सबसे बड़ा बदलाव दाल को लेकर हुआ है। पहले कहा गया था कि भारत अमेरिकी कृषि और औद्योगिक उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा, जिसमें दाल भी शामिल थी। लेकिन अब नए दस्तावेज में दाल का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है। इससे साफ है कि भारत को इस मुद्दे पर राहत मिल गई है।
इसी तरह 500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर भी भाषा बदली गई है। पहले अमेरिका ने लिखा था कि भारत उससे 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने के लिए “कमिटेड” है। अब इसे बदलकर “इरादा रखता है” कर दिया गया है। यानी यह अब बाध्यकारी शर्त नहीं रही।
डिजिटल सर्विस टैक्स पर भी अमेरिका का रुख नरम हुआ है। पहले कहा गया था कि भारत यह टैक्स हटाएगा, लेकिन अब सिर्फ इतना कहा गया है कि भारत डिजिटल ट्रेड के नियमों पर बातचीत के लिए तैयार है।
इसके अलावा रूस से तेल आयात के कारण भारत पर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ को भी अमेरिका ने वापस लेने का फैसला किया है। इससे भारतीय कारोबारियों को करीब 40 हजार करोड़ रुपये की राहत मिलने की उम्मीद है। यह रिफंड अमेरिका के कस्टम्स नियमों के तहत दिया जाएगा। हालांकि रिफंड की राशि पहले अमेरिकी इम्पोर्टर को मिलेगी, फिर वे भारतीय निर्यातकों के साथ इसका बंटवारा करेंगे।
अमेरिका ने भारत पर नजर रखने के लिए एक टास्क फोर्स भी बनाई है, जिसमें वाणिज्य मंत्री, विदेश मंत्री और वित्त मंत्री शामिल होंगे। अगर यह समिति मानेगी कि भारत ने रूस से तेल का आयात फिर शुरू किया है, तो राष्ट्रपति को दोबारा 25% पेनल्टी लगाने की सिफारिश की जा सकती है।
इस समझौते से भारत को कई फायदे होंगे। भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ घटकर 18% तक आ गया है। जेनेरिक दवाएं, हीरे-रत्न और विमान पार्ट्स पर जीरो टैरिफ मिलेगा। इससे भारतीय MSME, किसान, मछुआरे और छोटे उद्योगों को अमेरिका के बड़े बाजार में बेहतर मौका मिलेगा।
कुल मिलाकर, इस बदली हुई फैक्ट शीट से साफ है कि भारत को ट्रेड डील में पहले से ज्यादा राहत मिली है और आने वाले समय में भारतीय निर्यात को मजबूती मिल सकती है।


