बांग्लादेश में सत्ता पलटाव: BNP की बड़ी जीत, 17 साल बाद लौटे तारिक रहमान बनेंगे प्रधानमंत्री

नई सरकार के गठन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। खासकर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दोनों देशों की भूमिका अहम मानी जा रही है। रिपोर्ट: अंशिका गौर

नई दिल्ली/ढाका। बांग्लादेश में हुए 13वें संसदीय चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी है। शुरुआती रुझानों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बहुमत हासिल कर लिया है। पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बताया जा रहा है कि BNP गठबंधन ने 300 सीटों वाली संसद में 212 सीटें जीत ली हैं।

यह चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। पहली बार ऐसा हुआ जब सत्ताधारी अवामी लीग चुनाव मैदान में नहीं उतरी। अवामी लीग प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस समय भारत में हैं और उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने इस चुनाव को रद करने की मांग भी की है।

तारिक रहमान की यह जीत इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वे करीब 17 साल बाद देश लौटे हैं। उनकी मां और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन के बाद पार्टी की कमान पूरी तरह उनके हाथ में आई थी। अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के कारण BNP को सीधा फायदा मिला और पार्टी तेजी से सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी।

इस चुनाव में जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन भी मजबूत स्थिति में दिखा और करीब 70 सीटों पर आगे रहा। कुछ सीटों पर अभी भी गिनती जारी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा पार कर लेने के कारण BNP की सरकार बनना तय माना जा रहा है।

अंतरिम सरकार के मुखिया और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने चुनाव को “नए बांग्लादेश की शुरुआत” बताया है। उन्होंने कहा कि देश अब सुधारों और नई राजनीतिक व्यवस्था की ओर बढ़ेगा।

भारत भी इन नतीजों पर करीबी नजर बनाए हुए है। नई सरकार के गठन के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है। खासकर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दोनों देशों की भूमिका अहम मानी जा रही है।

कुल मिलाकर, यह चुनाव बांग्लादेश के इतिहास में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ता का केंद्र एक बार फिर BNP के हाथों में जाने जा रहा है।