राघव चड्ढा को भगवंत मान की नसीहत, लोकसभा का किस्सा सुनाकर कहा, पार्टी का फैसला सबसे ऊपर…

पंजाब की राजनीति में इन दिनों आम आदमी पार्टी के अंदर अनुशासन और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने पुराने अनुभव का उदाहरण देकर राघव चड्ढा को एक अहम संदेश देने की कोशिश की है।

राघव चड्ढा को भगवंत मान की नसीहत... (फोटो साभार: फेसबुक)
राघव चड्ढा को भगवंत मान की नसीहत... (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हाल ही में दिए बयान में साफ किया कि पार्टी के फैसले हर नेता के लिए सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम लेकर हमला नहीं किया, लेकिन उनके बयान को राघव चड्ढा से जोड़कर देखा जा रहा है।

मान ने अपने लोकसभा के दिनों को याद करते हुए एक पुराना किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह सांसद थे, तब शुरुआत में धर्मवीर गांधी को पार्टी की ओर से सदन का नेता बनाया गया था। लेकिन कुछ समय बाद पार्टी ने फैसला बदलते हुए यह जिम्मेदारी उन्हें दे दी। यह बदलाव पूरी तरह संगठन के स्तर पर लिया गया निर्णय था, जिसे सभी को मानना पड़ा।

इसी उदाहरण के जरिए भगवंत मान ने यह समझाने की कोशिश की कि राजनीति में ऐसे बदलाव आम बात हैं और इन्हें व्यक्तिगत तौर पर नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदर जो भी निर्णय होता है, वह सामूहिक सोच और रणनीति का हिस्सा होता है।

मुख्यमंत्री ने आगे यह भी कहा कि जब कोई पार्टी विपक्ष में होती है, तो सदन के अंदर अनुशासन और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। पार्टी की लाइन और व्हिप का पालन करना हर सदस्य की जिम्मेदारी होती है। अगर कोई नेता इससे अलग चलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भगवंत मान का यह बयान एक तरह से अप्रत्यक्ष संदेश है, जिसमें उन्होंने बिना विवाद बढ़ाए अपनी बात रखी है। वहीं राघव चड्ढा पहले भी यह कह चुके हैं कि वह पार्टी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और आगे भी उसी के साथ रहेंगे।