प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लेबर कोड, महंगाई, बेरोजगारी और निजीकरण जैसे मुद्दों को लेकर लंबे समय से चिंता बनी हुई है। जंतर-मंतर पर यूनियन नेताओं और मजदूर संगठनों ने शांतिपूर्ण तरीके से नारेबाजी की और अपनी बात रखी। मौके पर पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे और स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण रही।
ट्रेड यूनियन संगठन सीटू (CITU) की ओर से जारी प्रेस बयान के अनुसार, इस आम हड़ताल में देशभर से करोड़ों मजदूरों और किसानों ने हिस्सा लिया। संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों की भागीदारी देखने को मिली। कई जगहों पर रैलियां, प्रदर्शन और पिकेटिंग की गई।
प्रेस बयान के मुताबिक केरल, ओडिशा, त्रिपुरा और कुछ अन्य राज्यों में बंद जैसी स्थिति देखी गई। कोयला और खनन क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन प्रभावित हुआ। बिजली, पेट्रोलियम, बंदरगाह, परिवहन और औद्योगिक क्षेत्रों में भी कामकाज पर असर पड़ा।
बैंक और बीमा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों की भागीदारी के कारण कई जगहों पर सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित रहीं। फैक्ट्रियों, ऑटोमोबाइल कंपनियों, सीमेंट प्लांट और टेक्सटाइल उद्योगों में भी काम ठप होने की खबरें सामने आईं।
आंगनवाड़ी, आशा वर्कर, मिड-डे मील कर्मचारी और निर्माण मजदूरों की बड़ी भागीदारी इस हड़ताल की खास बात रही। ग्रामीण इलाकों में किसानों और खेत मजदूरों ने भी समर्थन रैलियां निकालीं।
जंतर-मंतर पर मौजूद यूनियन नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, आंदोलन जारी रहेगा। वहीं प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी गई और किसी तरह की बड़ी अव्यवस्था की सूचना नहीं मिली।
इस आम हड़ताल ने यह साफ कर दिया कि मजदूर और किसान अपने मुद्दों को लेकर संगठित होकर आवाज उठा रहे हैं। अब सभी की नजर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है कि इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाया जाता है।




