घर उजड़ा, अब वोट का डर: असम में स्पेशल रिवीजन से क्यों सहमे लोग?

असम में इन दिनों वोटर लिस्ट को लेकर चल रही स्पेशल रिवीजन (SR) प्रक्रिया ने हजारों लोगों की चिंता बढ़ा दी है। खासकर वे परिवार ज्यादा डरे हुए हैं जिनके घर हाल ही में सरकारी जमीन से हटाए गए हैं। लोगों का कहना है कि पहले उनके मकान तोड़े गए और अब वोटर लिस्ट से नाम कटने का डर सता रहा है।

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नौगांव और होजाई जिलों में सैकड़ों परिवार अस्थायी झुग्गियों में रह रहे हैं। उनका कहना है कि जब उनका स्थायी पता बदल गया, तो उन्हें नोटिस भेजकर वोटर लिस्ट की जांच के लिए बुलाया गया। कई लोग बार-बार दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं और अपने दस्तावेज दिखा रहे हैं। इसके बावजूद मन में डर बैठा है कि कहीं नाम लिस्ट से हट न जाए।

एक महिला ने कहा, “अगर वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो हम क्या करेंगे? पहले घर चला गया, अब नागरिकता पर सवाल उठ रहा है। रात को नींद नहीं आती।” ऐसे ही कई लोग कहते हैं कि वे सालों से असम में रह रहे हैं, लेकिन अब अचानक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

दरअसल, स्पेशल रिवीजन के तहत बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर यह जांच कर रहे हैं कि वोटर सही पते पर रह रहा है या नहीं। जिन लोगों का पता बदल गया है, उनसे नए सिरे से जानकारी मांगी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह प्रक्रिया किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट को सही और अपडेट रखने के लिए है।

अधिकारियों के मुताबिक, जिनका नाम गलती से कट भी जाता है, उन्हें फिर से जोड़ने का मौका मिलेगा। इसके लिए फॉर्म भरकर नया पता दर्ज कराया जा सकता है। जिला प्रशासन का कहना है कि योग्य नागरिक का नाम हटाया नहीं जाएगा और यह पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया है।

वहीं, इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कुछ बयानों को लेकर खासतौर पर बंगाली मूल के मुसलमानों में नाराजगी और डर दोनों हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें बार-बार शक की नजर से देखा जा रहा है। दूसरी तरफ बीजेपी का कहना है कि वोटर लिस्ट का काम चुनाव आयोग करता है और इसमें सरकार की कोई दखल नहीं है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस प्रक्रिया में लाखों नामों की जांच की गई है। मृत वोटरों, दोहरे नामों और पता बदल चुके वोटरों को चिन्हित किया गया है ताकि मतदाता सूची साफ और सही बनाई जा सके।

लेकिन जिन परिवारों के घर उजड़ चुके हैं, उनके लिए यह सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं बल्कि जीवन का बड़ा सवाल बन गई है। उन्हें डर है कि अगर वोटर लिस्ट से नाम कट गया तो उनकी पहचान और अधिकार दोनों पर असर पड़ेगा।

अब सबकी नजर 10 फरवरी को जारी होने वाली अंतिम वोटर लिस्ट पर टिकी है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि उनके नाम इसमें बने रहेंगे और उन्हें दोबारा अपनी नागरिकता साबित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। असम में फिलहाल यही सवाल सबसे बड़ा बन गया है – “क्या घर के बाद अब वोट भी छिन जाएगा?”