यह आदेश विशेष न्यायाधीश (POCSO एक्ट) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने सुनाया। इससे पहले कोर्ट ने पीड़ित बताए जा रहे बच्चों के बयान दर्ज किए और उपलब्ध साक्ष्यों का अध्ययन किया। इसके बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रखा था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया।
शिकायतकर्ता अशुतोष ब्रह्मचारी महाराज और अन्य लोगों ने अदालत में अर्जी दाखिल कर मांग की थी कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं और POCSO एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। याचिका में कहा गया कि आश्रम में रहने वाले ‘बटुकों’ यानी छोटे बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार किया गया।
कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि वह मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच करे। आदेश में साफ कहा गया है कि आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
इस फैसले के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद जल्द ही FIR दर्ज कर ली जाएगी और मामले से जुड़े सभी पक्षों से पूछताछ की जाएगी। साथ ही आश्रम से जुड़े दस्तावेज और अन्य सबूत भी जुटाए जाएंगे।
कानूनी जानकारों का कहना है कि POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामलों में जांच प्रक्रिया बेहद संवेदनशील होती है और बच्चों के बयान को विशेष महत्व दिया जाता है। इस केस में भी जांच एजेंसी को हर पहलू से तथ्य जुटाने होंगे।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद यह मामला औपचारिक जांच के दायरे में आ गया है। अब सबकी नजर पुलिस की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे आगे की कानूनी दिशा तय होगी।




