पाकिस्तान पहले इस मैच को लेकर कई दिनों तक असमंजस में रहा। कभी बॉयकॉट की बात कही गई तो कभी ICC पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। आखिरकार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्ड और कुछ मित्र देशों के समझाने के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ खेलने पर सहमति जता दी। लगा कि मामला शांत हो गया है, लेकिन तभी नकवी के बयान ने फिर से हलचल पैदा कर दी।
मोहसिन नकवी ने कहा कि न तो वह, न पाकिस्तान सरकार और न ही फील्ड मार्शल आसिम मुनीर किसी दबाव या धमकी से डरते हैं। उन्होंने ICC और भारत का नाम लेकर यह बयान दिया, जिसे कई लोग गैरजरूरी और उकसावे वाला मान रहे हैं। क्रिकेट से जुड़ा मामला अचानक सेना और सरकार की ताकत दिखाने वाला बयान बन गया।
आसिम मुनीर हाल के महीनों में पाकिस्तान की राजनीति और सेना दोनों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। उन्हें पिछले साल सैन्य संघर्ष के बाद फील्ड मार्शल बनाया गया था और पाकिस्तान सरकार उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रतीक बताती है। ऐसे में नकवी द्वारा उनका नाम क्रिकेट विवाद से जोड़ना कई सवाल खड़े कर रहा है।
राजनीतिक और खेल विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान सिर्फ घरेलू जनता को संदेश देने के लिए दिया गया है। इससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि पाकिस्तान किसी दबाव में नहीं झुकता। लेकिन इससे यह भी साफ हो गया कि क्रिकेट को भी अब सियासी रंग दिया जा रहा है।
गौर करने वाली बात यह है कि पाकिस्तान सरकार पहले मैच न खेलने की बात कर रही थी, लेकिन बाद में यू-टर्न लेते हुए खेलने का फैसला किया। सरकार ने कहा कि यह फैसला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की भावना बनाए रखने के लिए लिया गया है। हालांकि नकवी के बयान ने इस फैसले को भी विवादों में ला खड़ा किया है।
अब सबकी नजर 15 फरवरी के मुकाबले पर है, जहां मैदान पर क्रिकेट होगा, लेकिन मैदान के बाहर बयानबाजी और राजनीति का असर भी साफ नजर आएगा। यह मुकाबला सिर्फ खेल नहीं, बल्कि दो देशों के बीच तनाव भरे रिश्तों की एक और झलक बनता दिख रहा है।




