नई दिल्ली: Murshidabad में हुई एक रैली के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने ऐसा बयान दिया, जिसने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी है। Humayun Kabir के साथ मंच साझा करते हुए ओवैसी ने कहा कि अब तक मुसलमानों को सिर्फ “वोटिंग मशीन” की तरह इस्तेमाल किया गया है।
ओवैसी ने अपने भाषण में साफ तौर पर Mamata Banerjee, कांग्रेस और लेफ्ट पर निशाना साधा। उनका कहना था कि इन पार्टियों ने सालों तक अल्पसंख्यकों से वोट तो लिए, लेकिन उनके विकास के लिए ठोस काम नहीं किया। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब आबादी में हिस्सेदारी ज्यादा है, तो नौकरियों में भागीदारी इतनी कम क्यों है।
रैली में ओवैसी ने यह भी कहा कि जिस समाज का अपना नेतृत्व नहीं होता, वह आगे नहीं बढ़ पाता। उन्होंने हुमायूं कबीर को अपना करीबी बताते हुए कहा कि यह गठबंधन सिर्फ चुनाव के लिए नहीं, बल्कि एक मजबूत नेतृत्व तैयार करने की कोशिश है।
वहीं, West Bengal की राजनीति में इस बयान का असर साफ दिखने लगा है। खासकर मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे इलाकों में, जहां पहले से ही कांग्रेस और टीएमसी का दबदबा रहा है, वहां अब नया समीकरण बनता दिख रहा है।
हुमायूं कबीर ने भी रैली में ममता सरकार पर आरोप लगाए और कहा कि अल्पसंख्यकों के साथ न्याय नहीं हुआ। इस बीच ओवैसी का यह बयान कि मतदाता “वोटिंग मशीन” नहीं बल्कि “किंगमेकर” बनें, चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से मुस्लिम वोट बैंक में बिखराव हो सकता है, जो आने वाले चुनाव में बड़ा असर डाल सकता है। अब देखना होगा कि यह सियासी बयानबाजी चुनावी नतीजों पर कितना असर डालती है।




