नई दिल्ली: वैश्विक संकट के बीच भारत ने एलपीजी सप्लाई को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ाकर रोजाना 1 लाख यूनिट से ज्यादा कर दी है। इसका सीधा फायदा उन लोगों को मिलेगा, जिनके पास नियमित गैस कनेक्शन नहीं है, खासकर प्रवासी मजदूर और कम आय वाले परिवार।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85-90% एलपीजी पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने से सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने घरेलू गैस को प्राथमिकता देने की रणनीति अपनाई है, ताकि आम लोगों की रसोई पर असर न पड़े।
दूसरा बड़ा कदम पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG को लेकर उठाया गया है। सरकार ने तेजी से PNG कनेक्शन बढ़ाने का काम किया है और हाल के महीनों में 4 लाख से ज्यादा नए कनेक्शन दिए गए हैं। इससे भविष्य में सिलेंडर पर निर्भरता कम होगी और गैस की सप्लाई ज्यादा स्थिर बन सकेगी।
सरकार ने होटल, रेस्टोरेंट और मॉल जैसे कमर्शियल यूजर्स को PNG की तरफ शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं। इसका फायदा यह होगा कि एलपीजी की बचत होगी और उसे सीधे घरेलू उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाए गए हैं। अब लगभग सभी बुकिंग ऑनलाइन हो रही है और डिलीवरी OTP सिस्टम से जोड़ी गई है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि गैस सही लोगों तक पहुंचे और कोई गड़बड़ी न हो।
इसके अलावा सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर भी राहत दी है। बढ़ती महंगाई के बीच एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है, जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिल सके।
सरकार ने इस संकट के समय दोहरी रणनीति अपनाते हुए गैस और ईंधन दोनों मोर्चों पर राहत देने की कोशिश की है, ताकि वैश्विक हालात का असर सीधे जनता पर न पड़े।




