“युवा ‘अभिमन्यु’ जैसे हों, जो ‘चक्रव्यूह’ को भेद सकें”

रक्षा मंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे उन साहसी और समर्पित एनसीसी कैडेट्स से प्रेरणा लें, जिन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देशभर में आयोजित मॉक ड्रिल्स के माध्यम से जन-जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

“जब दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, तब हमारे युवाओं को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत रहना चाहिए और हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए,” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह बात कही।

24 जनवरी, 2026 को दिल्ली कैंट में आयोजित एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर में कैडेट्स को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें देश की “दूसरी रक्षा पंक्ति” बताया, जिन्होंने उस समय असाधारण योगदान दिया जब राष्ट्र ने इस अभियान के दौरान अपने सशस्त्र बलों के पीछे एकजुट होकर समर्थन खड़ा किया। उन्होंने कहा, “भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और ## में स्थित आतंकियों को नष्ट किया, जो पहलगाम में हुए दुर्भाग्यपूर्ण और कायरतापूर्ण आतंकी हमले का करारा जवाब था। हमारे सैनिकों ने साहस और संयम के साथ कार्रवाई की। हमने केवल उन्हीं को निशाना बनाया और नष्ट किया जिन्होंने हमें नुकसान पहुंचाया, किसी और को नहीं। यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि हमारे सैनिक शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत हैं।”

रक्षा मंत्री ने युवाओं को महाभारत के अभिमन्यु के समान बताया, जो किसी भी प्रकार के चक्रव्यूह में प्रवेश करना जानते हैं और उससे विजयी होकर बाहर निकलते हैं। उन्होंने युवाओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 2047 तक भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने के विज़न को साकार करने में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “हम ऐसे समय में प्रवेश कर चुके हैं जब युवाओं से अपेक्षाएँ बढ़ गई हैं। वे राष्ट्र की अमूल्य संपत्ति हैं, जिन पर देश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी है।”

राजनाथ सिंह ने एनसीसी को युवाओं के सर्वांगीण विकास का एक उत्कृष्ट माध्यम बताया, जो बदले में राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि एनसीसी कैडेट्स में अनुशासन और देशभक्ति का संचार करती है तथा ‘एकाग्रता की कमी’ की समस्या को दूर करने में मदद करती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान युग में, जब लोग हर चीज तुरंत पाना चाहते हैं, एनसीसी धैर्य, निरंतरता और एकाग्रता सिखाती है, जो जीवन की बड़ी लड़ाइयों, राष्ट्र की महान जिम्मेदारियों और चरित्र निर्माण के लिए आवश्यक हैं। यह एकाग्रता उनके जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देती है—चाहे वे सशस्त्र बलों में शामिल हों या डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वैज्ञानिक, प्रशासक, राजनेता आदि बनें। उन्होंने कैडेट्स को सलाह दी, “आपके पास हमेशा प्लान-बी होना चाहिए और यह याद रखना चाहिए कि अगर आज बारिश है तो कल धूप जरूर निकलेगी। जीवन में सफलता पाने के लिए ‘माय वे ऑर द हाईवे’ से आगे बढ़कर ‘सैन्य दृष्टिकोण’ को अपनाएं।”

राष्ट्र निर्माण में एनसीसी की भूमिका को रेखांकित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि एनसीसी से प्रशिक्षित अनेक लोगों ने देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा, “परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन मनोज पांडे और कैप्टन विक्रम बत्रा एनसीसी कैडेट थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैं स्वयं भी एनसीसी कैडेट रहे हैं। कई अन्य लोग भी एनसीसी से निकलकर देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं। 1965 और 1971 के युद्धों के दौरान एनसीसी कैडेट्स को दूसरी रक्षा पंक्ति के रूप में तैनात किया गया था। यह वह महत्वपूर्ण भूमिका है जो एनसीसी ने हर क्षेत्र में निभाई है।”

26 जनवरी को देश अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा। इस अवसर पर राजनाथ सिंह ने कहा कि यह दिन लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के प्रति देश के संकल्प को मजबूत करने की याद दिलाता है। उन्होंने कहा, “संविधान केवल एक ग्रंथ नहीं है, बल्कि हमारे सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक तथा अन्य अधिकारों और कर्तव्यों को सशक्त करने का माध्यम है। हमें वैसा नागरिक बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए जैसा हमारा संविधान हमसे अपेक्षा करता है। हमें अपने संविधान को समझना चाहिए और उसमें निहित अधिकारों व कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। इस पूरे अभियान में हमारे एनसीसी कैडेट्स ध्वजवाहक की भूमिका निभा सकते हैं।”

कार्यक्रम के अंतर्गत एक ‘इन्वेस्टिचर सेरेमनी’ का आयोजन भी किया गया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन और कर्तव्यनिष्ठा के लिए कैडेट्स को रक्षा मंत्री पदक और प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए। इस वर्ष रक्षा मंत्री पदक जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख निदेशालय की कैडेट अर्पण दीप कौर तथा पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम निदेशालय के कैडेट पालडेन लेपचा को प्रदान किया गया। प्रशंसा पत्र कर्नाटक एवं गोवा निदेशालय की पेटी ऑफिसर लीशा देजप्पा सुवर्णा, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ निदेशालय के जूनियर अंडर ऑफिसर पवन भगेल, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र निदेशालय की कॉरपोरल राधा दोर्जी तथा उत्तराखंड निदेशालय के कैडेट प्रिंस सिंह राणा को प्रदान किए गए।

राजनाथ सिंह ने जीवन में केवल प्लान-ए ही नहीं, बल्कि प्लान-बी और आवश्यकता पड़ने पर प्लान-सी तैयार रखने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब केवल प्लान-ए होता है और वह काम नहीं करता, तो भय और निराशा उत्पन्न होती है, लेकिन प्लान-बी और प्लान-सी होने से परिस्थितियों को नियंत्रण में लाया जा सकता है।