‘तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर को छोड़कर, पार्टी का कोई भी व्यक्ति हमसे मिलने नहीं आया, जब गुरुग्राम पुलिस ने कथित अवैध बांग्लादेशियों को निशाना बनाने के लिए सत्यापन अभियान चलाया और पश्चिम बंगाल से कई बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को हिरासत में ले लिया। जब हम संकट में थे, तब सीपीआई (एम) की नेता मीनाक्षी मुखर्जी ने हमसे मिलने के लिए कुछ लोगों को भेजा था। लेकिन टीएमसी का कोई भी नेता हमसे मिलने नहीं आया, जबकि हम टीएमसी के पक्के मतदाता हैं।’ -गुरुग्राम में काम करने वाले पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर बबलू सरकार ने तहलका रिपोर्टर से कहा।
‘गुरुग्राम के डिटेंशन सेंटर्स में पश्चिम बंगाल के लगभग 400 बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को रखा गया। उन्हें शहर के अलग-अलग इलाकों से उठाया गया था। कुछ लोगों को दो दिनों के लिए हिरासत में लिया गया, जबकि अन्य को तीन या चार दिनों के लिए। पुलिस सत्यापन के बाद यह साबित होने पर कि वे गुरुग्राम में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक नहीं हैं, उन्हें रिहा कर दिया गया।’ -बबलू सरकार ने आगे कहा।
‘अनौपचारिक आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से आए लगभग 30 लाख बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिक हरियाणा में रहते हैं, जिनमें से अधिकतर गुरुग्राम में रहते हैं। इनमें से लगभग 23 लाख मुस्लिम हैं और बाकी हिंदू हैं। 30 लाख मतदाताओं में से लगभग 10 लाख बंगाल के मतदाताओं के पास हरियाणा और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में एक से अधिक मतदाता कार्ड हैं।’ -कई वर्षों से गुरुग्राम में रहने वाले पश्चिम बंगाल के कांग्रेस कार्यकर्ता खादिमुल इस्लाम ने कहा।
‘इस 30 लाख की आबादी में से लगभग 25 लाख लोग 2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान ममता बनर्जी के पक्ष में मतदान करने के लिए पश्चिम बंगाल जाएंगे। कुछ लोग ट्रेन से यात्रा करेंगे, जबकि अन्य लोग ट्रैवल एजेंटों द्वारा व्यवस्थित बसों से जाएंगे। उस दौरान गुरुग्राम में सन्नाटा पसरा रहेगा। पिछले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में हरियाणा से लगभग 20 लाख लोग टीएमसी को वोट देने के लिए पश्चिम बंगाल गए थे। इस बार एसआईआर के प्रचार के कारण अधिक लोग टीएमसी को वोट देंगे और भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकेंगे। मैं अपने साथ लगभग 3,000-4,000 मतदाताओं को ले जाऊंगा। हालांकि मैं कांग्रेस से हूं, लेकिन विधानसभा चुनावों में मैं टीएमसी को वोट देता हूं।’ -इस्लाम ने तहलका रिपोर्टर से कहा।
‘मैं पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर से हूँ। पिछले विधानसभा चुनावों में हमारे स्थानीय विधायक ने गुरुग्राम में रहने वाले मतदाताओं के यात्रा खर्च का भुगतान किया, ताकि वे ट्रेन या बस से पश्चिम बंगाल में मतदान करने जा सकें। इस बार भी गुरुग्राम में रहने वाले बड़ी संख्या में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिक टीएमसी को वोट देने और भाजपा को करारी हार सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल जाएंगे।’ -गुरुग्राम में रहने वाले पश्चिम बंगाल के एक अन्य प्रवासी मजदूर रमजान अली ने तहलका रिपोर्टर से कहा।
‘मैं दक्षिण दिनाजपुर से हूँ। मैंने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के लिए अपने सभी दस्तावेज अपने माता-पिता और भाई को भेज दिए हैं। मुझे नहीं लगता कि पश्चिम बंगाल के मुसलमान एसआईआर से डरते हैं। विपक्षी दलों का यह दुष्प्रचार है कि एसआईआर के बाद मुसलमान अपने वोट खो देंगे। जमीनी स्तर पर देखा जाए, तो बांग्लादेश के ज्यादातर हिंदू ही अपने मतदान के अधिकार खो रहे हैं। एसआईआर के बाद कई लोग अपना वोट खो देंगे। बांग्लादेश से मेरे क्षेत्र में आने वाले लोगों में से लगभग 80 प्रतिशत हिंदू हैं, जबकि केवल 20 प्रतिशत मुस्लिम हैं।’ -गुरुग्राम में काम करने वाले पश्चिम बंगाल के एक अन्य प्रवासी मजदूर फारूक अब्दुल्ला ने तहलका रिपोर्टर से कहा।
पश्चिम बंगाल अक्सर किसी-न-किसी कारण से खबरों में बना रहता है। केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर विकसित भारत रोजगार गारंटी और आजीविका मिशन-ग्रामीण विधेयक (वीबी जी राम जी विधेयक) करने के कदम पर मौजूदा विवाद से पहले भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका कड़ा विरोध किया था और बदले में राज्य की प्रमुख 100 दिवसीय रोजगार योजना का नाम महात्मा गांधी के सम्मान में महात्मा श्री कर दिया। राज्य सरकार का केंद्र सरकार के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों के कथित उत्पीड़न को लेकर टकराव चल ही रहा है। अब ताजा खबरों के मुताबिक, बांग्ला भाषी श्रमिकों को अवैध बांग्लादेशी होने के संदेह में सुरक्षा बलों द्वारा निशाना बनाया गया, गुरुग्राम के डिटेंशन सेंटर्स में हिरासत में लिया गया और बाद में हाल ही में उन्हें संपन्न विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। इन सभी घटनाक्रमों की वजह से पश्चिम बंगाल लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।
तहलका रिपोर्टर ने गुरुग्राम (हरियाणा) में जमीनी स्तर पर एक सर्वेक्षण किया, जहां पश्चिम बंगाल से आए प्रवासी श्रमिकों की एक बड़ी आबादी रहती है, जो मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र में घरेलू सहायक, सफाईकर्मी, निर्माण मजदूर, ऑटो-रिक्शा चालक और कार धोने वालों के रूप में कार्य करते हैं। हालांकि 2025 से बांग्लादेश से आए अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने के लिए पुलिस द्वारा चलाए गए सत्यापन अभियानों से उत्पन्न भय के कारण कई लोग अस्थायी रूप से शहर छोड़कर चले गए थे, लेकिन बाद में धीरे-धीरे वापस लौट आए। इनमें से अधिकांश लोग गुरुग्राम के सेक्टर 10, बंगाली मार्केट, खटोला गांव और चकरपुर जैसे क्षेत्रों में अनौपचारिक बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं। तहलका रिपोर्टर ने एसआईआर, नजरबंदी केंद्रों और आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों पर बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों के विचारों को समझने के लिए चकरपुर का दौरा किया।

तहलका रिपोर्टर की पहली मुलाकात बबलू सरकार से हुई, जो एक ऑटो-रिक्शा चालक और पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर से आया एक बांग्ला भाषी प्रवासी मजदूर है, जो कई वर्षों से गुरुग्राम में रह रहा है। यह बातचीत उस समय हुई जब पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरावलोकन (एसआईआर) अभ्यास चल रहा था। बबलू ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि बंगाल में मुसलमान एसआईआर से नहीं डरते, क्योंकि उनके पास आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से आए अवैध अप्रवासी मौजूद तो हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर हिंदू हैं, और मुसलमानों की संख्या कम है।
रिपोर्टर : अच्छा, मुसलमानों में (एसआईआर के बारे में) एक डर है कि मोदी गवर्नमेंट साजिश कर रही है हमारे खिलाफ, …हमारा नाम काट देगी। इसके बारे में क्या कहना है?
बबलू : इसके बारे में मुझे ये कहना है, मेरा पर्सनल जो विचारधारा है, इसमें मुझे कोई ब्लीव नहीं है। मैं इंडिया कांस्टीट्यूशन को बहुत ब्लीव करता हूं, और मुझे ये पता है अगर हम सही हैं, तो गवर्नमेंट कुछ नहीं कर सकती है।
रिपोर्टर : मतलब, मुसलमानों में डर नहीं है?
बबलू : ये मैं अपना पर्सनल विचारधारा से बोल रहा हूं, लोग अगर सोच रहे हैं, तो वो मेरे हिसाब से गलत सोच रहे हैं, अगर ऐसा होता, तो ह्यूमन राइट्स किसलिए बनाया गया, मानव अधिकार भी तो है। कोई अगर गलत करेगा, तो मानव अधिकार है।
रिपोर्टर : ये जो कागज मांगे गए हैं एसआईआर के, आपको लगता है बंगाल के मुसलमानों के पास होंगे?
बबलू : मैक्सिमम है, क्यूंकि बंगाल के मुसलमान हैं। ये नैरेटिव जो तैयार कर रहे हैं राजनीति के लोग कि बंगाल में रोहिंग्या मुसलमान हैं, ये भी गलत है। मैं आपको एक उदाहरण और दे रहा हूं, बांग्लादेश एक मुस्लिम कंट्री है, अगर बांग्लादेश में कुछ प्रॉब्लम होगा, जैसे हम लोग यहां भी देखते हैं न्यूज में कि वहां पर हिंदू पर अत्याचार हो रहा है, अगर वहां कोई प्रॉब्लम होगा, तो हिंदू पर होगा, क्यूंकि वो मुस्लिम कंट्री है, तो यहां मुस्लिम क्यूं आएगा?
बबलू (आगे) : भारत हिंदू बहुसंख्यक देश है, हालांकि डाक्यूमेंट्स में ऐसा नहीं है, डेमोक्रेसी है यहां पर। इसलिए मैं बता रहा हूं, बांग्लादेश से कोई आएगा, तो हिंदू पॉपुलेशन से आएगा, मैं ये नहीं बोल रहा कि वहां पर (वेस्ट बंगाल में) बांग्लादेशी नहीं हैं, हैं; पर वो ज्यादातर हिंदू पॉपुलेशन से है, मुस्लिम से नहीं।
रिपोर्टर : आपका मानना है, बंगाल में घुसपैठिए हैं?
बबलू : बिलकुल, मगर वो हिंदू पॉपुलेशन ज्यादा है, मैं ये भी नहीं बोल रहा, मुस्लिम पॉपुलेशन नहीं है, है; इक्का-दुक्का है।
इसके बाद बबलू ने गुरुग्राम पुलिस द्वारा अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ चलाए गए मतदाता सत्यापन अभियान के बारे में बात की, जिसके दौरान पश्चिम बंगाल के कई बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को हिरासत में लिया गया और डिटेंशन सेंटर्स में रखा गया। उनके अनुसार, गुरुग्राम के विभिन्न हिस्सों से आए लगभग 400 प्रवासी श्रमिकों को कई दिनों तक हिरासत में रखा गया था और सत्यापन के बाद यह साबित होने पर कि वे अवैध बांग्लादेशी नागरिक नहीं हैं; उन्हें रिहा कर दिया गया।
बबलू : मुझे पर्सनली नहीं हुई थी, मगर मेरे यहां से एक बंदा को उठा ले गया था।
रिपोर्टर : क्या नाम था उनका?
बबलू : शफीउद्दीन।
रिपोर्टर : शफीउद्दीन, …अच्छा ऑटो चलाते थे? बंगाल से थे? क्या हुआ था?
बबलू : हां, उनको ले गया था पुलिस कमरे पर आया था, पास में ही रहते हैं। छोटा-छोटा कमरा बना हुआ है, स्लम एरिया है। पुलिस आया, ये उनका स्टेटमेंट था, उनको बुलाया, नाम पूछा, आधार कार्ड दिखाओ, लेकर बोला गाड़ी में बैठो, उसने बोला- क्या हो गया सर। बोले 5 मिनट आपको थाने में ले जाएंगे, फिर छोड़ देंगे। ऐसा बोलकर वहां से 15-16 लोगों को ले गया था उठाकर।
रिपोर्टर : क्या करते थे वो?
बबलू : ऑटो चलाते थे।
रिपोर्टर : कब से हैं वो यहां पर?
बबलू : वो भी है 18-20 साल से, परिवार भी है, उनको ले गये थे। फिर हम लोग गए वहां पे, वो ले जाकर उन लोग को डिटेन किया गया था, दो दिन रखा था वहां पर।
रिपोर्टर : सभी लोगों को?
बबलू : वहां लगभग 175 लोग थे।
रिपोर्टर : डिटेंशन सेंटर में?
बबलू : हां।
रिपोर्टर : डिटेंशन सेंटर में सब एक ही गांव के थे?
बबलू : नहीं नहीं, 3-4 गांव के थे। आस-पास के गांव के, …चकरपुर गांव, वार्ड नंबर 23।
रिपोर्टर : अच्छा।
बबलू : चकरपुर गांव से, नाथपुर गांव से, हरिजन कॉलोनी से है, और कुछ लोग बादशाहपुर में डिटेन किया गया था, वो बंगाली मार्केट है सोना रोड पर, उधर से भी ले गया था।
रिपोर्टर : आपका जो डिटेंशन सेंटर है, उसमें कितने लोग थे?
बबलू : कम से कम 150 से ज्यादा।
रिपोर्टर : अलग-अलग मिला लें, तो ज्यादा होंगे?
रिपोर्टर : मोटा-मोटी हमें आइडिया मिला था, करीब 400 लोग का आइडिया मिला था।
रिपोर्टर : कितने डिटेंशन सेंटर थे?
बबलू : हमारे यहां दो था, एक यहां था, एक 19 सेक्टर।
रिपोर्टर : अच्छा, टोटल 400-500 लोग, कितने दिन रखा गया?
बबलू : किसी को तीन दिन, किसी को चार दिन, दो दिन, …मतलब ये लोग गांव में इनका वेरिफिकेशन कर रहे थे। इनका आईडी लेकर इनका वेरिफिकेशन कर रहे थे।
रिपोर्टर : बंगाल में?
बबलू : हां।
बबलू के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर को छोड़कर पार्टी का कोई भी नेता उनसे मिलने नहीं आया, जब गुरुग्राम पुलिस ने अवैध बांग्लादेशियों को पकड़ने के लिए सत्यापन अभियान चलाया और पश्चिम बंगाल से कई बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को हिरासत में ले लिया। बबलू ने कहा कि सीपीआई (एम) की नेता मीनाक्षी मुखर्जी ने संकट के दौरान उनसे मिलने के लिए कुछ लोगों को भेजा था, हालांकि टीएमसी के कट्टर मतदाता होने के बावजूद कोई अन्य टीएमसी नेता उनसे मिलने नहीं आया। बबलू ने यह भी दावा किया कि हरियाणा में लगभग 30 लाख बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिक हैं और उनमें से अधिकांश टीएमसी को वोट देते हैं, फिर भी संकट के दौरान किसी भी पार्टी नेता ने उनसे संपर्क नहीं किया।
बबलू : सबसे पहले यहां पर हमारी मीनाक्षी मुखर्जी हैं लेफ्ट से, उनसे हमारे दोस्त ने बात किया था।
रिपोर्टर : टीएमसी से कोई आया था?
बबलू : नहीं, टीएमसी से कोई दूर से आया था, कोई राज्यसभा का मेंबर आया था, ममता कुछ नाम है, यहां नहीं आया था, दूसरी जगह आई थी। सीपीएम से मीनाक्षी मुखर्जी नहीं आई थी, उन्होंने भेजा था एक।
रिपोर्टर : गुड़गांव में कितना बंगाली होगा?
बबलू : कम से कम 30 लाख होगा, एट प्रेजेंट 30 लाख वोटर हैं।
रिपोर्टर : पूरे गुड़गांव में 30 लाख वोटर हैं?
बबलू : बंगाल का वोटर यहां पर कमाने के लिए आ रखा है, कम से कम 30 लाख वोटर्स।
रिपोर्टर : सिर्फ गुड़गांव या पूरा हरियाणा?
बबलू : पूरा हरियाणा में 30 लाख, उसमें 99 पीसी (परसेंट) जो है, वो ममता का ही वोटर है। मैं आपको बता रहा था पहले भी। मुझे इसलिए रूलिंग पार्टी से शिकायत है कि आपके इतने वोटर होते हुए भी आपके कम्युनिटी पर इतना अत्याचार हुआ है, और आपने एक भी बार आकर जाएजा नहीं लिया….!
रिपोर्टर : ये 30 लाख जो वोटर हैं, यो जाते हैं टीएमसी को वोट देने?
बबलू : 90 परसेंट जाते हैं।
बबलू ने यह भी स्वीकार किया कि उनके पास दो वोट हैं- एक गुड़गांव में और दूसरा उनके गृह राज्य पश्चिम बंगाल में। लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने पश्चिम बंगाल में कभी मतदान नहीं किया और हमेशा गुड़गांव में ही मतदान करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना वोटर आईडी और आधार कार्ड पश्चिम बंगाल में अपने पिता को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए भेजा है। बबलू के अनुसार, अगर एसआईआर के बाद भी उनके दोनों वोटर आईडी बरकरार रहते हैं, तो उन्हें कोई समस्या नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से उनका नाम हटा भी दिया जाता है, तो भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।
रिपोर्टर : तो आपने क्या-क्या भेजा अपने वालिद साहब को?
बबलू : आज तो मैंने भेजा हूं आधार कार्ड, वोटर कार्ड।
रिपोर्टर : वोटर कार्ड गुड़गांव का?
बबलू : नहीं, मैंने वहां का भेजा, …बंगाल का।
रिपोर्टर : बंगाल का वोटर कार्ड चल रहा है आपका?
बबलू : हां, मैंने वोट डाला नहीं है, मगर मेरा वहां बन गया था बहुत पहले। ये मेरा आपका इंसाइड। इसको आप हाइलाइट न कीजिए, वहां मैंने अभी वोट डाला नहीं, मैं यहां वोट डालता हूं…।
रिपोर्टर : अच्छा, गुड़गांव में?
बबलू : हां, वहां का जब मुझे मांगना है, तो मैं वहीं भेजूंगा।
रिपोर्टर : अच्छा, तो उस वोट को अब आप कटवाओगे या रखोगे?
बबलू : अब मैं कटवाऊंगा या रखूंगा, मैं नहीं जानता हूं। मेरे से मांगा, मैंने भेजा। सर्वे के बाद पता चलेगा, अगर वो लोग कुछ न बोले, तो जैसा है वैसा रहेगा, काटना होगा, तो कट जाएगा।
रिपोर्टर : अच्छा, नहीं बोलेगा, तो दोनों दोनों जगह चलता रहेगा?
बबलू : मैं तो वोट डालता नहीं हूं वहां पर, डालता हूं यहां पे।

बबलू के बाद तहलका की मुलाकात खादिमुल इस्लाम से हुई, जो पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर के एक अन्य बांग्ला भाषी कांग्रेस कार्यकर्ता हैं और कई वर्षों से गुरुग्राम में रह रहे हैं। उन्होंने तहलका रिपोर्टर को बताया कि अनौपचारिक अनुमानों के अनुसार, हरियाणा में पश्चिम बंगाल से आए लगभग 30 लाख बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिक हैं। इनमें से लगभग सात लाख हिंदू हैं। उन्होंने बताया कि 30 लाख मतदाताओं में से कम से कम 10,000 लोगों के पास दो मतदाता कार्ड हो सकते हैं, एक गुड़गांव में और दूसरा पश्चिम बंगाल में।
रिपोर्टर : यहां दो वोटर्स वाले कितने लोग होंगे?
इस्लाम : 30 लाख में 10 हजार आदमी का होगा।
रिपोर्टर : डबल वोट्स, बंगाल में भी यहां भी?
इस्लाम : हां।
रिपोर्टर : वो तो कटवाएंगे अपना या नहीं?
इस्लाम : कटवाएंगे बिलकुल।
रिपोर्टर : अच्छा, 30 लाख में से कितने हिंदू होंगे यहां पे?
इस्लाम : लगा लो 7 लाख हिंदू होंगे।
रिपोर्टर : मुस्लिम ज्यादा हैं, 30 लाख की गिनती सही है या… ये ऑफिसियल है क्या?
इस्लाम : ये ऑफिसियल नहीं है, अनऑफिसियल है, …एक आइडिया है।
इस्लाम (आगे) : अगर आप शाम को हता ना, तो हजार आदमी शाम को यहीं होता।
रिपोर्टर : ऐसा क्यों?
इस्लाम : दिन भर काम करता, शाम को यहां चाय पीने आता।
इसके बाद इस्लाम ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बारे में बात की। उनके अनुसार, हरियाणा में अनुमानित 30 लाख बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों में से लगभग 25 लाख लोग 2026 में ममता बनर्जी के पक्ष में मतदान करने के लिए पश्चिम बंगाल की यात्रा करेंगे। कुछ लोग ट्रेन से जाएंगे, जबकि अन्य ट्रैवल एजेंटों द्वारा व्यवस्थित बसों से यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा कि उस दौरान गुरुग्राम सुनसान दिखेगा। इस्लाम ने याद दिलाया कि पिछले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान गुरुग्राम से लगभग 20 लाख लोगों ने टीएमसी को वोट दिया था। उन्होंने दावा किया कि इस बार एसआईआर की कहानी और भी अधिक लोगों को पार्टी के लिए वोट देने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने आगे कहा कि वह अपने साथ लगभग 3,000-4,000 मतदाताओं को ले जाएंगे। हालांकि वह कांग्रेस से संबंधित हैं, लेकिन इस्लाम ने कहा कि वह विधानसभा चुनावों में टीएमसी को वोट देते हैं।
इस्लाम : आंख बंद करके हमारे नॉर्थ बंगाल से लेकर साउथ बंगाल तक जितना वोटर है, सब जाएगा और बीजेपी को वहां से ऐसा भगाएंगे, ऐसा भगाएंगे कि बीजेपी जैसा सोचे भी न।
रिपोर्टर : मतलब, इस बार गुड़गांव खाली हो जाएगा?
इस्लाम : बिलकुल एक हफ्ते के लिए बिलकुल खाली।
रिपोर्टर : ट्रेन भर-भर कर जाएंगी?
इस्लाम : ट्रेन भरकर जाएंगी यहां से, बसें चलती हैं यहां डायरेक्ट गुड़गांव से बस भी, ट्रेन भी।
रिपोर्टर : क्यूं ले जाता है?
इस्लाम : जिन्होंने ट्रेवल एजेंसी का काम कर रखा है, 8-10 बस किराए का लेकर जाता है।
रिपोर्टर : हर बार जाती है?
इस्लाम : हर बार।
रिपोर्टर : 2021 में कितने गए होंगे?
इस्लाम : 30 लाख में से समझ लो 20 लाख तो गए होंगे। 70 परसेंट तो जाता है और इस बार समझ लो 90 परसेंट जाएगा।
रिपोर्टर : इसकी वजह?
इस्लाम : बीजेपी को भगाना है।
रिपोर्टर : आप कितने वोटर लेकर जाते हो?
इस्लाम : मेरे जाने वाले कम से कम 3-4 हजार तो होंगे ही, बोल देते हैं घर जाना है।
रिपोर्टर : तो आप कांग्रेस के लिए जाते हैं या टीएमसी के लिए?
इस्लाम : जो हमारे सेंटर वाला वोट है, वो कांग्रेस, जो असेंबली वाला है उसके लिए टीएमसी।
रिपोर्टर : ऐसा क्यूं?
इस्लाम : ऐसा इसलिए कि बीजेपी को भगा सकते हैं एक ही इंसान, वो है ममता।
इसके बाद इस्लाम ने गुड़गांव पुलिस द्वारा कथित अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ चलाए गए मतदाता सत्यापन अभियान (एसआईआर) का अपना विवरण सुनाया। उन्होंने कहा कि सत्यापन के बहाने कई बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को देर रात उनके घरों से उठा लिया गया। इस्लाम ने दावा किया कि वह व्यक्तिगत रूप से लगभग 100-200 लोगों को जानते हैं, जिन्हें पुलिस ने उठा लिया था। उन्होंने कहा कि वह और बबलू कुछ स्थानीय पुलिसकर्मियों को जानते हैं और उनकी मदद से वे पुलिस चौकी से कुछ प्रवासी श्रमिकों को रिहा कराने में कामयाब रहे। उन्होंने कहा कि उन दिनों लोग डरे हुए थे। डर के मारे कई लोग पश्चिम बंगाल लौट गए थे। हालांकि अब वे वापस आ चुके हैं।
रिपोर्टर : अभी जो ड्राइव हुआ था यहां पर बांग्लादेशियों को लेकर, उसमें आपके साथ कोई दिक्कत?
इस्लाम : मेरे साथ नहीं हुआ, पर मेरे नहीं हुआ, पर मेरे जानने वाले कई साथ बहुत हुआ, इतना डर का माहौल हो गया था यहां पर आप यकीन नहीं करेंगे। गरीब आदमी पूरा दिन काम करके आता है, रात को सोता है और अचानक रात को 2 बजे, 3 बजे आकर बोलता है- तुम लोग बांग्लादेशी हो, जबकि पूरा इंडिया का प्रूफ है।
रिपोर्टर : आपके कितने लोगों के साथ दिक्कत हुई ये?
इस्लाम : कम से कम 100-200 लोगों के साथ।
रिपोर्टर : डिटेंशन सेंटर में रखे गए थे?
इस्लाम : बिलकुल रखे गए थे, ऊपर से ये लोकल पुलिस चौकी से बबलू भाई के साथ में खुद लेकर आया था। काफी आदमी को छुड़ाकर लाए थे लोकर पुलिस से, यहां के लोकल पुलिस में थोड़ा जान-पहचान है। हम बोलते ये हमारा भाई बंधु है, हमल इनको जानते हैं, ये बांग्लादेशी नहीं हैं।
रिपोर्टर : अब वो लोग बंगाल से आ गए जो चले गए थे?
इस्लाम : हां, आ गए सारे।
रिपोर्टर : कोई भी बांग्लादेशी नहीं निकला उसमें?
इस्लाम : नहीं, कोई भी नहीं।
इस्लाम ने यह भी खुलासा किया कि उनके पास पहले दो वोट थे- एक गुड़गांव में और दूसरा पश्चिम बंगाल में। उन्होंने कहा कि बाद में उन्होंने एक वोट छोड़ने का विकल्प चुना, इसलिए उन्होंने गुड़गांव का मतदाता पंजीकरण सरेंडर कर दिया और केवल पश्चिम बंगाल का वोट ही अपने पास रखा। इस चर्चा में दूरदर्शिता और सावधानी दोनों झलकती हैं।
रिपोर्टर : तो वोट आपका बंगाल का ही है?
इस्लाम : हां जी, बंगाल का ही है।
रिपोर्टर : गुड़गांव का नहीं बन गया?
इस्लाम : नहीं, एक बार बनवाया था, फिर उसके बाद हमने कटवा दिया।
रिपोर्टर : तो एक बार दोनों जगह था आपका, बंगाल भी और गुड़गांव भी?
इस्लाम : हमने एक ही बार डाला था वोट।
रिपोर्टर : फिर कटवा क्यूं दिया?
इस्लाम : क्यूंकि हमें पता था कहीं न कहीं ये सिच्युएशन होना है। एक दिन नाम कट जाना है, क्यूंकि मेरी जमीन जायजाद सब बंगाल में है।

आगे जो बातचीत प्रस्तुत की गई है, वह इस बात की झलक देती है कि प्रवासी श्रमिक अपने गृह प्रदेश में चुनावों को किस नजरिए से देखते हैं। जब हम पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के एक अन्य बांग्ला भाषी प्रवासी मजदूर रमजान अली से मिले, तो उन्होंने हमें बताया कि पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान उनके स्थानीय विधायक ने गुड़गांव में रहने वाले मतदाताओं के लिए ट्रेन या बस से पश्चिम बंगाल लौटने और अपना वोट डालने की व्यवस्था की थी। उन्होंने कहा कि इस बार भी गुरुग्राम में बड़ी संख्या में बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिक टीएमसी को वोट देने और भाजपा की हार सुनिश्चित करने के लिए वापस यात्रा करेंगे।
रिपोर्टर : कितने लोग जाएंगे यहां से बंगाल?
रमजान : मान के चलो कम से कम 80 परसेंट जाएगा।
रिपोर्टर : ममता को वोट डालने गुड़गांव से?
रमजान : हां, बाहर में जितना है।
रिपोर्टर : कैसे जाएगा?
रमजान : कैसे भी जाए, ट्रेन में, बस में।
रिपोर्टर : खर्चा कौन देगा?
रमजान : खर्चा अपने आप देगा या वहीं से कोई पार्टी से देगा…।
रिपोर्टर : 2021 में कैसे गए थे आप?
रमजान : वहीं पर था मैं।
रिपोर्टर : यहां के लोग कैसे गए थे?
रमजान : ट्रेन से, बस से।
रिपोर्टर : खर्चा कौन दिया?
रमजान : हमारा वही का एमएलए दिया था।
रिपोर्टर : इस बार 26 में ज्यादा लोग जाएंगे?
रमजान : हां।
रिपोर्टर : क्यूं? वजह उसकी?
रमजान : जैसे चल रहा है, देख नहीं रहे हो आप?
रिपोर्टर : बीजेपी को हराना है?
रमजान : हां, बिलकुल।

इसके बाद होने वाली बातचीत एसआईआर और उससे जुड़े भय पर केंद्रित है। जब तहलका रिपोर्टर की मुलाकात गुरुग्राम में पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर के एक अन्य बांग्ला भाषी प्रवासी मजदूर फारूक अब्दुल्ला से हुई, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने एसआईआर से संबंधित अपने सभी दस्तावेज पश्चिम बंगाल में अपने माता-पिता और भाई को भेज दिए थे। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में मुसलमान एसआईआर से नहीं डरते हैं और इसके बारे में डर विपक्षी दलों द्वारा फैलाया जा रहा है। फारूक ने कहा कि उनके इलाके में ज्यादातर बांग्लादेश से आए हिंदू हैं, जिनके वोटों की हेराफेरी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि उनके क्षेत्र में बांग्लादेश से लगभग 20 प्रतिशत मुस्लिम और 80 प्रतिशत हिंदू आए हैं।
रिपोर्टर : डाक्यूमेंट्स भेज दिया आपने या भेजोगे?
फारूक : भेज दिया, पापा हैं।
रिपोर्टर : कौन-कौन है वहां?
फारूक : मां है, बाप है, भाई है। हमने डाक्यूमेंट्स भेज दिया था, पापा ने साइन करके जमा कर दिया।
रिपोर्टर : आपको लगता है मुसलमानों को एसआईआर से डरना चाहिए?
फारूक : मेरे को तो लगता है नहीं डरना चाहिए।
रिपोर्टर : फिर इतना डराया क्यूं जा रहा है?
फारूक : ये राजनीति का फायदा ले रहा है नेता।
रिपोर्टर : अपोजीशन कह रहा है वोट कटेंगे?
फारूक : हमारे वहां तो देख रहा हूं हिंदू का ही ज्यादा कट रहा है। बांग्लादेशी ज्यादा आया है।
फारूक (आगे) : हमारे अगल-बगल में सब बांग्लादेशी है।
रिपोर्टर : आस-पड़ोस में सब बांग्लादेशी है?
फारूक : हां, हिंदू हैं सब।
रिपोर्टर : उनके कागज हैं या नहीं?
फारूक : ये तो हमने नहीं देखा, मगर वो लोग वोट डाल रहा है।
पश्चिम बंगाल में एसआईआर परियोजना चल रही थी, उसी दौरान पश्चिम बंगाल के बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों के बीच गुड़गांव में तहलका ने जमीनी स्तर पर वास्तविकता का जायजा लिया। तहलका रिपोर्टर से मिले सभी प्रवासी श्रमिक इस बात से नाराज थे कि टीएमसी के कट्टर मतदाता होने के बावजूद राज्यसभा सांसद ममता बाला ठाकुर को छोड़कर कोई भी टीएमसी नेता संकट के दौरान उनसे मिलने नहीं आया। ममता बाला ठाकुर ने कथित अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ गुड़गांव पुलिस के सत्यापन अभियान के दौरान उनसे मुलाकात की थी। इस अभियान के दौरान पश्चिम बंगाल के कई बांग्ला भाषी प्रवासी श्रमिकों को हिरासत में लिया गया और उन्हें डिटेंशन सेंटर्स में भेज दिया गया।
इसके बावजूद प्रवासी श्रमिकों ने हमारे रिपोर्टर को बताया कि वे भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी को भारी संख्या में वोट देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में मुसलमान एसआईआर से डरते नहीं हैं, उनका दावा है कि उनके पास अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए सभी दस्तावेज मौजूद हैं। प्रवासी मजदूरों द्वारा चलाए जाने वाले लगभग सभी ऑटो-रिक्शों पर गुड़गांव पुलिस के प्रमाण पत्र चिपके हुए हैं, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि चालकों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
तहलका रिपोर्टर से मिले एक प्रवासी मजदूर ने टीएमसी के एक मौजूदा सांसद पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि जब कई बंगाली प्रवासियों को अवैध बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में डिटेंशन सेंटर में भेजा गया, तो उन्होंने मदद की उनकी गुहार अनसुनी कर दी। चूंकि कर्मचारी अपने दावे को साबित करने के लिए सबूत पेश करने में विफल रहा, इसलिए तहलका ने घटना के विवरण को गुप्त रखने का फैसला किया। हालांकि भय, अनिश्चितता और आधिकारिक जांच के बीच यह विवरण राजनीतिक आत्मसमर्पण की गहरी भावना को दर्शाता है।




