इस नई सफलता के साथ भारत में पैदा हुए जिंदा चीता शावकों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है, जबकि देश में कुल चीतों की आबादी अब 38 तक पहुंच गई है। यह नौवीं बार है जब भारतीय जमीन पर चीतों का सफल प्रजनन दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़ा प्रोजेक्ट चीता की मजबूती को दिखाता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हर सफल जन्म इस बात का सबूत है कि वन विभाग की टीम और पशु चिकित्सक लगातार मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने इसे कूनो और पूरे देश के लिए गर्व का पल बताया और उम्मीद जताई कि गामिनी और उसके तीनों शावक स्वस्थ और मजबूत बनेंगे।
गौरतलब है कि 2022-23 में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीतों को भारत लाया गया था। इसे दुनिया का पहला ऐसा बड़ा प्रयास माना गया, जिसमें एक बड़े शिकारी जानवर को एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप में बसाया गया। इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले आठ चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार हो रहे जन्म यह संकेत देते हैं कि चीतों ने भारतीय पर्यावरण के साथ खुद को ढालना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में इनकी संख्या और बढ़ने की उम्मीद है।
कूनो नेशनल पार्क अब सिर्फ पर्यटन का केंद्र नहीं, बल्कि चीता संरक्षण की नई पहचान बन चुका है। तीन नए शावकों के जन्म के साथ देश में चीता पुनर्वास की कहानी को एक नई रफ्तार मिली है, जिसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी।




