कश्मीर में पत्रकारों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को लेकर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने गहरी चिंता जताई है। गिल्ड का कहना है कि कश्मीर पुलिस द्वारा पत्रकारों को बार-बार तलब करना, उनसे पूछताछ करना और हलफनामे पर हस्ताक्षर के लिए दबाव डालना प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
एडिटर्स गिल्ड के अनुसार, हाल के दिनों में कई पत्रकारों — जिनमें राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार भी शामिल हैं — को श्रीनगर के साइबर क्राइम थाने में बार-बार बुलाया गया। वहां उनसे उनकी नियमित खबरों और रिपोर्टिंग को लेकर सवाल किए गए। कुछ पत्रकारों पर यह दबाव भी बनाया गया कि वे ऐसे बॉन्ड या हलफनामे पर दस्तख़त करें, जिसमें यह शर्त हो कि वे कोई ऐसी गतिविधि नहीं करेंगे जिससे “शांति भंग” हो।
एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष संजय कपूर ने कहा, “लोकतंत्र में मीडिया एक अहम स्तंभ है। पत्रकारों को बिना स्पष्ट कारण के तलब करना और उनसे दबाव में हलफनामे लेने की कोशिश करना पूरी तरह मनमाना और अस्वीकार्य है।”
गिल्ड के महासचिव राघवन श्रीनिवासन ने इसे डराने-धमकाने की कार्रवाई बताते हुए कहा, “इस तरह की पुलिस पूछताछ और जबरन हलफनामे मीडिया को भयभीत करने और उसके वैध पेशेवर कर्तव्यों में बाधा डालने का प्रयास हैं।”
एडिटर्स गिल्ड ने कहा कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कश्मीर में पत्रकारों को बार-बार पुलिस थानों में बुलाए जाने और पूछताछ किए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। गिल्ड के मुताबिक, ऐसी कार्रवाइयाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करती हैं और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
गिल्ड की कोषाध्यक्ष टेरेसा रहमान ने कहा, “प्रशासन को चाहिए कि वह मीडिया के साथ पारदर्शिता बरते और हर कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन करे।”




