रोहित पवार का कहना है कि इस हादसे की जांच बहुत धीमी गति से चल रही है, इसलिए उन्हें खुद तथ्यों को खंगालना पड़ा। उन्होंने विमान कंपनी वीएसआर, बुकिंग संभालने वाली कंपनी एरो और पायलट पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि उनका आरोप डीजीसीए या सरकार पर नहीं है, बल्कि जांच प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने की मांग है।
उन्होंने दावा किया कि वीएसआर कंपनी के विमानों से पहले भी हादसे हो चुके हैं, लेकिन उनकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई। रोहित पवार का कहना है कि अगर पहले की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई होती, तो इस दुर्घटना को रोका जा सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विमान के रखरखाव में लापरवाही बरती गई और कई सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया गया।
रोहित पवार ने यह भी सवाल उठाया कि उड़ान के समय में बदलाव क्यों किया गया और आखिरी समय पर पायलट क्यों बदले गए। उनके मुताबिक, उड़ान तय समय से देर से रवाना हुई, जिससे कई तकनीकी और सुरक्षा सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने रनवे चयन को लेकर भी संदेह जताया और पूछा कि सुरक्षित रनवे होने के बावजूद दूसरे रनवे पर उतरने की कोशिश क्यों की गई।
एक और गंभीर आरोप यह लगाया गया कि विमान में अतिरिक्त ईंधन डिब्बों में रखा गया था, जो हादसे के वक्त ‘ईंधन बम’ जैसा बन सकता है। उन्होंने स्थानीय लोगों के हवाले से कहा कि दुर्घटना के समय कई धमाकों जैसी आवाजें सुनी गई थीं।
रोहित पवार ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र और अंतरराष्ट्रीय एजेंसी से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाना जरूरी है।
फिलहाल, इस मामले में विमान कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जैसे ही कंपनी या जांच एजेंसियों की ओर से जवाब मिलेगा, तस्वीर और साफ हो सकेगी।




