नई दिल्ली: महिलाओं के अधिकारों को लेकर Supreme Court of India ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब गोद लेने वाली मांओं को भी 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश मिलेगा, चाहे बच्चा तीन महीने से बड़ा ही क्यों न हो। इस फैसले को महिलाओं के हक में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दरअसल पहले नियम यह था कि अगर कोई महिला तीन महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती है, तभी उसे 12 हफ्ते की छुट्टी मिलती थी। लेकिन अब कोर्ट ने इस सीमा को खत्म कर दिया है। यानी अब बच्चे की उम्र चाहे कुछ भी हो, गोद लेने वाली मां को मातृत्व अवकाश का पूरा अधिकार मिलेगा।
यह फैसला जस्टिस J.B. Pardiwala और जस्टिस R. Mahadevan की पीठ ने सुनाया। कोर्ट ने Social Security Code, 2020 की उस धारा को असंवैधानिक करार दिया, जिसमें इस तरह की पाबंदी लगाई गई थी। कोर्ट ने कहा कि यह नियम महिलाओं के साथ भेदभाव करता है और समानता के अधिकार के खिलाफ है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश बच्चे को मां के साथ समय बिताने और उसके सही पालन-पोषण के लिए जरूरी है। इसलिए गोद लेने वाली मां को भी वही अधिकार मिलने चाहिए, जो जैविक मां को मिलते हैं। हालांकि पितृत्व अवकाश को लेकर कोर्ट ने कहा कि इस पर फैसला सरकार को लेना है।
इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि देश में गोद लेने वाली मांओं को ज्यादा अधिकार और सुरक्षा मिलेगी। साथ ही यह फैसला समाज में समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।




