तीन राज्यों की तीन विधानसभा सीटों के आए नतीजे, 2 सीटों पर बीजेपी की करारी हार

राघवेंद्र द्विवेदी

तीन सीटों पर हुए उप चुनाव में बिहार की बांकीपुर और मध्यप्रदेश की दतिया सीट पर बीजेपी को हार से बड़ा झटका लगा है। जबकि गुजरात की मांजलपुर सीट पर वो जीत दर्ज करने में सफल हुई है। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई उनकी परंपरागत बिहार की बांकीपुर सीट से जन सुराज पार्टी ने बीजेपी को हरा दिया है। मतगणना में शुरू से ही बढ़त बनाने वाले जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 64151 वोट पा कर बीजेपी के उम्मीदवार नीरज कुमार को 19324 वोटों से शिकस्त दी। नीरज कुमार को 44827 वोट मिले।

बांकीपुर सीट के नतीजे इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इस सीट से नितिन नबीन 5 बार चुनाव जीत कर विधायक बने थे और उनसे पहले उनके पिता नबीन किशोर सिन्हा भी यहाँ से चुनाव जीतते रहे हैं। ऐसे में पहली बार चुनाव लड़े प्रशांत किशोर ने बीजेपी का “अभेद्य” किला ढहा दिया।

हालांकि बीजेपी के अंदर प्रत्याशी को लेकर द्वंद्व था। पहले बीजेपी ने अभिषेक कुमार के नाम का ऐलान किया था लेकिन नामांकन के कुछ घंटे बाद ही वो चुनावी मैदान से हट गए। अंदर की कहानी ये है कि अभिषेक कुमार के खिलाफ उनके पिताजी से जुड़ा घोटाला उनका पीछा नहीं छोड़ रहा था। अभिषेक के पिता रविंद्र प्रसाद चारा घोटाले में दोषी पाए गए थे। चारा घोटाले में लालू समेत जिन 75 लोगों को दोषी ठहराया गया था, उनमें एक नाम अभिषेक के पिता रविंद्र प्रसाद का भी था। उन्हें 3 साल की सजा और 50 हजार का जुर्माना लगाया गया था। दरअसल बीजेपी कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं थी। चुनाव में भ्रष्टाचार मुद्दा न बने इसलिए बीजेपी ने प्रत्याशी बदलना ही बेहतर समझा लेकिन बात फिर भी नहीं बनी। आखिरकार प्रशांत किशोर भारी पड़े और बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा।

अब बात नरोत्तम मिश्रा के दबदबा वाली सीट दतिया की; मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर इस बार भी चुनाव नतीजा कांग्रेस के पक्ष में आया। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6016 मतों से हरा दिया। घनशयाम सिंह को 66757 वोट मिले, जबकि अशुतोष को 60741 वोट प्राप्त हुए।

2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक मतों से हराया था। दिल्ली की एक अदालत ने अप्रैल में धोखाधड़ी के एक मामले में भारती को तीन वर्ष के कारावास की सज़ा सुनाई थी, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई और दतिया सीट पर उपचुनाव कराए गए। दतिया सीट से नरोत्तम मिश्रा कई बाद चुनाव जीते और मंत्री बने लेकिन 2023 के चुनाव में भारती ने उन्हें हरा दिया था। उप चुनाव में बीजेपी आलाकमान ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट कर संघ की पृष्ठभूमि वाले आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया था। तिवारी की उम्मीदवारी का ऐलान होते ही नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने पार्टी के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतर कर भारी विरोध प्रदर्शन किया था। नरोत्तम मिश्रा भी मुख्यमंत्री मोहन यादव से मिलने भोपाल गए थे और पार्टी के बड़े नेताओं से मिलने दिल्ली आए थे लेकिन पार्टी ने अपना फैसला नहीं बदला। नामांकन के दिन हुई सभा में नरोत्तम मिश्रा जब मंच से बोल रहे थे तब उनका दर्द उनकी आंखों में आँसुओं की शक्ल में झलक गया था। अलबत्ता उन्होंने आशुतोष तिवारी के पक्ष में प्रचार करने का दावा किया था लेकिन बीजेपी की हार होने के बाद ऐसा माना जा रहा है शायद उनके समर्थकों ने तिवारी के पक्ष में मन से मेहनत नहीं की। भितरघात की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

गुजरात की मांजलपर सीट ने बीजेपी की लाज रख ली। बीजेपी के उम्मीदवार सतेंद्र भाई पटेल उर्फ सतीश पटेल 30 हज़ार से ज़्यादा वोटों के बड़े अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे। पटेल को 55481 वोट मिले जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार भीखाभाई रबाड़ी को 24851 मतों से संतोष करना पड़ा।

बिहार, मध्यप्रदेश और गुजरात तीनों राज्यों में बीजेपी की सरकार है। आम तौर पर उप चुनाव में नतीजे सत्तारूढ़ पार्टी के पक्ष में आते हैं, लेकिन बीजेपी को बिहार और मध्यप्रदेश में मात खानी पड़ी। बांकीपुर पर मिली करारी हार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए निजी तौर पर बड़ा झटका है। ऐसे में एक सवाल तो लोगों के मन में उठेगा ही कि जब वो अपनी परंपरागत सीट बीजेपी को नहीं जितवा सके तो बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष देश भर में वो पार्टी के लिए कितने असरदार और फायदेमंद होंगे ?