नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दलित वोटबैंक केंद्र में आ गया है। कांग्रेस इस बार पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतरती दिख रही है। इसी रणनीति के तहत 12 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में ‘रन फॉर अंबेडकर, रन फॉर कॉन्स्टिट्यूशन’ नाम की मैराथन आयोजित की जा रही है, जिसे राहुल गांधी हरी झंडी दिखाएंगे। इस आयोजन के जरिए पार्टी सामाजिक न्याय और संविधान के मुद्दे को जनता के बीच मजबूती से रखने की कोशिश कर रही है।
दरअसल, कांग्रेस पिछले कुछ समय से लगातार दलित नेताओं और महापुरुषों की विरासत को सामने लाने पर फोकस कर रही है। हाल ही में Jyotirao Phule की जयंती और Kanshi Ram से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए भी पार्टी ने दलित समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है। अब आंबेडकर के नाम पर मैराथन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह पूरी कवायद सीधे तौर पर दलित वोटरों को साधने के लिए की जा रही है। यूपी में करीब 20 फीसदी दलित वोटर हैं, जो लगभग 150 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। ऐसे में कोई भी पार्टी इस वोटबैंक को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
दिलचस्प बात यह है कि दलित राजनीति में लंबे समय तक मजबूत पकड़ रखने वाली Mayawati की पार्टी बसपा का जनाधार लगातार कमजोर होता दिख रहा है। यही वजह है कि कांग्रेस को इस खाली होती जमीन में बड़ा मौका नजर आ रहा है।
वहीं, 2024 लोकसभा चुनाव में ‘संविधान बचाओ’ जैसे मुद्दों पर सपा-कांग्रेस गठबंधन को दलितों का अच्छा समर्थन मिला था। अब पार्टी इस समर्थन को स्थायी बनाने की कोशिश में जुटी है।
राहुल गांधी की यह पहल सिर्फ एक मैराथन नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है। आने वाले चुनावों में यह रणनीति कितना असर दिखाएगी, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना साफ है कि यूपी की सियासत में दलित वोटबैंक को लेकर मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है।




