बैंक यूनियनों का कहना है कि वे सरकार के नए लेबर कोड के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं। कर्मचारियों को डर है कि नए नियम उनके अधिकारों और नौकरी की सुरक्षा को कमजोर करेंगे। इसके अलावा, बैंक कर्मचारी लंबे समय से 5 दिन का वर्क वीक और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस की मांग भी कर रहे हैं। इन्हीं मुद्दों को लेकर देश की बड़ी बैंक यूनियनें इस हड़ताल में शामिल हो रही हैं।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और कुछ अन्य सरकारी बैंकों ने पहले ही संकेत दे दिया है कि हड़ताल के कारण बैंक के कामकाज पर असर पड़ सकता है। हालांकि बैंकों की कोशिश रहेगी कि सेवाएं सामान्य रहें, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से काम में देरी होना तय माना जा रहा है। खास तौर पर कैश जमा करना, चेक क्लीयरेंस, ड्राफ्ट बनवाना और लोन से जुड़े काम प्रभावित हो सकते हैं।
अगर आपको किसी जरूरी दस्तावेज पर बैंक की मुहर लगवानी है या कैश निकालना है, तो बेहतर होगा कि आज ही अपना काम निपटा लें। कई जगहों पर बैंक काउंटरों पर लंबी लाइनें लग सकती हैं और कुछ शाखाओं में सीमित कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे।
राहत की बात यह है कि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी। नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI ट्रांजैक्शन पर कोई रोक नहीं होगी। एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा भी जारी रहेगी, हालांकि कुछ इलाकों में कैश रीफिल में देरी हो सकती है।
बैंक अधिकारियों का कहना है कि हड़ताल का असर हर शहर और हर ब्रांच में अलग-अलग हो सकता है। कहीं सेवाएं लगभग सामान्य रहेंगी तो कहीं पूरी तरह से काम ठप भी हो सकता है। इसलिए अगर आपको कल बैंक जाना जरूरी है, तो पहले अपनी नजदीकी शाखा में फोन करके जानकारी जरूर ले लें।
कुल मिलाकर, 12 फरवरी को बैंक पूरी तरह बंद नहीं होंगे, लेकिन हड़ताल के चलते ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में समझदारी इसी में है कि जरूरी बैंकिंग काम पहले ही पूरे कर लिए जाएं और डिजिटल सेवाओं का ज्यादा इस्तेमाल किया जाए।




