
देश के अनेक शहरों में स्थापित वहां के नगर निगमों में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायतों के बारे में हम अक्सर सुनते रहते हैं। तहलका को आगरा नगर निगम में हो रहे भ्रष्टाचार की पड़ताल करने को तहलका एसआईटी ने आगरा नगर निगम का रुख किया और वहां व्याप्त भ्रष्टाचार की गोपनीय जानकारी इकट्ठी की। तहलका एसआईटी के पत्रकार ने अपनी पड़ताल के दौरान आगरा नगर निगम में मृत्यु प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र और अनुपलब्ध जन्म प्रमाण पत्र (एनएबीसी) जारी करने के एवज में दलालों और आउटसोर्स कर्मचारियों को खुलेआम रिश्वत मांगते हुए अपने खुफिया कैमरे में कैद किया। तहलका एसआईटी की रिपोर्ट :-
2020 में स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े आगरा नगर निगम के अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों वाला एक गुमनाम पत्र शहर में सनसनी मचा गया था। यह पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करके लिखा गया था। 2024 में एक ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसमें कथित तौर पर एक निगम अधिकारी को दो लाख रुपये की रिश्वत मांगते हुए सुना जा सकता है। इससे पहले 2020 में निगम के कचरा संग्रहण कार्य में 2.82 करोड़ रुपए का भ्रष्टाचार सामने आया था, जिसमें काम आवंटित एजेंसी ने मकान मालिकों से रुपए तो एकत्र किए, लेकिन ये रुपए निगम के खाते में जमा नहीं किए।
साल 2023 में एक आरोप लगा था कि एक निगम कर्मचारी ने एक व्यक्ति से उसकी मां की मृत्यु के बाद उसके नाम पर घर का स्वामित्व हस्तांतरित करने के लिए 25,000 रुपए की रिश्वत की मांग की थी। 2025 में शहर के मेयर ने निगम के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए, जिसमें आरोप लगाया गया कि निविदा प्रक्रिया का पालन किए बिना एक फर्म को अनुबंध आवंटित किया गया था। साल 2022 में निगम के एक आउटसोर्स कर्मचारी को भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद बर्खास्त कर दिया गया था, क्योंकि यह पाया गया था कि उसने आठ साल की सेवा के दौरान करोड़ों रुपए की संपत्ति अर्जित कर ली थी, जबकि उसे प्रति माह केवल 5,000 रुपए वेतन मिलता था। भ्रष्टाचार के मामलों की सूची लंबी है, ये उत्तर प्रदेश के आगरा नगर निगम से जुड़े कुछ उदाहरण मात्र हैं। कई मामले सामने आने और उनमें से कुछ में कार्रवाई होने के बावजूद आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार कथित तौर पर बेरोकटोक जारी है।
आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार का पैमाना इस बात से समझा जा सकता है कि महात्मा गांधी रोड (एम.जी. रोड), आगरा स्थित निगम परिसर में कोई भी व्यक्ति किसी भी काम से प्रवेश करते ही दलालों द्वारा उसका स्वागत किया जाता है, जो पैसे के बदले काम करवाने के लिए तरह-तरह के प्रस्ताव पेश करते हैं। ये दलाल आगरा नगर निगम में संविदात्मक या आउटसोर्स कर्मचारी के रूप में काम करते हैं। सूत्रों के अनुसार, निगम की मुख्य इमारत में दो कमरे हैं- कमरा नंबर-101 और कमरा नंबर-103, जो कथित भ्रष्ट आचरण के लिए कुख्यात हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, सभी दलाल, जिनमें कुछ ऐसे भी हैं, जो अपनी निजी क्षमता में काम करते हैं; इन कमरों में बैठकर उन ग्राहकों का इंतजार करते हैं, जो विभिन्न कार्यों के लिए निगम से संपर्क करते हैं। ऐसी खबरें हैं कि निगम के कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारी भी अब दलाल बन गए हैं। वे प्रतिदिन निगम कार्यालय आते हैं और कमरा नंबर-101 या कमरा नंबर-103 में बैठते हैं। ये सब उन लोगों का इंतजार करते हैं, जो अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज बनवाने के लिए नगर निगम में आते हैं। हालांकि ये दलाल तब इन कमरों से गायब हो जाते हैं, जब वरिष्ठ अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं। सूत्रों के अनुसार, ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां दलालों ने ग्राहकों से पैसे लेकर काम करने के वादे किए, लेकिन काम कभी पूरा नहीं किया।
‘मुझे उम्मीद है कि आप मेरा स्टिंग ऑपरेशन नहीं कर रहे हैं, न ही मेरी रिकॉर्डिंग कर रहे हैं। मुझे इन सब चीजों से डर लगता है। यदि आप अमेरिका या लंदन जा रहे हैं, तो आपको अनुपलब्ध जन्म प्रमाण पत्र यानी नॉन-अवेलेबिलिटी बर्थ सर्टिफिकेट (एनएबीसी) की आवश्यकता होगी। यह प्रमाण पत्र तब आवश्यक होता है, जब आपके पास आपका मूल जन्म प्रमाण पत्र न हो। मैं आगरा नगर निगम से आपका एनएबीसी एक सप्ताह में या एक-दो दिन में या यहाँ तक कि एक घंटे में भी बनवा दूंगा। आमतौर पर कंपनी को एनएबीसी तैयार करने में एक महीना लगता है, लेकिन मैं पैसे के बदले इसे तुरंत तैयार कर दूंगा। यह एनएबीसी आपके जन्म प्रमाण पत्र के विकल्प के रूप में काम करेगा।’ -आगरा नगर निगम के आउटसोर्स कर्मचारी राम चौबे उर्फ ऋषभ शर्मा ने उससे ग्राहक बनकर मिले तहलका के खुफिया रिपोर्टर से कहा।
‘मैं इस बात से सहमत हूं कि आपके माता-पिता के मृत्यु प्रमाण पत्रों को दोबारा जारी करना आपका वास्तविक कार्य है, जिसके लिए कोई रिश्वत नहीं ली जानी चाहिए थी। लेकिन अगर आप रिश्वत नहीं देंगे, तो आपके काम में समय लगेगा। इसके अलावा दो मृत्यु प्रमाण पत्रों को दोबारा जारी करने के लिए सभी रिकॉर्ड की जांच करना एक कष्टदायक काम है, इसलिए मैंने आपसे इसी के लिए पैसे लिए हैं।’ -ऋषभ ने आगे कहा।
‘मैं किसी जाति या धर्म में विश्वास नहीं करता, लेकिन इस सरकारी व्यवस्था में मुसलमानों के लिए हालात खराब हैं। यदि आप अपने लिए नया जन्म प्रमाण पत्र बनवाने जाते हैं, तो आपकी फाइल उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास जाएगी, जो आपको बुलाकर कई सवाल पूछेंगे। हालांकि नए जन्म प्रमाण पत्र बनवाने वाले हिंदुओं के मामले में ऐसा नहीं है; उनसे केवल कुछ ही प्रश्न पूछे जाते हैं।’ -ऋषभ ने तहलका रिपोर्टर से कहा।
‘मैं पिछले एक साल से रिश्वत के जरिए पैसे कमा रहा हूं। पहले मैं केवल 5,000-6,000 रुपए के वेतन पर ही गुजारा कर रहा था। अब रिश्वत के जरिए मैं हर महीने करीब 30,000 से 40,000 रुपए कमा रहा हूं। मेरे पास बहुत सारे ग्राहक हैं, जो काम करवाने के लिए मेरे पास आते हैं। कई लोगों के पास मेरा फोन नंबर है।’ -ऋषभ ने कहा।
‘मैं आपका एनएबीसी 15 दिनों में बनवा दूंगा। आम तौर पर निगम एक महीने में एक एनएबीसी जारी करता है, लेकिन मैं आपसे रिश्वत केवल आपके काम में तेजी लाने के लिए ही ले रहा हूं।’ -आगरा नगर निगम के एक अन्य आउटसोर्स कर्मचारी बॉबी ने तहलका रिपोर्टर से कहा।
‘मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए मुझे रिश्वत के तौर पर 8,000 रुपए चाहिए, क्योंकि मुझे निगम में दूसरों को भी यह रकम देनी पड़ती है। एनएबीसी के लिए मैं आपसे 5,000 रुपए लूंगा और बनवा दूंगा।’ -बॉबी ने कहा।
‘जाकर आगरा नगर निगम के किसी भी कर्मचारी से मिलो। वह तुम्हारा काम मुझसे रिश्वत के तौर पर ली जा रही रकम से कम में नहीं करेगा। इसमें से सिर्फ 400-500 रुपए ही मेरी जेब में जाएंगे। आपको आश्वस्त करने के लिए मैं बताना चाहूंगा कि मैंने तीन या चार महीने पहले एक एनएबीसी करवाया था।’ -आगरा नगर निगम के एक अन्य दलाल श्याम ने तहलका रिपोर्टर से कहा।
तहलका रिपोर्टर ने आगरा नगर निगम के कर्मचारियों के खिलाफ लोगों द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की पड़ताल करने के लिए जनहित में आगरा की यात्रा की। निगम में तहलका रिपोर्टर की मुलाकात आउटसोर्स कर्मचारी राम चौबे से हुई, जो ऋषभ शर्मा के नाम से वहां जाने जाते हैं। पत्रकार और ऋषभ शर्मा की यह बैठक आगरा के संजय प्लेस स्थित एक चाय की दुकान पर आयोजित हुई। ऋषभ ने तहलका रिपोर्टर के माता-पिता के दो मृत्यु प्रमाण पत्र दोबारा जारी किए, जो एक वास्तविक कार्य है, जिसके लिए किसी प्रकार के धन की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि ऋषभ ने पत्रकार से 5,000 रुपए रिश्वत के तौर पर लिए और कहा कि रिश्वत के बिना काम में बहुत समय लग जाता। ऋषभ ने यह भी कहा कि चूंकि उन्होंने माता-पिता के रिकॉर्ड का पता लगाने के लिए काफी प्रयास किए हैं, इसलिए उन्हें इनाम भी मिलना चाहिए।
रिपोर्टर : जो मैंने पैसे भेजे थे, तीन हजार मैंने भेज दिए, दो हजार रह गए थे। टोटल 5,000 का खर्चा था डेथ सर्टिफिकेट के लिए मम्मी-पापा का। तो डेथ सर्टिफिकेट वैसे नहीं मिलते?
ऋषभ : मतलब?
रिपोर्टर : मतलब, नॉर्मल तरीके से, बिना खर्चा किए नहीं बनता?
ऋषभ : बनता है, पर उसमें टाइम लगता है।
ऋषभ (आगे) : बन जाता है, लेकिन सारे डॉक्यूमेंट्स आपके पास हों, मैं बताऊं पहले जो चलते थे हाथ के बने हुए, मतलब पेन से बने होते थे। उसमें सारी डिटेल होती थी। मेहनत नहीं करनी पड़ती है, रजिस्टर नहीं खोलने पड़ते, उसमें साफ लिखा होता है कितने नंबर का कितना, इस वाले वार्ड में ये है, तुरंत निकाल के हाल की हाल हो जाता था। फिर उसमें एक महीना लगता है। अब जिसका कोई एंट्री नहीं है, उसे खोजने में तो मेहनत लगती है।
पैसे लेकर रिपोर्टर के माता-पिता के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के बाद ऋषभ ने तहलका रिपोर्टर को सलाह दी कि वह (रिपोर्टर) आगरा में अपना जन्म प्रमाण पत्र कैसे बनवा सकते हैं। हालांकि ऋषभ ने कहा कि यह एक कठिन काम है। ऋषभ ने जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया और इसके लिए भी पत्रकार से रिश्वत के रूप में पैसे की मांग की।
रिपोर्टर : अच्छा अब बताओ मेरा बर्थ सर्टिफिकेट कैसे बनेगा?
ऋषभ : आपके बर्थ सर्टिफिकेट की कोई एंट्री नहीं है।
रिपोर्टर : देख लिया आपने?
ऋषभ : हां, मैंने बहुत देखा, सारे रजिस्टर छान मारे एक महीने से तुम्हारे माता जी-पिता जी के सर्टिफिकेट के बाद मैंने तुम्हारा ही काम किया है।
रिपोर्टर : उस वक्त हो सकता है एंट्री न की हो।

ऋषभ : मुझे ये ही लग रहा है, और कोई तरीका नहीं। अगर होता, तो जरूर मैं आपको बताता।
रिपोर्टर : अब कैसे बनेगा?
ऋषभ : अब आपके मम्मी-पापा के प्रमाण पत्र हो गए हैं, तो अब आप सरकार को ये दिखा सकते हो कि हां मेरे माता-पिता यहीं पर एक्सपायर हुए हैं और ये हैं उनके दस्तावेज। दो मम्मी-पापा के प्रमाण पत्र लग जाएगा। दो पड़ोसियों के गवाहों में और फिर आधार कार्ड लगेंगे, जो आपसे उम्र में 20 साल बड़े हों।
रिपोर्टर : पड़ोसी होने चाहिए?
ऋषभ : हां, जब आप वहां पैदा हुए, तो सब दे देंगे।
रिपोर्टर : दो के आधार चाहिए?
ऋषभ : हां, और एक किसी बुजुर्ग महिला का आधार, जो ये कह सके कि हां मैंने इस बच्चे का घर में प्रसव कराया।
रिपोर्टर : मतलब दाई है?
ऋषभ : दाई नहीं भी हो, कोई महिला भी हो, चलेगी।
रिपोर्टर : वो कैसे कह देगी मैंने प्रसव कराया इसका?
ऋषभ : वो नहीं कहेगी, उसका आधार चाहिए और एक एफिडेविट बनेगा।
रिपोर्टर : एफिडेविट बनेगा?
ऋषभ : एफिडेविट में लिखा होगा मैंने इस बच्चे का घर में ही प्रसव कराया। इस दौरान इस सन् (ईयर) में ये घर पर ही हुआ।
ऋषभ (आगे) : ये फाइल… बालूगंज में रहते हो ना आप? ताजगंज मुगल की पुलिया पर ऑफिस है नगर निगम का, वहां पर जमा होगी। वहां से विष्णु बाबू इसको सुपरवाइजर को भेजेंगे। सुपरवाइजर वो आपकी फाइल को लेकर आएगा दोनों पड़ोसियों के साइन लेगा, चला जाएगा। फिर वो फाइल सीएमओ के पास जाएगी। विष्णु बाबू ले जाएंगे ताजगंज से सीएमओ कार्यालय, वहां साइन करा के लाएंगे। एक तारीख दे देंगे आपको, उस फाइल को आप लाकर मुझे दे देंगे।
रिपोर्टर : कितना टाइम लग जाएगा पूरा प्रोसीजर के लिए?
ऋषभ : कम से कम अगर एसडीएम साहिब के पास आप जाएंगे, तो गारंटी है, वो जल्दी कर देंगे। मगर अगर कोई अनपढ़ व्यक्ति जाएगा, उसे तो पागल कर देंगे घुमा देंगे।
रिपोर्टर : खर्चा कितना आएगा इसमें?
ऋषभ : खर्चा तो मतलब इसमें एफिडेविट बनेंगे अब माता-पिता तो हैं नहीं, तो दो एफिडेविट बनेंगे। एक आपके नाम का बन जाएगा… एसडीएम की मंगाओ, तो उसके यहां तो कुछ लगता नहीं है, वहां तो 100-50 रुपए फॉर्म के होंगे, तो यही ऊपर की इसी खर्चों में हो जाएगा कुछ।
रिपोर्टर : कितना?
ऋषभ : अच्छा भागा-दौड़ी आपकी तरफ से कौन करेगा?
रिपोर्टर : तुम ही करोगे।
ऋषभ : अच्छा, देख लेंगे करवा देंगे। जो इस में दिया, वही दे देना।
रिपोर्टर : 5000 रुपए?
ऋषभ : कम ही दे देना।
रिपोर्टर : तुम क्या करोगे ये बताओ?
ऋषभ : ये घर वाली जो फाइल होती हैं, हम इन्हें कम करते हैं, कोई खास व्यक्ति होता है, उसी की करवाते हैं।
रिपोर्टर : तुम्हारा क्या रोल है 5000 में?
ऋषभ : सीएमओ से क्लियर कराऊंगा, सुपरवाइजर को देख लूंगा, बस एसडीएम के लिए तुम्हें बुलाऊंगा।

रिपोर्टर : एक महीने में बना दोगे?
ऋषभ : हां।
रिपोर्टर : गारंटी है?
ऋषभ : अरे एक महीना नहीं, तो 15 दिन ज्यादा लग जाएगा।
रिपोर्टर : बर्थ सर्टिफिकेट मेरा बनने की तो गारंटी है?
ऋषभ : क्यों नहीं बनेगा, …दुनिया की कोई ताकत नहीं रुकवा सकती।
ऋषभ ने तहलका रिपोर्टर को बताया कि वह बॉबी से भी बड़ा दलाल है, जो आगरा नगर निगम का एक अन्य दलाल है, जिससे रिपोर्टर ने बाद में मुलाकात की। ऋषभ ने अनुपलब्ध जन्म प्रमाण पत्र यानी नॉन-अवेलेबिलिटी बर्थ सर्टिफिकेट (एनएबीसी) बनवाने का सुझाव दिया, जो उनके अनुसार जन्म प्रमाण पत्र के विकल्प के रूप में काम करता है। उसने कहा कि वह एनएबीसी को एक सप्ताह में, एक दिन में, दो दिन में या यहां तक कि एक घंटे में भी बनवा सकता है। रिपोर्टर से बात करते समय ऋषभ ने मेज पर पड़े मोबाइल फोन की ओर इशारा करते हुए कहा कि उसे स्टिंग ऑपरेशन का डर है और साथ ही उसने यह भी कहा कि उसे उम्मीद है कि हम उसकी रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे होंगे।
रिपोर्टर : अगर बर्थ सर्टिफिकेट नहीं होता, तो एनएबीसी भी बनता है कोई?
ऋषभ : एनएबीसी.…ये फोन तो चालू न है, .. हेहे…?
रिपोर्टर : अरे इसकी फिकर न करो।
ऋषभ : हमें डर लगता है। हे हे……। एनएबीसी एक ऐसा सर्टिफिकेट होता है, नॉन अवेलेबिलिटी सर्टिफिकेट। उसमें ये रहता है… एक इस व्यक्ति का बर्थ आगरा में तो हुआ है, परन्तु इसकी कोई दस्तावेज, कोई सबूत नहीं है। रिकॉर्ड नहीं है। तो वो सर्टिफिकेट जब काम में आता है, जैसे मान लीजिए आप अमेरिका जा रहे हैं, लंदन जा रहे हैं या हिंदुस्तान से बाहर पासपोर्ट के लिए, उससे एक लाभ नहीं मिल पाएगा, जो कि आप आधार कार्ड में छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगे उससे, बाकी की दुनिया के सारे काम हो जाएंगे।
रिपोर्टर : मतलब एनएबीसी इंडिया में भी चलेगा, बाहर भी?
ऋषभ : हां।
रिपोर्टर : उसको बनवाने का कितना खर्चा?
ऋषभ : पूछकर बताना पड़ेगा।
रिपोर्टर : कितने दिन में?
ऋषभ : जब कहोगे, तब बनवा देंगे।
रिपोर्टर : बर्थ सर्टिफिकेट आसान है या एनएबीसी?
ऋषभ : एनएबीसी।
रिपोर्टर : दोनों में से क्या बनवाना चाहिए?
ऋषभ : अगर आपको देखा जाए तो एनएबीसी।
रिपोर्टर : क्यूं?
ऋषभ : आप रॉयल आदमी हो।
रिपोर्टर : मैं रॉयल आदमी लग रहा हूं आपको?
ऋषभ : हां, हा.हा… एनएबीसी बनवा लोगे, तो ठीक रहेगा। इतना दौड़ना-भागना नहीं पड़ेगा।
रिपोर्टर : अच्छा, ठीक है, मैं सोचकर बताता हूं। कितने दिन में बनवा दोगे?
ऋषभ : एक सप्ताह में।
रिपोर्टर : वो तो कह रहा था, एक महीना में एक बनता है?
ऋषभ : बॉबी नया मुर्गा है अभी, यमुना में उतरा है।
रिपोर्टर : तू उसको बताना मत मैंने बोला है।.
ऋषभ : वो यमुना में अभी तैर रहा है। हम तैरकर के बाहर आ चुके हैं। एनएबीसी मैं चाहूं, तो दो दिन में बनवा दूं। एक दिन में बनवा दूं, एक घंटे में बनवा दूं। लेकिन अभी बड़ा बाबू आया नहीं है। इसलिए मैं बोल रहा हूं।
इसके बाद ऋषभ ने खुलासा किया कि उसे हमारा (रिपोर्टर का) नंबर कैसे मिला और उसने रिश्वत के तौर पर 5,000 रुपए लेकर रिपोर्टर के माता-पिता के मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनवाए। ऋषभ ने बताया कि आपने सबसे पहले आगरा नगर निगम के एक अन्य दलाल श्याम से इस काम के लिए संपर्क किया था, जिसने बदले में मदद के लिए मुझसे (ऋषभ से) संपर्क किया। ऋषभ ने कहा कि उसने हमारे (रिपोर्टर के) दस्तावेजों से उनका नंबर लिया और श्याम को दरकिनार करते हुए मुझे सीधे फोन किया। इससे पता चलता है कि आगरा नगर निगम में दलाल ग्राहकों और पैसों की होड़ में एक-दूसरे को भी धोखा देते हैं और बेईमानी करते हैं।
रिपोर्टर : मुझे तो तूने मना कर दिया था श्याम के साथ आया था, नहीं होगा?
ऋषभ : अरे तब भीड़ लग रही होगी मेरे पास, वा दिन बहुत भीड़ थी।
रिपोर्टर : फिर तूने फोन कैसे किया मुझे?
ऋषभ : ऐसा था, श्याम आया पड़ा था, कह रहा था तू मेरे साथ है, मैं तेरे साथ हूं। मैंने सोचा ये पीछे पड़ा हुआ है जरूर कोई माल बनाना है। ये इसका रिकॉर्ड मिल क्यूं नहीं रहा है और बार-बार ये जिद कर रहा है, कभी मेरे पास आ रहा, कभी किसी के पास। फिर मैंने कहा- “श्याम बाबू तू पहले डिसाइड कर ले कौन की तरफ है।” फिर उसने कहा- ”तुम तो करा नहीं पाओगे, हम उससे ही करा लेंगे।” मैंने कहा- “ठीक है करा लो, मेरे पास टाइम नहीं है।”
रिपोर्टर : श्याम बोला?
ऋषभ : फिर मैंने देख ली तुम्हारी फाइल निकाली मैंने। ये रजिस्टर निकालो बाबा,…बाबा ने पोल खोल दी। बाबा ने कहा, मैं भरने गयो, वा मैं पहले से भरे भराए निकले।
रिपोर्टर : नंबर मेरा कहां से मिला तुम्हें?
ऋषभ : वही में से… मैंने कही साले इसकी कॉपी करो। फिर मैंने इसकी कॉपी करी।
नीचे दिए गए संवाद में ऋषभ इस बारे में बात करता है कि उसे ग्राहक कैसे मिलते हैं और उसकी कमाई कितनी है। वह बताते हैं कि उनका संपर्क नंबर व्यापक रूप से जाना जाता है और पिछले एक साल में उन्होंने अपने आधिकारिक वेतन से कहीं अधिक कमाया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल से वह रिश्वत के जरिए प्रति माह 30,000 से 40,000 रुपए कमा रहे हैं, जबकि पहले वह मात्र 5,000-6,000 रुपए के वेतन पर गुजारा कर रहे थे।
रिपोर्टर : तुमको क्लाइंट मिलते कैसे हैं?
ऋषभ : मेरे नंबर बट गए हैं दुनिया में।
रिपोर्टर : लाख रुपए महीना कमा रहे हो, घर क्यूं नहीं बनाते अपना आगरा में?
ऋषभ : पैसे तो अब कमाना स्टार्ट हुआ है। पहले 5-6 हजार ही मिलते थे।
रिपोर्टर : कब से कमा रहे हो?
ऋषभ : एक साल से।
रिपोर्टर : लाख रुपए महीना कमा लेते हो?
ऋषभ : लाख तो नहीं, …30-40 (हजार) है जाए आराम से, ऊपर भी मिल जाते हैं, कम भी।
इसके बाद ऋषभ ने आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार की एक घटना का खुलासा किया, जहां कुछ दलालों ने एक ऐसे व्यक्ति के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किया था जो वास्तव में जीवित था। उन्होंने बताया कि उन सभी को जेल भेज दिया गया था और अब उन पर मुकदमा चल रहा है। इससे पता चलता है कि यह रैकेट कितनी व्यापक हो सकता है।
रिपोर्टर : बॉबी तो ये कह रहा था आदमी अगर जिंदा भी है, तब भी डेथ सर्टिफिकेट बनवा दूंगा?
ऋषभ : बॉबी फिर जेल काटेगा, जेल काट साले।
रिपोर्टर : ऐसा भी हो जाता है जिंदा आदमी का?
ऋषभ : नहीं होता यार। एक बार बन गया था, एक लड़के ने बनवा लिया, पिता उसका बाहर गया था। अभी तक केस चल रहा है उसका।
रिपोर्टर : नगर निगम का अधिकारी था?
ऋषभ : हां, ये बॉबी.. समझ लो ये सारे ब्लैकलिस्ट चल रहे हैं।
रिपोर्टर : बॉबी ने बनवाया था?
ऋषभ : बॉबी समझ लो, और भी हैं, अभी तक जाते हैं तारीख पर ये लोग। सरदार हैं, …कह रहा है जान ले लूंगा मगर छोड़ूंगा नहीं।
रिपोर्टर : सरदार है बाप?
ऋषभ : हां.. कह रहा है छोड़ूंगा नहीं साले को।
रिपोर्टर द्वारा नया जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के सवाल पर ऋषभ ने कहा कि इस सरकार के अधीन प्रशासनिक व्यवस्था में मुसलमानों के लिए हालात मुश्किल हैं। उन्होंने बताया कि हमारी जन्म प्रमाण पत्र की फाइल उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास जाएगी, जो हमें बुलाकर कई सवाल पूछेंगे। उन्होंने आगे कहा कि जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन करने वाले हिंदुओं के मामले में ऐसा नहीं है, उनसे तुलनात्मक रूप से कम प्रश्न पूछे जाते हैं।
इस बीच ऋषभ ने 5,000 रुपए की रिश्वत लेकर पत्रकार के माता-पिता के दो मृत्यु प्रमाण पत्र दोबारा जारी करवा दिए थे। उन्होंने पैसे के बदले पत्रकार के लिए जन्म प्रमाण पत्र और एनएबीसी बनवाने का भी वादा किया। इसके बाद तहलका के रिपोर्टर की मुलाकात बॉबी (जो अपने इसी नाम से वहां जाना जाता है) से हुई। बॉबी एक दूसरा दलाल है और आगरा नगर निगम के एक आउटसोर्स कर्मचारी था। यह बैठक आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित एक रेस्तरां में हुई। हमने बॉबी को मृत्यु प्रमाण पत्र और एनएबीसी के बदले एक फर्जी सौदा पेश किया। बॉबी ने मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए 8,000 रुपए और एनएबीसी के लिए 5,000 रुपए मांगे। चूंकि हमें ऋषभ से मृत्यु प्रमाण पत्र पहले ही मिल चुके थे, इसलिए हमने केवल एनएबीसी की मांग की। बॉबी ने हमें बताया कि वह एनएबीसी को 15 दिनों में बनवा सकता है, न कि एक महीने में जैसा कि लोग कहते हैं। बॉबी ने कहा- ‘हम आपका एनएबीसी 15 दिनों में प्राप्त करने के लिए पैसे दे रहे हैं और मुझे निगम में अन्य लोगों को भी भुगतान करना है।’ आगे की बातचीत में बॉबी ने कहा है कि एनएबीसी कैसे प्राप्त किया जा सकता है। बॉबी ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यह स्थानीय और विदेशी दोनों उद्देश्यों के लिए काम करता है।
बॉबी : आपका एनएबीसी लग जाएगा ना तब आपका झंझट खतम हो जाएगा।
रिपोर्टर : नॉन अवेलेबिलिटी बर्थ स्रर्टिफिकेट। लेकिन वो तो विदेश जाने के लिए इस्तेमाल होता है, लोकल थोड़ी चलेगा?
बॉबी : हां चलेगा, चलेगा क्यूं नहीं।
रिपोर्टर : मुझे बताया है विदेश जाते हैं उनको चाहिए होता है।
बॉबी : जिनका रिकॉर्ड नहीं होता, उनके लिए लगता है।
रिपोर्टर : अच्छा, जिसका बर्थ रिकॉर्ड नहीं है इंडिया में, उसके लिए चल जाएगा?
रिपोर्टर (आगे)- कितने दिन में एनएबीसी बनवा दोगे?
बॉबी : एनएबीसी.. 15 दिन में।
रिपोर्टर : हाथ में मिल जाएगा?
बॉबी : हाथ में, आप कहोगे, तो मैं स्पीड पोस्ट कर दूंगा।
रिपोर्टर : मुझे कोई कह रहा था एक महीने में एक ही देते हैं?
बॉबी : होता है.. पैसे किसलिए जा रहे हैं।

रिपोर्टर : टोटल खर्चा कितना?
बॉबी : आठ।
रिपोर्टर : आठ हजार?
बॉबी : हां।
रिपोर्टर : कम कितना हो सकता है?
बॉबी : आप बताइए?
रिपोर्टर : पांच कर लो?
बॉबी : नहीं, इतना नहीं हो सकता। 100-200-5000 मैं कर सकता हूं। क्यूंकि मुझे भी दो-चार लोगों को देना पड़ेगा।
रिपोर्टर : अच्छा, नगर निगम में देना पड़ेगा?
बॉबी : देना पड़ेगा… सीधी सी बात है।
रिपोर्टर : आप फाइनल एनएबीसी का बता दो।
बॉबी : पांच।
रिपोर्टर : एनएबीसी की 5000, ज्यादा नहीं हो रहा है ये?
बॉबी : कैसे भी कर लो, वो तो देना पड़ेगा। डेथ सर्टिफिकेट आपको चाहिए ही चाहिए।
रिपोर्टर : मैं तो कह रहा हूं, दोनों पांच हजार में कर लो?
बॉबी : इतना नहीं हो पाएगा।
इसके बाद बॉबी ने एनएबीसी के लिए रिश्वत के तौर पर 5,000 रुपये की मांग की। रिपोर्टर ने बॉबी को 3,000 रुपए ऑनलाइन भेज दिए और एनएबीसी प्राप्त होने के बाद शेष 2,000 रुपए देने पर सहमति जताई। आगे की चर्चा से यह भी पता चलता है कि मृत्यु प्रमाण पत्र दिखाए बिना एनएबीसी जारी नहीं किया जा सकता है।
रिपोर्टर : अब आकेले एनएबीसी करा दो अभी उसका मैं बता दूंगा, कितना भेज दूं आपको अभी?
बॉबी : भाई, आए हो, तो कैश दे दो।
रिपोर्टर : पता नहीं होगा भी कि नहीं, …इतना आजकल कैश कौन लेकर चलता है।
रिपोर्टर (आगे) : कैश है नहीं ज्यादा, 100 रुपए हैं। एनएबीसी के देख लो आप?
बॉबी (अपने फोन में रुपए मिलने का मैसेज देखते हुए)- 1000?
रिपोर्टर : अभी मैं टोटल दे रहा हूं आपको, …अरे पूरे थोड़े ही हैं ये।
बॉबी : ऑनलाइन आप भैया को काउंटर पर दे दो, उनसे पैसे ले लो।
रिपोर्टर : नहीं, वो नहीं करते। पहले मैं कर चुका हूं। ये आप बनाओ, मैं ऑनलाइन भेज दूंगा आपको। कैश तो नहीं होगा।
रिपोर्टर : मैं ऑनलाइन भेज दूंगा आपको। …1000 रुपए तो हो गए आपके पास एनएबीसी के।
बॉबी : लो आप ऑनलाइन भेज दो।
रिपोर्टर : 2000 और भेज देता हूं, 3000 हो जाएंगे, फिर ठीक है?

रिपोर्टर (आगे) : टोटल 5000 की बात हुई है एनएबीसी में, 3000 दे दिए, 2000 रह गए।
बॉबी : ठीक है, डेथ सर्टिफिकेट आपको पुराना निकालना पड़ेगा।
रिपोर्टर : अच्छा।
बॉबी : क्यूंकि जहां भी आप एनबीसी लगाओगे ना, वहां डेथ सर्टिफिकेट मांगेंगे।
बॉबी के बाद हमारे रिपोर्टर ने श्याम (जो अपने इसी पहले नाम से जाना जाता है) से मुलाकात की, जो आगरा नगर निगम के एक अन्य दलाल है। हमने उसे एनएबीसी प्राप्त करने के लिए एक फर्जी सौदा पेश किया। श्याम ने पत्रकार को एनएबीसी जाने की सलाह दी, क्योंकि निगम के रिकॉर्ड से जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करना बहुत मुश्किल है। श्याम ने कहा कि एनएबीसी के लिए रिश्वत की आवश्यकता होगी, जिसमें से केवल 400-500 रुपए ही उनकी अपनी जेब में जाएंगे।
रिपोर्टर : मैं ये कह रहा था अगर मेरा बर्थ सर्टिफिकेट मिल गया, फिर तो एनएबीसी की जरूरत नहीं पड़ेगी?
श्याम : नहीं पड़ेगी?
रिपोर्टर : तो आप मुझे सजेशन दो, पहले मैं बर्थ सर्टिफिकेट ढूंढू आप के थ्रू?
श्याम : परसों आपको क्लीयर कर दूंगा।
रिपोर्टर : या एनएबीसी बनवाऊं?
श्याम : देखो मैं अभी कुछ नहीं कह सकता, मेरी जेब में 400-500 से ज्यादा नहीं जाएगा।

रिपोर्टर : नहीं, आप मुझे ये बताओ मेरा बर्थ सर्टिफिकेट मिलने की कितनी संभावना है?
श्याम : 99 परसेंट नहीं है, एक परसेंट है कि मिल जाएगा।
रिपोर्टर : मिल जाएगा एक परसेंट, …ऐसा क्यूं?
श्याम : क्यूंकि ये तो बहुत पुराना मैटर हो गया है। दूसरे कुछ आपके पास प्रूफ होता, एंट्री-वेंट्री का, तो हम खोजवा देते।
रिपोर्टर : तो आप एक काम करो, अब खोजवाओ मत, आप इसी के बेस पर एनएबीसी बनवा लो, वो बर्थ सर्टिफिकेट की तरह ही है ना?
इसके बाद श्याम ने एनएबीसी बनवाने के लिए तहलका के रिपोर्टर से रिश्वत के तौर पर 3,500 रुपये की मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने तीन से चार महीने पहले किसी के लिए एक एनएबीसी बनवाया था। श्याम ने हमें आगरा नगर निगम कार्यालय जाने के लिए कहा और बताया कि वहां कोई भी उससे कम रकम में काम नहीं करेगा जितनी रकम वह हमसे ले रहा है।
रिपोर्टर : जो सर्टिफिकेट आपसे बनवाया है एनएबीसी वाला, उसको मुझे व्हाट्सएप कर दो।
श्याम : ठीक है..आप पढ़ना चाहो पढ़ लो, क्यूंकि किसी और का कागज है। आप एनएबीसी में किसी और से राय भी ले लो, ….देख लिया आपने। जहां-जहां उसका नाम है, वहां आपका आ जाएगा।
रिपोर्टर : ये तो अभी बनवाया है आपने?
श्याम : हां, 3-4 महीने हो गए।
रिपोर्टर : कस्तूर चंद गोयल…अरुण कुमार गोयल सन ऑफ कस्तूर कुमार गोयल…इनके बच्चे हैं, विदेश में। कितने दिन में बनवा दिया आपने?
श्याम : बनवा दिया मैंने 15 दिन, हफ्ते में बनवा दिया. अब तो पहले, जैसे चाहो बनवा लो, अब इसकी ज्यादा डिमांड बढ़ गई है। …मैं अंदर गया, अब कह रहे हैं महीने में दो जारी कर रहा हूं। रिपोर्टर : मतलब?
श्याम : मतलब दो ही एनएबीसी जारी कर रहे हैं।
रिपोर्टर : तो मैं दे दूं आपको, …3500 रुपए दे दूं?
श्याम : लेकिन ये कागज पहुंच के।
रिपोर्टर : दो ही तो भेजे हैं मुझे। …टेंथ का सर्टिफिकेट और पासपोर्ट बस?
श्याम : हां पीडीएफ बनाकर भेजना मुझे ताकि प्रिंट साफ निकल आए।
रिपोर्टर : ये लो गिन लो 3500 रुपए हैं, …ये दे दिया मैंने एनएबीसी का।
श्याम : हां।
रिपोर्टर : ज्यादा तो नहीं लगेगा?
श्याम : अब आप ऊपर का हिसाब तो देख ही आए हो, जिन-जिन से मिलवाया मैंने देख ही लिया, वो सामने बैठे थे। आप कभी चले जाना आंख मूंद के। कमरा देख लिए, लोगों को पहचान लिया, अगर जो मैंने बताया उससे कम में बना दे कोई।
रिपोर्टर : कागज देने के बाद?
श्याम : हां…तो मैं आपको सारे दे दूंगा। 1000 रुपए और दे दूंगा।
आगरा नगर निगम में नॉन-अवेलेबिलिटी बर्थ सर्टिफिकेट (एनएबीसी) की खूब मांग है। दलाल एनएबीसी जल्दी जारी करने के लिए 5,000 रुपए रिश्वत के तौर पर मांग रहे हैं। एनएबीसी भारत में जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम-1969 के तहत अधिकारियों द्वारा जारी किया गया एक आधिकारिक दस्तावेज है, जो प्रमाणित करता है कि किसी व्यक्ति का कोई जन्म रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। यह पासपोर्ट, वीजा और आव्रजन के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर उन लोगों के लिए जिनका जन्म 1970 से पहले हुआ हो या जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हों, क्योंकि यह औपचारिक जन्म प्रमाण पत्र के वैध विकल्प के रूप में कार्य करता है।
जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “न खाऊंगा न खाने दूंगा” का नारा लगाया, तो लोगों में यह उम्मीद जगी कि भारत में भ्रष्टाचार में काफी कमी आएगी। लेकिन आगरा नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखने के बाद जहां पैसे के बिना कोई काम नहीं होता। यह स्पष्ट है कि सत्ता में बैठे लोगों ने प्रधानमंत्री की अपील को काफी हद तक नजरअंदाज कर दिया है। आगरा नगर निगम में भ्रष्टाचार तो बस भ्रष्टाचार के पहाड़ का एक छोटा सा हिस्सा मात्र है, जो दर्शाता है कि किस प्रकार व्यवस्थित रिश्वतखोरी स्थानीय प्रशासन में अपनी जड़ें जमा चुकी है, जिससे पारदर्शिता और सार्वजनिक विश्वास दोनों कमजोर हो रहे हैं।




