय अपने देश की जरूरत, बाजार की स्थिति और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर ही कोई फैसला करेगा।

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के उस बयान पर भारत की ओर से कड़ा जवाब आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से अतिरिक्त तेल नहीं खरीदने का आश्वासन दिया है। इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि भारत अपने फैसले खुद करता है और किसी बाहरी दबाव में नहीं आता।

यह बयान जर्मनी में हुए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान सामने आया। जयशंकर ने कहा कि भारत की नीति “रणनीतिक स्वायत्तता” पर आधारित है। यानी देश अपने राष्ट्रीय हितों को देखते हुए ही फैसले करता है, न कि किसी और देश की सोच या दबाव के अनुसार।

रुबियो ने दावा किया था कि भारत ने अमेरिका को संकेत दिया है कि वह रूस से अतिरिक्त तेल की खरीद नहीं करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पहले से चल रही सप्लाई पर इसका असर नहीं पड़ेगा और अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि भारतीय तेल कंपनियां अप्रैल महीने के लिए रूसी तेल खरीदने से फिलहाल दूरी बना रही हैं।

इस पर जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत की तेल कंपनियां उपलब्धता, कीमत और जोखिम जैसे पहलुओं को देखकर निर्णय लेती हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार काफी जटिल है और हर देश को अपनी जरूरत और स्थिति के अनुसार कदम उठाने पड़ते हैं।

जयशंकर ने यह भी जोड़ा कि भारत के पास ऐसे फैसले लेने का अधिकार है जो पश्चिमी देशों की सोच से अलग हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत किसी एक खेमे में बंधकर नहीं चलता, बल्कि अपने हित को सबसे ऊपर रखता है।

गौरतलब है कि पहले अमेरिका ने रूसी तेल खरीद को लेकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। हालांकि अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर भारत दोबारा बड़े स्तर पर रूसी तेल आयात करता है तो उस पर फिर से शुल्क लगाया जा सकता है।