होर्मुज में फंसी LPG से भर सकते हैं करोड़ों सिलेंडर, फिर भी क्यों नहीं मिलेगी राहत?

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर एलपीजी आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। मौजूदा हालात में सप्लाई रुकने से बाजार में कमी और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि सरकार भी हालात पर नजर बनाए हुए है और कालाबाजारी रोकने के लिए कदम उठा रही है।

Naveen Bansal
Naveen Bansal

नई दिल्ली: ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। खबर है कि Strait of Hormuz में भारत की करीब 3 लाख टन एलपीजी फंसी हुई है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर इस गैस से कितने रसोई गैस सिलेंडर भरे जा सकते हैं और क्या इससे राहत मिलेगी?

अगर आसान भाषा में समझें तो 1 टन एलपीजी में 1000 किलो गैस होती है। इस हिसाब से 3 लाख टन यानी करीब 30 करोड़ किलो गैस फंसी हुई है। भारत में एक घरेलू गैस सिलेंडर में 14.2 किलो गैस आती है। इस गणना से देखा जाए तो इस एलपीजी से करीब 2.11 करोड़ सिलेंडर भरे जा सकते हैं।

सुनने में यह संख्या काफी बड़ी लगती है, लेकिन असली तस्वीर थोड़ी अलग है। देश में हर दिन लगभग 70 से 80 लाख गैस सिलेंडर की खपत होती है। यानी अगर यह पूरी गैस भारत पहुंच भी जाए, तो यह सिर्फ 3 से 4 दिन की जरूरत ही पूरी कर पाएगी।

इस पूरी स्थिति से साफ है कि भले ही फंसी हुई गैस की मात्रा बड़ी है, लेकिन देश की जरूरत के हिसाब से यह बहुत कम है। इसलिए अगर जल्द सप्लाई बहाल नहीं होती, तो आने वाले दिनों में आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।