एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सम्राट के मुताबिक, दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और पंजाब के ट्रांसपोर्टर भी इस प्रदर्शन में शामिल होंगे। उनका कहना है कि नीतियों और नियमों के कारण ड्राइवरों पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।
संस्था की सबसे बड़ी चिंता निजी नंबर प्लेट वाली बाइक टैक्सियों को लेकर है। उनका आरोप है कि इससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है और ऑटो व टैक्सी चालकों की कमाई भी प्रभावित होती है। इसके अलावा ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर भी सवाल उठाए गए हैं। एसोसिएशन का कहना है कि कंपनियों का कमीशन बढ़ता जा रहा है लेकिन किराया लगभग वही है, जिससे ड्राइवरों की आय कम हो रही है।
ड्राइवरों ने पैनिक बटन सिस्टम पर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कई बार यह सिस्टम सही से काम नहीं करता, फिर भी चालान काट दिए जाते हैं। वहीं, बस बॉडी कोड (AIS-153) को पुराने वाहनों पर लागू करने को लेकर भी विरोध है। उनका कहना है कि इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
इसके अलावा स्पीड लिमिट डिवाइस, इलेक्ट्रिक वाहनों पर जबरन शिफ्ट होने का दबाव, और 60 दिन में वाहन को अपने राज्य वापस ले जाने जैसे नियमों को भी समस्या बताया गया है। संगठन ने ई-चालान सिस्टम के जरिए परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया है।
एसोसिएशन का कहना है कि यह प्रदर्शन प्रधानमंत्री और संबंधित मुख्यमंत्रियों का ध्यान ट्रांसपोर्ट सेक्टर की समस्याओं की ओर खींचने के लिए किया जा रहा है। ड्राइवरों की मांग है कि सरकार इन मुद्दों पर जल्द ठोस फैसला ले, ताकि उन्हें राहत मिल सके और उनका काम सुचारू रूप से चल सके।




