बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए राहत, बांस की खेती बनेगी कमाई का मजबूत सहारा

बाढ़ से परेशान किसानों के लिए अब एक नई उम्मीद सामने आई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बांस की खेती ऐसे इलाकों में फायदेमंद साबित हो सकती है, जहां हर साल पानी से फसलें खराब हो जाती हैं।

बांस की खेती से होगी मोटी कमाई... (Photo: nbm.nic.in)
बांस की खेती से होगी मोटी कमाई... (Photo: nbm.nic.in)

नई दिल्ली: Samastipur समेत बिहार के कई इलाकों में हर साल बाढ़ किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती है। धान, गेहूं जैसी पारंपरिक फसलें जलभराव में खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में अब वैज्ञानिकों ने एक नया और टिकाऊ विकल्प सुझाया है—बांस की खेती।

Dr. Rajendra Prasad Central Agricultural University के वैज्ञानिकों ने रिसर्च के बाद पाया है कि बांस की कुछ खास किस्में बाढ़ के पानी में भी आसानी से टिक सकती हैं। इनमें बंबूसा बालकोआ, बंबूसा न्यूटन्स और बंबूसा टुल्डा जैसी किस्में शामिल हैं, जो जलभराव की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन करती हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन किस्मों की खासियत यह है कि ये ज्यादा पानी को सहन कर लेती हैं और जल्दी खराब नहीं होतीं। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को एक स्थायी आय का जरिया मिल सकता है। खास तौर पर बंबूसा बालकोआ का सर्वाइवल रेट काफी अच्छा माना गया है, जिससे इसकी उपयोगिता और बढ़ जाती है।

रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने देशभर से करीब 70 किस्मों पर अध्ययन किया, जिनमें से ज्यादातर ने बेहतर परिणाम दिए। इससे यह साफ हो गया कि अगर सही तकनीक अपनाई जाए, तो बांस की खेती बाढ़ वाले इलाकों में भी सफल हो सकती है।

बांस की खेती का एक और फायदा यह है कि इसकी बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। इसका उपयोग निर्माण कार्य, फर्नीचर, सजावटी सामान और हस्तशिल्प बनाने में होता है। यानी किसान इसे बेचकर अच्छी कमाई भी कर सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने खेती की तकनीक भी बताई है। उनके अनुसार, बांस के पौधों के बीच करीब 6 मीटर की दूरी रखनी चाहिए। शुरुआती समय में खाली जगह पर सब्जियां उगाकर किसान अतिरिक्त आय भी कमा सकते हैं।

बाढ़ से जूझ रहे किसानों के लिए बांस की खेती एक मजबूत और फायदेमंद विकल्प बनकर सामने आ रही है। अगर किसान इसे सही तरीके से अपनाते हैं, तो हर साल होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।