नई दिल्ली, 31 मार्च 2026: एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप ने अपने प्रमुख भारतीय शास्त्रीय संगीत उत्सव ‘भीलवाड़ा सुर संगम’ के 13वें संस्करण की घोषणा की है। यह दो दिवसीय प्रतिष्ठित सांस्कृतिक आयोजन 4 और 5 अप्रैल 2026 को कमानी ऑडिटोरियम, कोपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। राजधानी के सांस्कृतिक कैलेंडर का एक अहम हिस्सा बन चुके इस उत्सव का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का उत्सव मानते हुए उसे आगे बढ़ाना है। यह मंच हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत—दोनों परंपराओं के कलाकारों को एक साथ प्रस्तुत करता है। इस वर्ष का आयोजन राग-आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को एक गहन और भावनात्मक अनुभव देने का वादा करता है, साथ ही देश के प्रमुख गायकों और वादकों को एक मंच पर लाने की अपनी परंपरा को भी आगे बढ़ाता है।
उत्सव की शुरुआत 4 अप्रैल की शाम 6:00 बजे होगी, जिसमें सबसे पहले श्री भाग्येश मराठे की भावपूर्ण गायकी प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद वाद्य संगीत की विशेष प्रस्तुति होगी, जिसमें सरस्वती वीणा की प्रसिद्ध कलाकार डॉ. जयंती कुमारेष अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी। उत्सव के दूसरे दिन, 5 अप्रैल को शाम 5:30 बजे, कार्यक्रम की शुरुआत श्री समन्वय सरकार की सितार वादन प्रस्तुति से होगी, जिसके बाद सुप्रसिद्ध गायक पंडित मुकुल शिवपुत्र की विशेष प्रस्तुति आयोजित की जाएगी। ख्याल गायकी में अपनी गहरी पकड़ और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध पंडित शिवपुत्र की प्रस्तुति शास्त्रीय संगीत प्रेमियों के लिए इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेगी।
एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित ‘भीलवाड़ा सुर संगम’ ग्रुप की कला और संस्कृति के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आयोजन स्थापित कलाकारों और गंभीर श्रोताओं के बीच एक मजबूत सेतु का काम करता है, जिससे आधुनिक समय में भी शास्त्रीय संगीत की परंपरा संरक्षित और सशक्त बनी रहे। साल 2026 का यह संस्करण संगीत प्रेमियों, सांस्कृतिक संरक्षकों और समीक्षकों की बड़ी भागीदारी को आकर्षित करने की उम्मीद है। कार्यक्रम में प्रवेश आमंत्रित अतिथियों और पंजीकृत दर्शकों के लिए खुला रहेगा, जिससे यह आयोजन शास्त्रीय संगीत समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण और सुलभ मंच बना रहेगा।
एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप के बारे में
एलएनजे भीलवाड़ा ग्रुप एक बहु-क्षेत्रीय औद्योगिक कंगलोमेरट है, जिसकी विरासत छह दशकों से अधिक पुरानी है। कपड़ा, ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड और ऊर्जा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में अपनी अग्रणी उपस्थिति के साथ-साथ ग्रुप सामाजिक और सांस्कृतिक पहलों में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। ‘भीलवाड़ा सुर संगम’ जैसे आयोजनों के माध्यम से ग्रुप भारतीय शास्त्रीय कला परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन को निरंतर प्रोत्साहित करता है, ताकि देश की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान आगे भी सशक्त रूप से बनी रहे।




