क्या अब खत्म हो जाएगा गैस सिलेंडर? सरकार के प्‍लान-B ने बढ़ाई उत्सुकता

रसोई गैस को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच सरकार अब बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि आने वाले समय में गैस सिलेंडर की जगह बिजली से चलने वाले कुकिंग उपकरण आपकी रसोई का हिस्सा बन सकते हैं।

Naveen Bansal
Naveen Bansal

नई दिल्ली: सरकार एलपीजी गैस पर निर्भरता कम करने के लिए प्लान-B पर तेजी से काम कर रही है। इसके तहत इंडक्शन चूल्हे और अन्य इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। हाल ही में इस विषय पर उच्चस्तरीय बैठक भी हुई, जिसमें अधिकारियों को इन उपकरणों का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की अनिश्चित सप्लाई ने भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति पर फिर से सोचने के लिए मजबूर किया है। अगर हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहते हैं, तो गैस सिलेंडर की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार चाहती है कि देश के किचन किसी भी हाल में प्रभावित न हों।

इसी वजह से इंडक्शन हीटर, इलेक्ट्रिक कुकर और केतली जैसे उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ रही है। सरकार का लक्ष्य है कि इनकी कीमत कम रखी जाए और गुणवत्ता बेहतर हो, ताकि आम लोगों तक ये आसानी से पहुंच सकें। इसके लिए कंपनियों को प्रोडक्शन बढ़ाने और संभावित रियायत देने पर भी विचार किया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल बिजली की उपलब्धता को लेकर उठता है। इस पर सरकार का कहना है कि देश में बिजली उत्पादन अब पर्याप्त है। भारत न केवल अपनी जरूरत पूरी कर रहा है, बल्कि धीरे-धीरे अतिरिक्त उत्पादन की ओर भी बढ़ रहा है। ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ जैसे कार्यक्रमों से घरों में सोलर पैनल लग रहे हैं, जिससे लोग इंडक्शन पर लगभग मुफ्त में खाना बना सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिजली आधारित कुकिंग सिस्टम अपनाने से भविष्य में गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे लोगों पर नहीं पड़ेगा। साथ ही यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

सरकार की यह योजना सिर्फ मौजूदा संकट से निपटने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाई जा रही है। अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में गैस सिलेंडर की जगह इलेक्ट्रिक कुकिंग आम बात हो सकती है और किचन की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है।