गौ-रक्षा के लिए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ‘धर्मयुद्ध यात्रा’ शुरू, सरकार पर साधा निशाना

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने देश के सांसदों, विधायकों और आम लोगों से अपील की है कि वे इस यात्रा में शामिल होकर गौ-रक्षा के लिए आवाज उठाएं और समाज में जागरूकता फैलाएं।

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

नई दिल्ली: गौ-रक्षा के मुद्दे को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी ‘गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा’ की शुरुआत कर दी है। यह यात्रा वाराणसी से शुरू होकर लखनऊ तक जाएगी। यात्रा के पहले पड़ाव के तौर पर वे जौनपुर पहुंचे, जहां उन्होंने आश्रम में दर्शन किए और लोगों को संबोधित किया।

यात्रा शुरू करते समय शंकराचार्य पालकी में बैठे और वहीं से उन्होंने अपने संदेश में कहा कि अब गौ माता की रक्षा के लिए संघर्ष करना मजबूरी बन गया है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में गाय का विशेष स्थान है, लेकिन मौजूदा हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को अपनी ही चुनी हुई सरकारों के सामने गौ-रक्षा के लिए आवाज उठानी पड़ रही है।

शंकराचार्य ने कहा कि उनकी यह यात्रा किसी राजनीतिक मकसद से नहीं बल्कि धार्मिक भावना से शुरू की गई है। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य समाज को जागरूक करना और लोगों को गौ-रक्षा के मुद्दे पर एकजुट करना है। उन्होंने कहा कि हर हिंदू चाहता है कि देश में गौ-हत्या पर सख्ती से रोक लगे।

यात्रा शुरू करने से पहले शंकराचार्य ने वाराणसी में चिंतामणि गणेश मंदिर में दर्शन किए और गौ-पूजन भी किया। इसके बाद सुबह करीब साढ़े आठ बजे यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हुई। इस दौरान विद्यामठ के बाहर सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा।

यात्रा का कार्यक्रम कई जिलों से होकर गुजरने वाला है। 7 मार्च को जौनपुर, सुल्तानपुर और रायबरेली में सभाएं होंगी। 8 मार्च को मोहनलालगंज, लालगंज और उन्नाव में कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 9 मार्च को नैमिषारण्य में सभा रखी गई है और 10 मार्च को यात्रा लखनऊ पहुंचेगी।

11 मार्च को लखनऊ के कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर एक बड़ी सभा का आयोजन किया जाएगा, जहां शंकराचार्य गौ-रक्षा को लेकर आगे की रणनीति का ऐलान करेंगे। शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन यात्रा को रोकने की कोशिश करेगा तो वे रुक जाएंगे, लेकिन उनका सवाल है कि आखिर इस यात्रा को रोका क्यों जाना चाहिए।