ट्रंप का नया टैरिफ़ प्लान, अब भारत समेत सभी देशों पर 10% शुल्क

ट्रंप का नया 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ़ भारत सहित पूरी दुनिया के लिए एक नई चुनौती लेकर आया है। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भारत-अमेरिका संबंधों पर कितना पड़ता है।

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दुनिया भर के देशों पर नया टैरिफ़ लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पुराने टैरिफ़ आदेश को अवैध ठहराए जाने के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने नया फैसला लिया और सभी देशों से आने वाले आयात पर 10 प्रतिशत अस्थायी टैरिफ़ लगाने की घोषणा कर दी। यह टैरिफ़ 24 फरवरी से लागू होगा और अगले 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि ट्रंप ने 1977 के एक कानून का गलत इस्तेमाल करते हुए लगभग सभी देशों पर टैरिफ़ लगाया था। अदालत के अनुसार, टैरिफ़ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। इसके बाद ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 का सहारा लिया, जो उन्हें सीमित समय के लिए 15 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाने की अनुमति देता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका असर भारत पर क्या पड़ेगा। व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि भारत समेत वे सभी देश जिन्होंने पहले अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया था, अब सिर्फ 10 प्रतिशत टैरिफ़ का ही सामना करेंगे। पहले भारत पर 18 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाने की बात कही जा रही थी, लेकिन नए आदेश के बाद यह घटकर 10 प्रतिशत रह गया है। इससे भारतीय निर्यातकों को कुछ राहत मिल सकती है।

हालांकि सभी वस्तुओं पर यह टैरिफ़ लागू नहीं होगा। अमेरिका ने कुछ जरूरी उत्पादों को इससे बाहर रखा है। इनमें दवाइयां, खाद्य पदार्थ, ऊर्जा संसाधन, कुछ धातुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, कार और एयरोस्पेस से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा किताबें, दान में दी गई वस्तुएं और निजी इस्तेमाल का सामान भी टैरिफ़ से मुक्त रहेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अस्थायी है और आगे इसे लेकर कानूनी लड़ाई भी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले अमेरिका ने टैरिफ़ के जरिए करीब 130 अरब डॉलर जुटाए थे। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या कंपनियों को यह पैसा वापस मिलेगा। फिलहाल इस पर कोई साफ निर्देश नहीं दिया गया है और मामला अदालत में जा सकता है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कदम अमेरिकी व्यापार घाटे को कम करने और घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। वहीं कई देशों को डर है कि इससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ेगा।