नई दिल्ली: आर्टेमिस-2 मिशन के तहत इंसानों को चांद के पास तक भेजा जाएगा, हालांकि इस बार लैंडिंग नहीं होगी। ये मिशन सिर्फ चांद के चारों ओर चक्कर लगाकर वापस लौटेगा। इससे पहले 1972 में Apollo program के दौरान इंसान चांद तक गया था, उसके बाद ये पहला मौका है जब इतनी लंबी दूरी पर मानव मिशन भेजा जा रहा है।
इस मिशन की शुरुआत एक शक्तिशाली रॉकेट Space Launch System से होगी, जो फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से उड़ान भरेगा। इसके साथ Orion spacecraft कैप्सूल जुड़ा होगा, जिसमें चारों अंतरिक्ष यात्री सवार रहेंगे।
इस मिशन में कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें Reid Wiseman, Victor Glover, Christina Koch और Jeremy Hansen शामिल हैं। इनमें एक महिला अंतरिक्ष यात्री भी हैं।
पूरी यात्रा करीब 10 दिनों की होगी। पहले दिन यान पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलेगा। इसके बाद 3-4 दिन में चांद के पास पहुंचेगा, वहां एक दिन तक उसकी परिक्रमा करेगा और फिर 4 दिन में वापस पृथ्वी पर लौट आएगा।
इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भविष्य के चांद मिशनों की तैयारी करना है। अंतरिक्ष यात्री इस दौरान यान की तकनीक, सुरक्षा सिस्टम और अपने स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करेंगे। साथ ही चांद के दूर वाले हिस्से की तस्वीरें भी ली जाएंगी, जिसे इंसानों ने अब तक करीब से नहीं देखा है।
जब यान वापस पृथ्वी पर लौटेगा, तब उसकी रफ्तार बेहद तेज होगी और उसे बहुत ज्यादा तापमान का सामना करना पड़ेगा। इसके बाद वह पैराशूट की मदद से समुद्र में सुरक्षित लैंड करेगा।
आर्टेमिस-2 मिशन सिर्फ एक यात्रा नहीं बल्कि भविष्य में चांद पर इंसान बसाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर यह मिशन सफल रहता है, तो आने वाले समय में इंसान फिर से चांद की जमीन पर कदम रख सकता है।




