यह हड़ताल तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) ने राष्ट्रीय मजदूर संगठनों के साथ मिलकर बुलाई है। इसे ‘ऑल इंडिया ब्रेकडाउन’ नाम दिया गया है। यूनियन ने सोशल मीडिया पर कहा कि ऐप आधारित ड्राइवरों के लिए न तो कोई तय न्यूनतम किराया है और न ही कोई ठोस नियम-कानून, जिससे उनका लगातार शोषण हो रहा है।
ड्राइवर क्यों कर रहे हैं विरोध?
ड्राइवरों का कहना है कि कंपनियां अपनी मर्जी से किराया तय करती हैं और भारी कमीशन काट लेती हैं। इससे उनकी कमाई अस्थिर हो गई है। यूनियन ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर मांग की है कि सरकार न्यूनतम किराया और स्पष्ट नियम बनाए, ताकि ड्राइवरों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
उनका आरोप है कि लाखों ऐप आधारित ड्राइवर गरीबी की ओर धकेले जा रहे हैं, जबकि बड़ी एग्रीगेटर कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं।
पैनिक बटन बना नई परेशानी
महाराष्ट्र कामगार सभा ने भी हड़ताल का समर्थन किया है। संगठन का कहना है कि सरकार की ओर से अनिवार्य पैनिक बटन डिवाइस लगाने के आदेश से ड्राइवरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। कई जगह पहले से लगे डिवाइस हटाकर नए लगाने को कहा जा रहा है, जिससे ड्राइवरों को करीब 12 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है।
ड्राइवर संगठनों ने ओपन परमिट पॉलिसी के तहत ऑटो रिक्शा की संख्या बढ़ने और अवैध बाइक टैक्सियों के संचालन पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है। साथ ही दुर्घटना की स्थिति में कई बाइक टैक्सी चालकों को बीमा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
इस हड़ताल का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। कई शहरों में कैब और बाइक टैक्सी सेवाएं सीमित हो गई हैं। ड्राइवर संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार और कंपनियां ध्यान नहीं देंगी, तब तक वे ऐसे आंदोलन जारी रखेंगे। कुल मिलाकर, यह हड़ताल ड्राइवरों की कमाई, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।


