नई व्यवस्था के तहत हर दिव्यांग अभ्यर्थी को वही परीक्षा केंद्र दिया जाएगा, जिसे उसने आवेदन के समय चुना होगा। पहले कई बार ऐसा होता था कि बड़े शहरों के केंद्र जल्दी भर जाने के कारण दिव्यांग उम्मीदवारों को दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों पर जाना पड़ता था। इससे उन्हें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी होती थी। अब इस नियम में बदलाव कर दिया गया है ताकि उन्हें यात्रा की अतिरिक्त दिक्कत न झेलनी पड़े।
UPSC ने साफ किया है कि दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए परीक्षा केंद्रों पर सीटों की कोई तय सीमा नहीं होगी। शुरुआत में हर केंद्र की क्षमता का उपयोग सामान्य और दिव्यांग दोनों उम्मीदवारों के लिए किया जाएगा। लेकिन अगर किसी केंद्र की सीटें पूरी भर भी जाती हैं, तब भी दिव्यांग उम्मीदवार उस केंद्र को चुन सकेंगे। जरूरत पड़ने पर वहां अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी भी दिव्यांग अभ्यर्थी को पसंद के केंद्र से वंचित न किया जाए।
UPSC अध्यक्ष अजय कुमार ने बताया कि पिछले पांच साल के आंकड़ों के विश्लेषण से यह सामने आया है कि दिल्ली, पटना, लखनऊ और कटक जैसे शहरों में परीक्षा केंद्र बहुत जल्दी भर जाते हैं। इसका सबसे ज्यादा असर दिव्यांग उम्मीदवारों पर पड़ता था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए यह नया फैसला लिया गया है, जिससे उन्हें बराबरी का मौका मिल सके और परीक्षा में भाग लेने में कोई रुकावट न आए।
आयोग ने आवेदन प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए नया ऑनलाइन आवेदन पोर्टल भी शुरू किया है। इसके जरिए उम्मीदवार आसानी से फॉर्म भर सकेंगे और परीक्षा से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को आयोजित होगी। इस परीक्षा के माध्यम से कुल 933 पदों पर भर्ती की जाएगी, जिनमें 33 पद दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। कुल मिलाकर, UPSC का यह फैसला दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है और इससे परीक्षा व्यवस्था ज्यादा संवेदनशील और समावेशी बनेगी।


