नई दिल्ली: Bangladesh में हाल के दिनों में सियासी हलचल तेज हो गई है। छात्र आंदोलन के दौरान चर्चा में आए Asif Mahmud Shojib Bhuiyan ने अब एक ऐसा दावा किया है, जिसने राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
आसिफ महमूद, जो पहले Muhammad Yunus की अंतरिम सरकार में युवा और खेल मामलों के सलाहकार रह चुके हैं, उन्होंने कहा कि कुछ “शक्तिशाली संस्थाओं” यानी तथाकथित ‘डीप स्टेट’ ने सत्ता को लेकर एक खास योजना बनाई थी। उनके मुताबिक, यह योजना 2029 तक मौजूदा नेतृत्व को सत्ता में बनाए रखने से जुड़ी थी।
उन्होंने दावा किया कि यह प्रस्ताव उस समय सामने आया जब Sheikh Hasina को सत्ता से हटाया गया था। आसिफ के अनुसार, उन्हें यह सुझाव दिया गया था कि वे शेख हसीना के बचे हुए कार्यकाल को पूरा करें और बदले में उन्हें पूरा समर्थन मिलेगा।
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना के तहत विपक्षी नेताओं, खासकर Bangladesh Nationalist Party से जुड़े लोगों को चुनावी प्रक्रिया से दूर रखने की रणनीति भी बनाई गई थी। उनके मुताबिक, कानूनी मामलों को लंबा खींचकर विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश की जा सकती थी।
हालांकि, आसिफ महमूद का कहना है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उनका दावा है कि उन्होंने लोकतंत्र को प्राथमिकता दी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सत्ता छोड़ने तक का फैसला लिया।
इस बयान के सामने आने के बाद बांग्लादेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। अगर ये दावे सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ देश की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आरोप लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करते हैं। वहीं, कुछ लोग इसे राजनीतिक बयानबाजी भी मान रहे हैं।
फिलहाल, इस मामले में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इन आरोपों की जांच होती है या नहीं। लेकिन इतना तय है कि इस खुलासे ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।




