ताक़तवरों के मकडज़ाल में फँसता झारखण्ड

झारखण्ड के एक और आईएएस छवि रंजन निलंबित हो गये। राज्य सरकार ने 6 मई को उन्हें निलंबित कर दिया। उन पर रांची के उपायुक्त रहते हुए ज़मीन फ़र्ज़ीवाड़ा करने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 4 मई को 10 घंटे की पूछताछ के बाद छवि रंजन को गिरफ़्तार किया था। ईडी उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। झारखण्ड राजनीतिक आकाओं की सरपरस्ती में कारोबारी, बिल्डर और आईएएस के मकडज़ाल में किस तरह फँसता जा रहा है, ईडी की कार्रवाई ने इसे साफ़ कर दिया है। केवल एक सेना की 4.55 एकड़ के फ़र्ज़ीवाड़े का मामला नहीं है।

रांची के कई और भूखंडों का फ़र्ज़ीवाड़ा सामने आया है। करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। इससे पहले निलंबित आईएएस पूजा सिंघल मनरेगा घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी की गिरफ़्त में आ चुकी हैं। वह भी जेल में हैं। उस मामले की भी जाँच चल रही है। लोगों के बीच एक सवाल तैर रहा कि क्या राज्य में केवल एक छवि रंजन या पूजा सिंघल ही ऐसे आईएएस अधिकारी हैं, जो आरोप में घिरे हैं? इसका जवाब भी लोग ख़ुद ही देते हैं। ये पकड़े गये तो नज़र आये हैं, नहीं तो कई और अधिकारी आरोपों में घिरे और बचे हुए हैं। उनके ख़िलाफ़ जाँच आगे नहीं बढ़ी और मामले फाइलों में धूल फाँक रही हैं। इस सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता है।

सच साबित हुआ आईएएस का लेख

मध्य प्रदेश की 1994 बैच की महिला आईएएस दीपाली रस्तोगी ने कुछ साल पहले अंग्रेजी अख़बार में एक लेख लिखा था। उस वक़्त यह लेख काफ़ी चर्चित हुआ था। इस लेख को भारतीय नौकरशाही के लिए ‘आई ओपनर’ कहा जाता है। रस्तोगी ने लिखा हम अपने बारे में, अपनी बुद्धिमत्ता के बारे में और अपने अनुभव के बारे में बहुत ऊँची राय रखते हैं। सोचते हैं कि लोग इसी वजह से हमारा सम्मान करते हैं, जबकि असलियत यह है कि लोग हमारे आगे इसलिए समर्पण करते हैं, क्योंकि हमें किसी को फ़ायदा पहुँचाने या किसी का नुक़सान करने की ताक़त दी गयी है। हमें वेतन और सुविधाएँ इसलिए मिलती हैं कि हम अपने काम को कुशलता से करें और सिस्टम विकसित करें। सच्चाई यह है कि हम कुप्रबंध और अराजकता फैला कर पनपते हैं, क्योंकि ऐसा करने से हम कुछ को फ़ायदा पहुँचाने के लिए चुन सकते हैं और बाक़ी की उपेक्षा कर सकते हैं।

दीपाली रस्तोगी ने अपने लेख में यह भी लिखा था कि ‘हमें भारतीय गणतंत्र का स्टील फ्रेम माना जाता है। सच्चाई यह है कि हममें दूरदृष्टि ही नहीं होती। हम अपने राजनीतिक आकाओं की इच्छा के अनुसार औचक निर्णय लेते हैं। हम पूरी प्रशासनिक व्यवस्था का अपनी जागीर की तरह अपने फ़ायदे में या अपने चहेते लोगों के फ़ायदे में शोषण करते हैं।’ उन्होंने आगे लिखा था कि ‘हमें लगता है कि इतने पॉवर में हैं कि हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। हक़ीक़त देश में सही न्याय होता, तो हमारी क़ौम बहुत पहले ही ख़त्म हो जाती या दुर्लभ होती।’

यह बात कुछ हद तक सही भी है। क्योंकि छवि रंजन के बारे में जो बातें सामने आ रही हैं, ये सब तो आईएएस अधिकारियों पद के ग़ुरूर और राजनीतिक आकाओं की सरपरस्ती को ही झलकाता है। सूत्रों की मानें, तो छवि रंजन को राज्य के कुछ वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने इस तरह का काम नहीं करने की सलाह दी थी। वह बोलते थे- दस्तावेज़ कभी नहीं मरते। उस वक़्त छवि रंजन का जवाब था कि ‘अपने लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। ऊपर के कहने पर कर रहे हैं। दस्तावेज़ मरते नहीं, जलते तो हैं न।’

ऊपर कौन है, यह तो सभी जानते ही हैं; लेकिन दस्तावेज़ कितने जले यह छवि रंजन के अलावा शायद ही किसी को पता हो। यह हाल केवल छवि रंजन या पूजा सिंघल का नहीं है, जो भी पद के ग़ुरूर और राजनीतिक आकाओं की सरपरस्ती में भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, उन सभी भ्रष्ट आईएएस पर रस्तोगी की बातें सटीक बैठती हैं।

छवि रंजन पर कई आरोप

छवि रंजन की गिरफ़्तारी चौंकाने वाली नहीं थी। वह 2011 बैच के आईएएस हैं। केवल 12 साल के करियर में छवि रंजन ने जिस तरह की अपनी ‘छवि’ बना ली थी, उसमें कभी न कभी इस तरह के हालात का आना तय माना जा रहा था। सेना की भूमि समेत अन्य भूखंडों के फ़र्ज़ीवाड़ा में फँसे छवि रंजन के ख़िलाफ़ पहले भी कई आरोप लग चुके हैं। वह हमेशा से विवाद में रहे हैं। जुलाई 2020 में छवि रंजन को रांची उपायुक्त बनाया गया। वह जुलाई 2022 तक इस पद पर रहे। इस दौरान एक संवेदक ने हथियार का लाइसेंस देने के बदले पाँच लाख रुपये रिश्वत माँगने, हाईकोर्ट के अधिवक्ता एक अधिवक्ता को धमकाने समेत अन्य आरोप लगे। इससे पहले कोडरमा के उपायुक्त थे, तो अवैध रूप से पेड़ कटवाने का आरोप लगा था; जिसमें एसीबी की जाँच हुआ मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

बचते रहे कई भ्रष्ट

क्या झारखण्ड में भ्रष्टाचार की एकमात्र प्रतीक पूजा सिंघल या छवि रंजन ही हैं या पाप की इस नाली में डुबकी लगाने वाले किरदार और भी हैं? लोग यह सवाल पूछते भी हैं और चर्चा होने पर इसका जवाब भी देते हैं। लोग कहते हैं राज्य में भ्रष्ट अधिकारियों की कमी नहीं है। यही वजह है कि राज्य में भ्रष्टाचार चरम पर है। झारखण्ड में खनिज के अवैध धंधे के साथ ज़मीन और अन्य भ्रष्ट कामों के लिए राजनेता, कारोबारी, बिल्डर और अधिकारियों का एक नया नेक्सेस तैयार हो गया है। नौकरशाह बेफ़िक्र इसलिए होते हैं, क्योंकि वह कभी-कभार ही लपेटे में आते हैं।

सूत्रों की मानें, तो राजभवन से बीते वर्ष आरोपित आईएएस की सूची माँगी गयी थी, जिसमें किन पर क्या आरोप है और जाँच कहाँ लंबित है यह ब्योरा भी माँग गया था। सूत्र बताते हैं कि इसमें पूजा सिंघल, छवि रंजन जैसे लगभग दर्ज़न भर आईएएस अधिकारियों के नाम थे। जिनके कारनामे फाइलों में दम तोड़ रही हैं। अगर सरकारी फाइलों को खँगालें, तो स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सह विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह, पथ व भवन निर्माण सचिव सुनील, आईएएस किरण, संयुक्त सचिव गोपालजी तिवारी जैसे कई अधिकारी हैं, जिन पर आरोप लगे हैं। इनका मामला सीबीआई, एसीबी तो विभागीय स्तर जैसी जाँच एजेंसियों के पास फँसा पड़ा है। सरकार फाइल दाब कर बैठी हुई है।

दो और आईएएस निशाने पर

ईडी राज्य में ज़मीन फ़र्ज़ीवाड़ा के अलावा अवैध माइनिंग, मनी लॉन्ड्रिंग समेत अन्य मामलों की जाँच कर रही है। फ़िलहल दो आईएएस राजीव अरुण एक्का और रामनिवास यादव से पूछताछ हो चुकी है। आईएएस राजीव अरुण एक्का पर पॉवर ब्रोकर विशाल चौधरी के ऑफिस में सरकारी फाइलें पूछताछ कर निपटाने का आरोप है। इस मामले की जाँच के लिए राज्य सरकार ने रिटायर्ड चीफ जस्टिस बी.के. गुप्ता की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन भी किया है। वहीं आईएएस रामनिवास से साहिबगंज में अवैध खनन में संदेह के घेरे में हैं।

उधर, पॉवर ब्रोकर प्रेम प्रकाश, व्यवसायी विष्णु अग्रवाल, रांची और कोलकाता के रजिस्ट्रार समेत ज़मीन दलाल, अवैध खनन से जुड़े लोग और अन्य से पूछताछ की जा चुकी है। कुछ जेल में न्यायिक हिरासत में हैं, तो कुछ अभी तक बचे हुए हैं। ईडी कई लोगों को आगे पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी कर रही है। उनके ख़िलाफ़ सुबूत जुटाने में लगी है। जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ेगी ईडी का शिकंजा कसता जाएगा।

स्थिति बदलने की उम्मीद

झारखण्ड में भ्रष्टाचार के हर दिन नये क़िस्से सामने आते हैं। भ्रष्टाचार और घूसख़ोरी को हम चाहे कितना भी कोस लें, यह हक़ीक़त है कि आज हमारे सिस्टम का अंग बन गया है। इस अंग को हर हाल में काटकर अलग करना ही होगा। एक तरफ़ हम विश्व गुरु बनने का सपना देख रहे हैं, तो दूसरी तरफ़ पूजा सिंघल और छवि रंजन जैसे नौकरशाह हैं, जो 130 करोड़ लोगों के इस सपने को इस सड़ांध में डुबोने के लिए तैयार बैठे दिखायी देते हैं।

आज भी राज्य में कई ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी हैं, जो वाक़ई ईमानदारी से काम करना चाहते हैं। इनको राजनीति के चतुर खिलाडिय़ों, भ्रष्ट नौकरशाहों की अति महत्त्वाकांक्षा और पैसा कमाने की अंधाधुंध होड़ ने पीछे धकेल दिया है। इन्हें आगे लाने की ज़रूरत है। इसके लिए सरकार को मज़बूत होना होगा। नहीं तो जनता तो यही उम्मीद रखेगी कि जाँच एजेंसियों के $खौफ़ में ही सही कभी-न-कभी तो स्थिति बदलेगी।