राहुल गांधी के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष साफ किया। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान राहुल गांधी ने उनका नाम एपस्टीन फ़ाइल्स के संदर्भ में लिया, जो पूरी तरह गलत और भ्रामक है। हरदीप पुरी ने कहा कि एपस्टीन से जुड़ी करीब 30 लाख फाइलें सार्वजनिक हुई हैं और उनमें उनके नाम से जुड़ी जो भी जानकारी है, वह सीमित और सामान्य मुलाकातों तक ही है।
हरदीप पुरी ने बताया कि वे करीब आठ साल तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत रहे। इस दौरान उनकी एपस्टीन से सिर्फ तीन या चार बार औपचारिक मुलाकात हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बैठकों का कोई निजी या गलत उद्देश्य नहीं था। ये मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय मंचों और संस्थागत कार्यक्रमों के दौरान हुई थीं।
पुरी ने यह भी बताया कि पिछले साल नवंबर में एक कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने उनसे बातचीत में कहा था कि एपस्टीन फ़ाइल्स में कुछ नाम सामने आए हैं। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को एक नोट भेजा था, जिसमें उन्होंने पूरी पृष्ठभूमि समझाई थी। इस नोट में उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र से रिटायर होने के बाद उन्हें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (IPI) में आमंत्रित किया गया था। उस संस्था के अध्यक्ष ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री थे और वही एपस्टीन को जानते थे। इसी माध्यम से उनका परिचय हुआ था.
केंद्रीय मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि एपस्टीन से जुड़े किसी भी आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ईमेल के जरिए हुई जो भी बातचीत है, वह सार्वजनिक है और उसमें कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक तरफ राहुल गांधी अपने दावे पर कायम हैं, वहीं दूसरी तरफ हरदीप पुरी ने इसे बेबुनियाद आरोप बताया है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि एपस्टीन फ़ाइल्स को लेकर आगे और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और संसद में यह मुद्दा कितना और गरमाता है। फिलहाल यह मामला देश की राजनीति में एक नया विवाद बनकर उभरा है।




