प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसा सुबह करीब 9:30 बजे हुआ। फैक्ट्री के अंदर एक के बाद एक 3 से 4 जोरदार धमाके हुए। धमाकों की आवाज काफी दूर तक सुनाई दी, जिससे आसपास के लोग भी डर गए। कुछ ही मिनटों में आग ने पूरी फैक्ट्री को अपनी चपेट में ले लिया। फैक्ट्री में केमिकल और ज्वलनशील सामान मौजूद होने के कारण आग बहुत तेजी से फैलती चली गई।
बताया जा रहा है कि हादसे के समय फैक्ट्री के अंदर करीब 25 मजदूर काम कर रहे थे। धमाके के बाद कई मजदूर बाहर भागने में सफल रहे, लेकिन 8 लोग अंदर ही फंस गए और आग की चपेट में आ गए। अंदर चीख-पुकार मच गई और चारों तरफ धुआं फैल गया, जिससे बचाव कार्य में भी काफी परेशानी हुई।
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फायर ब्रिगेड की टीम ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद अंदर जाकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। जले हुए शवों को बाहर निकाला गया, जिन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। एक मजदूर के अब भी फंसे होने की आशंका जताई जा रही है और उसका पता लगाने के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में केमिकल के साथ-साथ पटाखे बनाने का काम भी किया जा रहा था। आशंका है कि गैस सिलेंडर या किसी ज्वलनशील सामग्री में विस्फोट होने से यह हादसा हुआ। हालांकि, प्रशासन की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।
घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सील कर दिया गया। हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा नियमों के पालन की जरूरत को उजागर करता है।




