ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में इलाज के लिए भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या करीब 6.9 लाख थी। कोरोना काल के दौरान यह संख्या घट गई थी, लेकिन अब हालात सुधरने लगे हैं। साल 2023 में लगभग 6.59 लाख विदेशी मरीज इलाज के लिए भारत आए, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 6.44 लाख तक पहुंच गया। वहीं 2025 में जनवरी से नवंबर तक करीब 4.5 लाख विदेशी नागरिक मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए भारत पहुंचे हैं।
पर्यटन मंत्रालय ने बताया कि मेडिकल और हेल्थ टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति और रोडमैप तैयार किया गया है। इसे केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े संगठनों को भेजा गया है, ताकि मिलकर इस सेक्टर को आगे बढ़ाया जा सके।
सरकार ने विदेशी मरीजों की सुविधा के लिए ई-मेडिकल वीजा और ई-मेडिकल अटेंडेंट वीजा की व्यवस्था को और आसान बनाया है। इससे मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को भारत आने में कम परेशानी होती है।
इसके अलावा, सेवा निर्यात संवर्धन परिषद (SEPC) ने एक खास वेबसाइट भी बनाई है, जहां इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी मिलती है। इस पोर्टल पर मान्यता प्राप्त अस्पतालों, हेल्थ सेंटर्स, डॉक्टरों, वीजा प्रक्रिया और दूसरी जरूरी जानकारियां उपलब्ध कराई गई हैं। पर्यटन मंत्रालय ने इस वेबसाइट का लिंक अपनी आधिकारिक साइट पर भी दिया है।
सरकार का मानना है कि भारत में कम खर्च में बेहतर इलाज, अनुभवी डॉक्टर, आधुनिक अस्पताल और आयुष पद्धतियों (योग, आयुर्वेद, यूनानी आदि) की वजह से दुनिया भर के लोग यहां इलाज के लिए आ रहे हैं। यही वजह है कि मेडिकल टूरिज्म को भविष्य की बड़ी संभावना माना जा रहा है।
पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में बताया कि मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है और आने वाले समय में इस सेक्टर से रोजगार और विदेशी मुद्रा दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, भारत धीरे-धीरे मेडिकल टूरिज्म के ग्लोबल हब की ओर बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में इसमें और तेजी आने की संभावना है।




