भवानीपुर में बदला सियासी समीकरण, मुस्लिम-कायस्थ गणित के बीच BJP की घेराबंदी, ममता के लिए चुनौती बढ़ी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में भवानीपुर सीट इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पारंपरिक सीट मानी जाने वाली इस जगह पर अब मुकाबला काफी कड़ा होता दिख रहा है।

भाजपा के चक्रव्यूह में ममता दीदी उलझीं। Credit: PTI File Photo
भाजपा के चक्रव्यूह में ममता दीदी उलझीं। Credit: PTI File Photo

नई दिल्ली: Bhabanipur सीट को लंबे समय से ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन इस बार के चुनाव में समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। बीजेपी ने यहां पूरी ताकत झोंक दी है और मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।

इस सीट पर बीजेपी की ओर से Suvendu Adhikari मैदान में हैं, जो पहले ममता के करीबी रहे हैं। ऐसे में यह मुकाबला सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का भी प्रतीक बन गया है। 2021 के नंदीग्राम चुनाव की यादें भी इस लड़ाई को और अहम बना रही हैं।

टीएमसी इस सीट को बचाने के लिए भावनात्मक कार्ड खेल रही है। ‘घर की बेटी’ जैसे नारों के जरिए ममता बनर्जी के स्थानीय जुड़ाव को मजबूत करने की कोशिश हो रही है। पार्टी के नेता घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और विकास कार्यों को मुद्दा बना रहे हैं।

वहीं बीजेपी ने इस बार जातीय और सामाजिक समीकरण पर खास फोकस किया है। भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जहां अलग-अलग समुदाय के लोग रहते हैं। बीजेपी इन वर्गों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही राम नवमी जैसे आयोजनों के जरिए धार्मिक और भावनात्मक माहौल बनाने की कोशिश भी देखी जा रही है।

चुनाव से पहले वोटर लिस्ट को लेकर भी विवाद सामने आया है। बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और कुछ नामों की जांच चलने से दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। इसे चुनावी नतीजों पर असर डालने वाला अहम फैक्टर माना जा रहा है।

पिछले चुनावों के आंकड़े भी बताते हैं कि अब यह सीट पहले जितनी आसान नहीं रही। बीजेपी ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है, जबकि टीएमसी की बढ़त में कमी आई है।

भवानीपुर की लड़ाई इस बार बेहद दिलचस्प हो गई है। यह सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि रणनीति, भावना और सामाजिक समीकरण की बड़ी टक्कर बन चुका है। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी अपना गढ़ बचा पाती हैं या बीजेपी इस बार बड़ा उलटफेर करती है।