नई दिल्ली: कर्नाटक के उडुपी से निकलकर यूएई तक पहुंचने वाले बी.आर. शेट्टी ने अपने करियर की शुरुआत एक साधारण नौकरी से की थी। 1970 के दशक में वे बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश गए और वहां मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर काम किया। कुछ समय बाद उन्होंने एक छोटी क्लिनिक शुरू की, जहां सस्ती और अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण लोगों का भरोसा तेजी से बढ़ा।
यहीं से उनके बड़े सफर की शुरुआत हुई। धीरे-धीरे उन्होंने हेल्थकेयर बिजनेस को कई देशों तक फैला दिया। इसके साथ ही मनी ट्रांसफर और फार्मा सेक्टर में भी कदम रखा। उनकी कंपनी NMC Health ने 2012 में लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होकर इतिहास रच दिया। कुछ ही सालों में कंपनी की वैल्यू 10 अरब डॉलर यानी करीब 93 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
लेकिन 2019 में हालात बदलने लगे। एक विदेशी फर्म की रिपोर्ट में कंपनी पर वित्तीय गड़बड़ी और कर्ज छुपाने के आरोप लगे। शुरुआत में इन आरोपों को नजरअंदाज किया गया, लेकिन जल्द ही सच्चाई सामने आने लगी। कंपनी ने खुद माना कि उस पर भारी कर्ज है और कई वित्तीय जानकारियां सही तरीके से सामने नहीं रखी गई थीं।
2020 तक स्थिति और बिगड़ गई। जांच में फर्जी दस्तावेज, बिना अनुमति लिए गए लोन और कमजोर प्रबंधन जैसी कई खामियां सामने आईं। इसके बाद शेट्टी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और उनके कारोबार पर कानूनी शिकंजा कसता चला गया।
इस संकट का असर उनके दूसरे बिजनेस पर भी पड़ा। कई कंपनियां घाटे में चली गईं और कुछ को बेहद कम कीमत पर बेचना पड़ा। उनकी एक प्रमुख कंपनी को महज 74 रुपये में बेचना पड़ा, जो अपने आप में चौंकाने वाली घटना थी।
आज हालात यह हैं कि NMC Health तो चल रही है, लेकिन उस पर शेट्टी का कोई नियंत्रण नहीं है। उनकी संपत्तियां कानूनी विवादों में फंसी हुई हैं और जांच अब भी जारी है।
बिजनेस में सिर्फ तेजी से बढ़ना ही काफी नहीं होता। पारदर्शिता, सही वित्तीय प्रबंधन और भरोसा बनाए रखना उतना ही जरूरी है, वरना सालों की मेहनत कुछ ही समय में खत्म हो सकती है।




