इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते गैस की भारी कमी और उसकी कालाबाजारी की चर्चा जोरों पर है। लेकिन सभी प्रकार के ईंधन, खासकर पेट्रोल-डीजल की चोरी और उसकी कालाबाजारी के बारे में आम लोगों को कुछ पता नहीं है। तहलका एसआईटी ने अपनी इस पड़ताल में हरियाणा के मेवात में राजमार्गों (हाईवेज) के किनारे एक संगठित पेट्रोल-डीजल रैकेट का खुलासा हुआ है, जहां टैंकरों से ईंधन की चोरी करके उसका भंडारण किया जाता है और उसे ज्यादा मुनाफे के लिए बेचा जाता है। ऑपरेटर इस चोरी में पुलिस और माफिया की मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं और मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच इनके द्वारा अप्रत्याशित लाभ कमाने की बात कह रहे हैं। तहलका एसआईटी की रिपोर्ट :-
12 फरवरी 2026 को सुबह लगभग 10 बजे हम (तहलका रिपोर्टर) एक खोजी खबर के सिलसिले में सड़क मार्ग से दिल्ली से जैसलमेर, राजस्थान के लिए रवाना हुए। इस यात्रा में आमतौर पर 13 से 15 घंटे लगते हैं। दूरी अधिक होने के कारण हमने अगली सुबह जैसलमेर जाने से पहले जोधपुर में रात भर रुकने का फैसला किया।
जैसलमेर दिल्ली से लगभग 770-800 किलोमीटर दूर स्थित है और अधिकांश यात्री इतनी दूरी तय करने के लिए ट्रेन या हवाई जहाज को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि हमने इस उम्मीद में जानबूझकर सड़क मार्ग को चुना कि रास्ते में हमें कई जानकारियां मिलेंगी, जो हवाई या रेल यात्रा से संभव नहीं है। हमने कालिंदी कुंज से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्थिर गति बनाए रखते हुए यह सफर किया।
एक घंटे के भीतर हम हरियाणा के मेवात क्षेत्र के नूह जिले में पहुंच गए। जैसे ही अरावली पहाड़ियां नजर आने लगीं, रिपोर्टर की नजर एक असामान्य चीज पर पड़ी- सड़क के दोनों ओर लगभग पांच किलोमीटर तक फैली हुई 20 लीटर पानी की बोतलों की कतारें जोड़े में लटकी हुई थीं।
जिज्ञासावश मैंने अपने ड्राइवर से उनके बारे में पूछा। उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने बताया कि इन बोतलों का इस्तेमाल राजमार्ग पर चलने वाले ट्रकों से डीजल निकालने के लिए किया जाता है। सड़क मार्ग से यात्रा करने का हमारा निर्णय पहले ही सफल साबित हो गया। हमें संयोगवश अपनी पहली स्टोरी मिल गई। ड्राइवर ने आगे बताया कि यह प्रथा लंबे समय से चली आ रही है, जिसमें चोरी का डीजल खुले बाजार में सस्ते दामों पर बेचा जाता है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध ने एक गंभीर वैश्विक तेल संकट की आशंका पैदा कर दी है। लेकिन जिन राजमार्ग संचालकों से हमने बात की। उनके लिए यह एक अप्रत्याशित लाभ का अवसर है, जिसके चलते वे ईंधन की हेराफेरी और जमाखोरी कर रहे हैं। इस ईंधन को वे अभी से अधिक कीमतों पर बेचकर फायदा तो उठा ही रहे हैं, साथ ही भविष्य में ईंधन की कमी होने पर कई गुना लाभ कमाने की योजना भी बना रहे हैं।
‘हम डिपो से पेट्रोल पंपों तक ईंधन ले जाने वाले टैंकरों से तेल की चोरी कर रहे हैं। लेकिन वे हमें एक बार में केवल 200-300 लीटर ही देते हैं। हमें एक बार में 1,500 लीटर ईंधन चाहिए। टैंकर चालक स्वयं तेल निकालने के लिए अपने वाहन हमारे पास लाते हैं। मुझे नहीं पता कि वे अपने टैंकों में तेल की कमी को कैसे पूरा करते हैं।’ -हाईवे पर ईंधन बेचने वाले रैकेट के सदस्य आरिफ ने तहलका के गुप्त रिपोर्टर से कहा।
‘हाईवे के किनारे लटकी हुई जो 20 लीटर की पानी की बोतलें आपको दिखाई देती हैं, उनका इस्तेमाल पाइपों के जरिए ट्रकों और टैंकरों से डीजल निकालने के लिए किया जाता है। इसके बाद ईंधन को बड़े-बड़े कंटेनरों में भरकर खुले बाजार में बेच दिया जाता है।’ आरिफ ने आगे कहा।

‘ट्रक चालक खुद आकर अपने ट्रकों से हमें डीजल बेच रहे हैं। उनके आने का कोई निश्चित समय नहीं है, लेकिन वे हमें 75 रुपये प्रति लीटर की दर से डीजल बेचते हैं। हम एक ट्रक से 25-30 लीटर डीजल निकालते हैं।’ -आरिफ ने कहा।
‘आपको पुलिस की चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम हाईवे पर पास ही खड़े रहते हैं, जबकि टैंक में पाइप डालकर ट्रक से डीजल निकाला जाता है। हम स्थानीय पुलिस को पैसे दे रहे हैं, ताकि वे इस मामले को नजरअंदाज करें।’ -आरिफ ने रिपोर्टर से कहा।
‘यदि आप हमें अपने ट्रक से 1,000 लीटर डीजल उपलब्ध करा सकते हैं, तो हम आपको कमीशन के रूप में 5 रुपए प्रति लीटर देंगे। तो 1,000 लीटर डीजल पर आपका कमीशन 5,000 रुपए होगा।’ -आरिफ के साथी राम ने ट्रांसपोर्टर बनकर आए तहलका के रिपोर्टर से कहा।
‘आज होली है और हमने अब तक लगभग 500 लीटर डीजल एकत्र कर लिया है। कभी-कभी त्योहारों के दौरान ट्रक चालक अधिक डीजल बेचते हैं। हम इसे 80 रुपए प्रति लीटर की दर से लेते हैं।’ -अवैध ईंधन रैकेट में शामिल तौफीक ने तहलका के गुप्त पत्रकार से कहा।
‘यदि आप हमसे डीजल खरीदना चाहते हैं, तो आप खरीद सकते हैं। इसकी कीमत 80 रुपए प्रति लीटर होगी और यह शुद्ध होगा। ट्रकों से जो कुछ भी हम चुराएंगे, वो आपको बेच दिया जाएगा।’ -तौफीक ने कहा।
‘हम अब डीजल का भंडारण कर रहे हैं, न कि इसकी बिक्री कर रहे हैं। क्योंकि इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से तेल संकट उत्पन्न होने की आशंका है। अगर डीजल की कमी हो जाती है, तो हम उसे अधिक कीमतों पर बेचेंगे।’ -तौफीक ने आगे कहा।
‘मैं 3-4 महीने पहले ट्रकों से 82 रुपए प्रति लीटर की दर से चोरी का डीजल लेता था। लेकिन मैंने अब यह काम बंद कर दिया है, क्योंकि पुलिस आई और उसने राजमार्ग के दोनों किनारों पर इस व्यापार में शामिल और खुले बाजार में ईंधन बेचने वाली सभी दुकानों को ध्वस्त कर दिया।’ -ईंधन की चोरी में शामिल एक अन्य ऑपरेटर शाकिर ने कहा।
‘टैंकर चालक अवैध रूप से इन ऑपरेटरों को डीजल बेच रहे हैं, जो फिर इसे स्थानीय उपभोक्ताओं को बेचते हैं। पेट्रोल पंपों पर अधिक कीमत चुकाने वालों को यहां सस्ता पेट्रोल मिल रहा है।’ -इन गतिविधियों के प्रत्यक्षदर्शी और राजमार्ग पर चाय की दुकान के मालिक मुबारक ने यह बात कही।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के बीच ये राजमार्ग संचालक बड़े पैमाने पर डीजल का भंडारण कर रहे हैं, ताकि तेल संकट की स्थिति में वे इसे खुले बाजार में अधिक कीमतों पर बेचकर बड़ा मुनाफा कमा सकें। ये बेईमान ऑपरेटर हरियाणा के मेवात क्षेत्र में नूह जिले के पास दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सक्रिय हैं। अरावली पहाड़ियों के पास नूह को पार करते समय सड़क के दोनों ओर लगभग पांच किलोमीटर तक लगातार 20 लीटर पानी की बोतलों की कतारें लटकी हुई देखी जा सकती हैं।
इन स्थानों के पास पहुंचने पर पान-मसाला जैसी चीजों से लेकर छोटी चाय की दुकानें दिखाई देती हैं, लेकिन ये दुकानें केवल एक आवरण के रूप में काम करती हैं। उनके पीछे ट्रकों से तेल निकाला जाता है और इच्छुक खरीदारों को बेचा जाता है। पाइप इधर-उधर लटके रहते हैं और चोरी किए गए ईंधन को स्टोर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बड़े कंटेनर इन दुकानों पर रखे जाते हैं।
ईंधन की हेराफेरी का यह चौंकाने वाला रैकेट हरियाणा में सामने आया है, जहां संगठित गिरोह वर्षों से टैंकरों और ट्रकों से हजारों लीटर पेट्रोल और डीजल की हेराफेरी हर दिन कर रहे हैं- कथित तौर पर अधिकारियों की नजर में आए बिना या शायद उनकी मौन मिलीभगत से।
मौजूदा युद्ध परिदृश्य में आगे की जांच करने के लिए तहलका रिपोर्टर ने राजमार्गों के किनारे ईंधन के इस अवैध धंधे के संगठित नेटवर्क की पड़ताल की। राजस्थान से लौटते समय हमारे रिपोर्टर ने अपनी पहचान छिपाकर इन तेल माफियाओं से कहा कि हमारे पास कई ट्रक हैं और हम ईंधन परिवहन के व्यवसाय में हैं। रिपोर्टर ने इस रैकेट में शामिल लोगों के सामने डीजल और पेट्रोल बेचने का प्रस्ताव रखा।
तहलका के गुप्त रिपोर्टर ने सबसे पहले मेवात में आरिफ से संपर्क किया। आरिफ अपनी दुकान पर बैठा था। उसके चारों ओर तेल के पाइप लटक रहे थे और पास में बड़े-बड़े कंटेनर रखे हुए थे। रिपोर्टर ने उनसे राजमार्ग के किनारे लटकी हुई 20 लीटर की पानी की बोतलों के बारे में पूछा। आरिफ ने बताया कि वे उसकी हैं, जिन्हें उसने सड़क किनारे लटका रखा है, ताकि यह संकेत मिल सके कि वह उन ट्रकों से डीजल खरीद रहा है, जो डीजल बेचने को तैयार हैं।
उसने रिपोर्टर को यह भी बताया कि ट्रक ड्राइवर खुद आकर उसे डीजल बेचते हैं। उसने ट्रक और टैंकर चालकों की मिलीभगत से ट्रकों से ईंधन प्राप्त करने की बात स्वीकार की।
इस बातचीत में आरिफ ने राजमार्ग के किनारे लटकी बोतलों पर अपना स्वामित्व सहजता से स्वीकार किया है। इस बातचीत से ड्राइवरों और स्थानीय ऑपरेटरों के बीच एक नियमित और लगभग खुले धंधे का पता चलता है। इस गतिविधि का जिस सहजता से वर्णन किया गया है, वह सबसे अलग है, जिससे पता चलता है कि यह न तो छिपी हुई है और न ही असामान्य है।
रिपोर्टर : ये बोतल्स तो तुम्हारे लटक रहे हैं?
आरिफ : हां, पर अब ना है, ट्रक वाले ही देते हैं।

रिपोर्टर : अच्छा ट्रक वाले दे जाते हैं तुम्हें डीजल-पेट्रोल?
आरिफ : हां, ट्रक वाले दे भी देवे।
आरिफ ने रिपोर्टर को बताया कि राजमार्ग के किनारे लटकी हुई पानी की बोतलें उसकी हैं और इनका इस्तेमाल ईंधन ले जाने वाले ट्रकों के टैंक में पाइप डालकर डीजल निकालने के लिए किया जाता है। उसने कहा कि एकत्रित डीजल को बाद में बड़े कंटेनरों में भर दिया जाता है। आरिफ ने आगे कहा कि यह गतिविधि बिना किसी डर के जारी है, यहां तक कि दिन दहाड़े भी ट्रक आकर इस रैकेट में शामिल लोगों को ईंधन की आपूर्ति करते हैं।
रिपोर्टर : ये तो कैन्स छोटे पड़़ते होंगे तुम्हारे, जो सड़क पर लटका रखे हैं?
आरिफ : इनमें तो निकाले…।
रिपोर्टर : तो अपनी टंकी से निकालते होंगे, तो छोटे तो नहीं पड़ते?
आरिफ : वो कैन्स हैगी, कैन्स में डाल दें।
रिपोर्टर : अच्छा इसमें निकाल लेते हो… कभी भी दे जाए… दिन हो या रात हो?
आरिफ : हां।
फिर हमने आरिफ को एक प्रस्ताव दिया, जिसमें हमने कहा कि हम उसे अपने ट्रकों से ईंधन बेचना चाहते हैं। वह सहमत हो गया और उसने हमें बताया कि वह 75-80 रुपए प्रति लीटर की दर से डीजल खरीदता है। आरिफ ने आगे बताया कि वह नियमित रूप से प्रतिदिन एक ही ट्रक से लगभग 25-30 लीटर ईंधन प्राप्त करता है।
रिपोर्टर : अच्छा हमारे पास ट्रक हैं, अगर हम तेल देना चाहें तुम्हें?
आरिफ : ट्रक हैं, कोई दिक्कत न है, आप दे दियो…।
रिपोर्टर : डीजल-पेट्रोल ले लेते हो, क्या रेट लेते हो?
आरिफ : हम तो डीजल तो ऐसे लेते हैं – 76-80…।
रिपोर्टर : तो तुम्हें कब दे जाते हैं?
आरिफ : ट्रक वाले कभी भी दे जाएं।
रिपोर्टर : कितना?
आरिफ : 20, 30, 40 लीटर्स।
रिपोर्टर : रोज?
आरिफ : हां।
रिपोर्टर : 25-30 लीटर डेली आ जाता है तुम्हारे पास?
आरिफ : हां।
रिपोर्टर : एक ट्रक से?
आरिफ : हां।
रिपोर्टर : तो कितने ट्रक्स से ले लेते हो?
आरिफ : ये तो गाड़ी वाले पर है, जिस पर बच जाए, वो दे जाते हैं, कोई फिक्स न है, जिनपे डीजल हो, वो गेर जाते हैं।
रिपोर्टर : रात में, दिन में, कभी भी?
आरिफ : हां।
अब आरिफ ईंधन की बहुत अधिक मात्रा को संभालने की तत्परता प्रदर्शित करता है। आरिफ ने हमसे प्रतिदिन 1,000 लीटर डीजल की आपूर्ति करने को कहते हुए कहा कि इतना डीजल वह आसानी से खरीद सकता है। उसने कहा कि वह इसे 75 रुपए प्रति लीटर की दर से खरीदेगा, जो प्रतिदिन 75,000 रुपए बनता है और इसका भुगतान भी नकद करेगा।
रिपोर्टर : वो कितना ले जाते हैं रोज?
आरिफ : डीजल के ऊपर है, आप तो हमें दे दो, ….1000 लीटर्स।
रिपोर्टर : 1000 लीटर्स ले लोगे रोज?
आरिफ : हां।
रिपोर्टर : 1000 लीटर्स कितने का हो जाएगा?
आरिफ : 1 लीटर 80 का भी हुआ, 75-80 लेबें हम।
रिपोर्टर : 75 हजार रुपया डेली?
आरिफ : आप डीजल दोगे तो मैं पैसे दूंगा।
रिपोर्टर : मैं वही तो कह रहा हूं, 75000 रुपए डेली दोगे तुम हमें?
आरिफ : हां।
रिपोर्टर : ठीक है फिर।
फिर हमने आरिफ से सौदे की सच्चाई जानने के लिए उसे यूं ही बताया कि हमारे ट्रांसपोर्टर से हमारे ट्रक दिल्ली और जयपुर के बीच प्रतिदिन 10-15 चक्कर लगाते हैं और पूछा कि अगर हम उसे नियमित रूप से ईंधन की आपूर्ति करें, तो हमें क्या लाभ होगा? इस पर आरिफ ने कहा कि वह हमारा अच्छे से ख्याल रखेगा। उसने नियमित रूप से ईंधन की आपूर्ति होने पर हमें लाभ का आश्वासन दिया। उसने खुलासा किया कि वह उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसानों को डीजल की आपूर्ति करता है, उसके यहां किसानों को ईंधन कम दरों पर मिलता है। उसने आगे कहा कि कुछ ट्रक उससे प्राप्त ईंधन का उपयोग भी करते हैं। आरिफ से यह बातचीत दर्शाती है कि कैसे बड़ी खामोशी से विभिन्न क्षेत्रों में यह नेटवर्क फैला हुआ है।
रिपोर्टर : तेल दिलवा दिया करेंगे, हमारा क्या फायदा होगा उसमें?
आरिफ : वो तुम लेकर आओगे, तुम्हारा फायदा कर देंगे।
रिपोर्टर : कितना ले सकते हो… 100-200 लीटर? 10-15 गाड़ी डेली जाती है, जयपुर अप-डाउन करती हैं…।
आरिफ : कोई दिक्कत न है, हमारा तो देखो शामली में है, खेती-बाड़ी दे देवे हम जो हमारे राजस्थान वाले हैं ना, वहां तेल महंगा है, वो तेल ले जावे, 2-4 रुपए का उनको फायदा हो जाता है…।
रिपोर्टर : तुमसे राजस्थान वाले भी ले जाते हैं, खेती वाले किसान भी?
आरिफ : हां, कुछ गांव में ट्रक में भी डाल दें।
रिपोर्टर : वो ले जाते होंगे किसान तुमसे राजस्थान वाले?
आरिफ : हां।
अब रिपोर्टर ने आरिफ के साथ सौदे को लगभग अंतिम रूप दे दिया था। इस समझौते के तहत रिपोर्टर ने कहा कि हम तुम्हें प्रतिदिन 1,000 लीटर डीजल 75 रुपए प्रति लीटर की दर से उपलब्ध कराएंगे। आरिफ ने कहा कि आपका ट्रक राजमार्ग के किनारे खड़ा होगा, जहां से हम और हमारे सहयोगी पाइप के सहारे ट्रक से ईंधन निकाल लेंगे। उसने आगे कहा कि यह प्रक्रिया दिन के किसी भी समय की जा सकती है।
रिपोर्टर : डीजल क्या ऊपर से लोगे आप, हाईवे से, या नीचे आना पड़ेगा?
आरिफ हम तो हाईवे से निकालेंगे जहां आपकी गाड़ी खड़ी है ना, पाइप डालो तेल निकालो।
रिपोर्टर : ठीक है। दिन में, रात में, कभी भी निकालो, कोई दिक्कत तो नहीं है?
आरिफ : नहीं।
रिपोर्टर : कोई भसूड़ी तो नहीं है, पता चले कभी दिक्कत हो जाए?
आरिफ : नहीं नहीं, आप बात करा दो, कोई बात नहीं, आपकी कमीशन दे देंगे।
रिपोर्टर : तुम्हारा नंबर ले लिया है, मेरा चला गया होगा तुम्हारे पास।
इसके बाद आरिफ ने हमें आश्वासन दिया कि पुलिस से कोई परेशानी नहीं होगी। उसने कहा कि जब हमारे ट्रक से डीजल निकाला जा रहा होगा, तो वह खुद राजमार्ग पर पास ही मौजूद रहेगा और इस बात पर जोर दिया कि पुलिस इस पर आंखें मूंद लेगी, क्योंकि उन्हें ऐसा करने के लिए पैसे दिए जाते हैं।
रिपोर्टर : कोई टेंशन तो नहीं है, पुलिस वाले आ जाएं?
आरिफ : कोई दिक्कत न है…।
रिपोर्टर : पुलिस वाले आ गए, तो सेटिंग आप करोगे ना?
आरिफ : वो हमारी है ना, तेल निकालते वक्त खड़े हो जाएंगे हम, कुछ न बोलेंगे।
रिपोर्टर : पुलिस वाले भी तो ले ही रहे होंगे तुमसे?
आरिफ : हां।
जब हम आरिफ से बात कर रहे थे, तभी उसकी दुकान की बगल में शराब की दुकान चलाने वाला उनका साथी राम हमारे साथ बातचीत में शामिल हो गया और उसने एक सौदा पेश किया। राम ने 5 रुपए प्रति लीटर का कमीशन प्रस्तावित किया। उसने कहा कि अगर हम उन्हें एक दिन में 1,000 लीटर बेचते हैं, तो हमारा कमीशन 5,000 रुपए प्रति दिन होगा।
इस बातचीत में आरिफ और राम ईंधन की आपूर्ति के लिए कमीशन के बारे में खुलकर बात करते हैं। वे प्रति लीटर एक निश्चित लाभ देने को कहते हैं और यह आश्वासन देते हैं कि भुगतान सुचारू और सीधे किया जाएगा। वे यह भी संकेत देते हैं कि यह व्यवस्था किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, क्योंकि नेटवर्क में कोई भी व्यक्ति इसे संभाल सकता है। इस वीडियो में यह भी दिखाया गया है कि अलग-अलग आकार के डिब्बों और बोतलों का उपयोग करके ईंधन कैसे एकत्र किया जाता है।
आरिफ : जैसे आपकी गाड़ी तेल देगी हमें, 40 लीटर तेल देगी हमें, तो उसपे आपको हम 100-200…।
राम (हस्तक्षेप करते हुए) : 5 रुपए आपका कमीशन मिलाओ, जैसे 75-80 है, तो 5 रुपया आपका।

रिपोर्टर : जैसे?
राम : जैसे आपसे बात हो गई हमारी रुपए 75 की, आप 5 रुपए कमीशन रखो।
रिपोर्टर : 1 लीटर्स पर 5 रुपए कमीशन?
राम : आपको 5000 रुपए सीधे पड़ रहे हैं।
आरिफ : आपका 5 रुपए कमीशन है, चाहे 10 दे, 20 लीटर दे।
रिपोर्टर : जैसे आरिफ नहीं मिला तो आप मिलोगे।
राम : कोई भी मिले।
रिपोर्टर : कल हो जाएगा… कल?
राम : आप फोन करके बता देना हमारी गाड़ी है, आप निकाल लो, आपके 5 रुपए से पैसे पहुंच जाएंगे, बात खतम।
रिपोर्टर (पास में रखे डिब्बों की ओर इशारा करते हुए) : इसमें लेते होगे तुम?
आरिफ : इसमें भी ले लेते हैं, बोतल भी हैं, जैसे 25 लीटर्स की।
आरिफ ने हमें यह भी बताया कि वह टैंकर चालकों की मिलीभगत से तेल डिपो से पेट्रोल पंपों तक ईंधन ले जाने वाले तेल टैंकरों से ईंधन प्राप्त करता है। उनके अनुसार, रास्ते में टैंकर अक्सर ईंधन उतारने के लिए रुकते हैं, जिससे उसे एक ही बार में लगभग 200-300 लीटर ईंधन की आपूर्ति हो जाती है। उसने कहा कि ये ड्राइवर अपने टैंकों में होने वाली इस कमी को कैसे पूरा करते हैं, यह उसे नहीं पता। लेकिन उसे एक टैंकर से कम से कम 1500 लीटर ईंधन की आवश्यकता रहती है। आरिफ ने हमसे अनुरोध किया कि हम उसे ऐसे किसी भी टैंकर ऑपरेटर से संपर्क कराएं, जो ईंधन बेचने को तैयार हो।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष शुरू होने से पहले हमने आरिफ से पहली बार बात की थी। शत्रुता बढ़ने के बाद 4 मार्च 2026 को होली के दिन हम खाड़ी देशों से ईंधन की आपूर्ति बाधित होने के कारण ईंधन की कमी की आशंकाओं के बीच स्थिति का आकलन करने के लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के माध्यम से मेवात लौट आए। पहले की तरह हमारी कार अरावली पहाड़ियों के पास रुक गई, जहाँ कई ऑपरेटर 20 लीटर की बोतलें दुकानों के पास लटकाए हुए दिखाई दिए। हमने ऐसे ही एक ऑपरेटर तौफीक से मुलाकात की, जिसने हमें बताया कि वह आपूर्ति में व्यवधान और ऊंची कीमतों की आशंका के चलते डीजल बेचने के बजाय उसका भंडारण कर रहा है। तौफीक ने बताया कि उस दिन सुबह से ही उसने लगभग 500 लीटर तेल जुटा लिया है।
हमने तौफीक को एक प्रस्ताव भी दिया, जिसमें हमने कहा कि हम उसे डीजल बेचना चाहते हैं। उसने हमें बताया कि वह 80 रुपए प्रति लीटर की दर से तेल खरीद रहा है। उसने हमसे 1000 लीटर तक तेल खरीदने की तत्परता व्यक्त की।
इस बातचीत के दौरान तौफीक ने दिन भर में प्राप्त ईंधन की मात्रा साझा की और बताया कि त्योहारों के दौरान भी मात्रा में उतार-चढ़ाव हो सकता है। उसने कहा कि आपूर्ति रुक-रुक कर आने वाले ट्रकों पर निर्भर करती है। वह उस दर का भी उल्लेख करता है, जिस पर वह डीजल खरीदने को तैयार है। बातचीत का अंत इस बात से होता है कि वह बिना किसी झिझक के बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के लिए तैयार है।
रिपोर्टर : तुम यहां हाईवे पर कितने दे देते हो, कितने ट्रक से तेल ले लेते हो रोज?
तौफीक : अब आज करीबन आ गया होगा 500 लीटर्स तेल।
रिपोर्टर : आज 500 लीटर आ गया?
तौफीक : ज्यादा आ गया होगा।
रिपोर्टर : तुम तो कह रहे थे त्योहार है, होली है कहां से आएगा?
तौफीक : कोई कोई गाड़ी आ जाती है, कुछ त्योहार के मारे ज्यादा बेचते हैं, अब कल नहीं… परसों आएगा।
रिपोर्टर : कैसे लोगे कैसे हमसे?
तौफीक : 80 रुपए (पर) लीटर लेंगे।
रिपोर्टर : ज्यादा लो यार।
तौफीक : ज्यादा, बोतल से लेंगे तो 80 रुपए लीटर लेंगे।
रिपोर्टर : 1 बोतल 20 लीटर की है तुम्हारी?
रिपोर्टर (आगे) : 1000 लीटर दे दें तुम्हें रोज?
तौफीक : 1000 क्या, कितना भी दे दो…।
तौफीक ने हमें भी 80 रुपए प्रति लीटर की दर से डीजल बेचने पर भी सहमति जताई। निम्न बातचीत में तौफीक डीजल की खरीद और बिक्री दरों पर चर्चा करता है, जिससे विभिन्न पहलुओं के साथ-साथ मूल्य निर्धारण में स्पष्टता आती है। तौफीक ने कहा है कि किस प्रकार बर्तनों का उपयोग किया जाता है, जिससे उनका आभासी आयतन बढ़ जाता है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि भुगतान केवल नकद में ही होगा, क्रेडिट का चक्कर नहीं रहेगा। यह आदान-प्रदान मूल्य निर्धारण रणनीतियों और प्रबंधन विधियों के मिश्रण को दर्शाता है।
रिपोर्टर : और जैसे हमें आपसे खरीदना हो डीजल, क्या रेट दोगे हमें?
तौफीक : आपको लगेगा 80 रुपए (पर) लीटर के हिसाब से।
रिपोर्टर : मतलब लोगे भी 80 का, और दोगे बी 80 का?
तौफीक : हम यहां गांव में फिलहाल 73 रुपए लीटर देते हैं, 85 रुपए लीटर लेते हैं…।
रिपोर्टर : तुम्हारा क्या फायदा हो रहा है इसमें, ज्यादा में ले रहे हो, कम में बेच रहे हो?
तौफीक : ये केन्स है 20 लीटर्स की, इसमें आ रहा है 40 लीटर्स है।
रिपोर्टर : ऐसा क्यों?
तौफीक : ऐसा ही होता है, एक कैन 20 की है, उसमें 25 आ रहा है।
रिपोर्टर : पैसे साथ के साथ, उधार नहीं होगा?
तौफीक : हम्म, उधार नहीं होगा।
रिपोर्टर : हमें दोगे कितना?
तौफीक : 80 रुपए पर लीटर।
रिपोर्टर : डीजल प्योर होगा?
तौफीक : जो गाड़ी से निकलेगा, वो होगा।
निम्नलिखित बातचीत में तौफीक ने बताया कि जब ट्रकों के पास ईंधन होता है, तो वे अपने आप कैसे रुक जाते हैं। उसने कहा कि डीजल निकालने में लगने वाला समय उपलब्ध मात्रा पर निर्भर करता है। तौफीक ने हमें यह भी आश्वासन दिया कि हम उसे बिना किसी डर के अपना तेल बेच सकते हैं।
रिपोर्टर (दुकान की ओर एक ट्रक को आते देख) : ये आ गया तुम्हें देने के लिए?
तौफीक : ना, अपने आपसे रुकता है कोई होता है तो, इसको डीजल देना होता तो रुक जाता।
रिपोर्टर : कितनी देर में निकाल लेते हो पाइप डालकर आप?
तौफीक : डीजल के हिसाब से होता है।
रिपोर्टर : कोई दिक्कत तो नहीं होगी?
तौफीक : न।
इस बातचीत में रिपोर्टर ने गतिविधि के दौरान संभावित पुलिस कार्रवाई के बारे में चिंता व्यक्त की। तौफीक इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहता है कि कोई समस्या नहीं होगी। उसका सुझाव है कि पुलिस को नियमित जांच पर ध्यान देना चाहिए न कि इस तरह के लेनदेन पर। वह जिम्मेदारी भी लेता है और यह सुनिश्चित करता है कि सब कुछ व्यवस्थित रूप से संभाला जाएगा।
रिपोर्टर : कोई दिक्कत तो नहीं होगी?
तौफीक : न।
रिपोर्टर : पुलिस की?
तौफीक : न, वो तो चालान देखते हैं।
रिपोर्टर : पुलिस वाले कहीं हमें पकड़ लें, तुम्हें पकड़ लें? कोई दिक्कत तो नहीं होगी?
तौफीक : न।
रिपोर्टर : तुम्हारी जिम्मेदारी है।
तौफीक : हां, बिलकुल।
मेवात के नूंह में उसी हाईवे पर तहलका रिपोर्टर की मुलाकात एक अन्य ऑपरेटर शाकिर से हुई। हमने उसकी चाय की दुकान पर तेल निकालने वाली पाइप्स और 20 लीटर की पानी की बोतलें लटकी हुई देखीं, लेकिन उसने कहा कि उसने 3-4 महीने पहले ट्रकों से ईंधन लेना बंद कर दिया था। जब हमने उनसे इसका कारण पूछा, तो शाकिर ने बताया कि पुलिस ने राजमार्ग के किनारे ऐसी दुकानों को नष्ट कर दिया था, जो इस गतिविधि में शामिल थीं। इस चर्चा में पहले की दरों और राजमार्ग पर यह प्रथा किस प्रकार प्रचलित है, इस पर भी बात की गई है।
रिपोर्टर : बोतल तो टांग रखी हैं तुमने, पाइप भी टंगे हैं?
शेखर : लेते नहीं हैं जी।

रिपोर्टर : बंद कर दिया? क्यूं?
शेखर : नहीं लेते, बस।
रिपोर्टर : लफड़ा हो गया कोई?
शेखर : लफड़ा कोई नहीं है।
रिपोर्टर : पहले डीजल ले रहे थे आप?
शेखर : हां पहले ले रहे थे, 3-4 महीने पहले।
रिपोर्टर : क्या रेट?
शेखर : 82
रिपोर्टर : पुलिस वालों ने बंद करा दी तुम्हारी…?
शेखर : सब बंद करा दीं, तोड़ दीं।
रिपोर्टर : इस हाईवे की सारी बंद?
शेखर : पहले बोतल टंगी रहती थी, चोरी की वजह से तुड़वाए हैं।
रिपोर्टर : पुलिस वालों ने क्यों बंद करा दी?
शेखर : ट्रक वाले बदतमीजी करें, लफड़ा, चोरी, फोन छीनो। धंधे के नाम पर गुंडागर्दी उठा रखी है….।
उसी राजमार्ग पर रिपोर्टर की मुलाकात मुबारक नाम के एक चाय विक्रेता से हुई, जिसने बताया कि उसने इस तरह की गतिविधियों को देखा है। मेवात में राजमार्ग के किनारे लटकी हुई 20 लीटर की पानी की बोतलों के बारे में पूछे जाने पर उसने बताया कि उनका इस्तेमाल ट्रकों से ईंधन निकालने के लिए किया जाता था। इसके बाद यह ईंधन खुले बाजार में लाभ के लिए बेचा जाता है। मुबारक ने आगे कहा कि ट्रक चालक स्वयं इन ऑपरेटरों को ईंधन की आपूर्ति करते हैं।
रिपोर्टर : ये मैंने हाईवे पर देखे हैं बहुत सारे बोतल्स टंगे रहते हैं?
मुबारक : डीजल लेते होंगे वो।

रिपोर्टर : किससे?
मुबारक : ट्रक वालों से।
रिपोर्टर : उसका क्या करते हैं… डीजल का?
मुबारक : बेच देते हैं, 10 रुपए फालतू महंगा बेच देते हैं। 10-20 रुपए कमा लेते हैं।
रिपोर्टर : दे जाते हैं ट्रक वाले ऐसे?
मुबारक : हां।
रिपोर्टर : मैंने बहुत देखे हैं दोनों साइड टंगे हुए।
मुबारक : हमारे यहां नहीं रखते जी, वो पल्ली साइड में रखते हैं।
रिपोर्टर : मेवात में?
मुबारक : हां।
रिपोर्टर : ट्रक खड़े हुए थे उधर।
मुबारक : वो करवा लेते हैं, जैसे डीजल बचा हुआ है किसी गाड़ी में।
रिपोर्टर : या ट्रक वालों को जरूरत पड़ गई पैसों की?
मुबारक : हां।
जब मुबारक से पूछा गया कि क्या पुलिस ऐसे ऑपरेटरों के खिलाफ कार्रवाई करती है? तो उसने कहा कि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। मुबारक ने बताया कि राजमार्ग के किनारे खुलेआम ईंधन बेचा जाता है। न तो विक्रेताओं को और न ही खरीदारों को पकड़े जाने का डर लगता है। वह इस बात की पुष्टि करता है कि ट्रक चालक और स्थानीय ऑपरेटर खुलेआम ये लेन-देन करते हैं।
रिपोर्टर : ये पकड़े नहीं जाते? पुलिस वाले पकड़ लें डीजल बेचते हुए?
मुबारक : कोई नहीं पकड़ रहा।
रिपोर्टर : क्यूं? खुलेआम बेच रहे हैं वो?
मुबारक : हां।
रिपोर्टर : ट्रक वाले भी खुलेआम, और वो भी खुलेआम खरीद रहे हैं?
मुबारक : हां।
जब मुबारक से पूछा गया कि लोग पेट्रोल पंपों के बजाय इन ऑपरेटरों से पेट्रोल और डीजल क्यों खरीदते हैं? तो उसने कहा कि उन्हें पंपों की तुलना में यहां से कम कीमत पर ईंधन मिलता है। इस चर्चा में इस स्थानीय मांग के पीछे के कारणों पर प्रकाश डाला गया है।
रिपोर्टर : ये गांव वाले जो इनसे डीजल खरीदते हैं, ये पेट्रोल पंप्स से नहीं ला सकते?
मुबारक : वहां मंदा नहीं मिलता इनको।
रिपोर्टर : महंगा मिलता है?
मुबारक : महंगा मिलता है।
रिपोर्टर : ये सस्ता दे रहे होंगे?
भारत में साधारण दुकानों, गुमटियों या जनरल स्टोर्स से पेट्रोल और डीजल नहीं बेचा जा सकता है। वैध लाइसेंस के बिना ईंधन बेचना, भंडारण करना या आयात-निर्यात करना अवैध है। इसके लिए न्यूनतम 250 करोड़ रुपए की कुल संपत्ति आवश्यक है। सुरक्षा संबंधी गंभीर जोखिमों के कारण ईंधन को खुले रूप में (बोतलों या डिब्बों में) बेचना भी प्रतिबंधित है। हालांकि तहलका की पड़ताल में मेवात राजमार्ग पर कई ऐसे ऑपरेटरों का पर्दाफाश हुआ, जो ट्रक और टैंकर चालकों की मिलीभगत से डिपो से पेट्रोल पंपों तक जाने वाले ट्रकों और टैंकरों से ईंधन की चोरी करते हैं, उसे जमा करते हैं और बाद में मुनाफा कमाने के लिए उसे कम दरों पर बेचते हैं। एक ऑपरेटर ने अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से उत्पन्न होने वाले संभावित संकट का फायदा उठाने के लिए डीजल की जमाखोरी करने की बात भी स्वीकार की।
सूत्रों के अनुसार, राजमार्ग स्तर पर यह गतिविधि वर्षों से जारी है, जिस पर अधिकारी कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं करते। खबरों के मुताबिक, संगठित गिरोहों द्वारा हजारों लीटर डीजल और पेट्रोल की हेराफेरी की गई है, जिससे हजारों करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। ये समूह 15-20 मिनट के भीतर ईंधन निकाल लेते हैं, अक्सर दिन-दहाड़े व्यस्त राजमार्गों पर। इन अभियानों की व्यापकता और सरलता से प्रवर्तन संबंधी कमियों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। यदि इस अवैध गतिविधि पर रोक नहीं लगाई गई, तो इनसे एक समानांतर, अनियमित ईंधन बाजार के पनपने का खतरा है।




