एकल अभियान: ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण की ओर बढ़ता व्यापक आंदोलन

एकल अभियान के तहत बच्चों को जोड़ने के लिए जॉयफुल शिक्षा पर काम किया जा रहा है, जिससे उनकी उपस्थिति बढ़ी है। साथ ही गांवों में स्वास्थ्य, स्वच्छता, गौ-आधारित खेती और स्थानीय संसाधनों को बढ़ावा देने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि गांव आत्मनिर्भर बन सकें।

Ekal ko Jaano...
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नई दिल्ली: 21 मार्च को राजधानी के India International Centre में “एकल को जानो” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षाविदों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को एकल अभियान के काम और उसके प्रभाव से अवगत कराना था। कार्यक्रम में ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, संस्कार और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर चर्चा की गई।

इस दौरान सुश्री सीमा आजगावकर, प्रो. (डॉ.) नूपुर तिवारी, प्रो. (डॉ.) निरंजन कुमार, श्री बिनय कुमार सिंह और श्री शांतनु गुप्ता उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं का परिचय मंच से कराया गया और उन्होंने अपने-अपने अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सुश्री सीमा आजगावकर ने “एक शिक्षक, एक स्कूल”, संस्कार प्रधान शिक्षा और स्वावलंबी गांव पर जोर दिया, साथ ही स्वच्छता, स्वास्थ्य और जड़ी-बूटियों के उपयोग की बात कही। प्रो. (डॉ.) नूपुर तिवारी ने कहा कि जनजातीय समाज को समझते हुए उनकी संस्कृति के साथ चलकर शिक्षा देना जरूरी है। प्रो. (डॉ.) निरंजन कुमार ने जनजातीय क्षेत्रों से शुरुआत और गांवों से विकास की दिशा पर बात रखी। श्री बिनय कुमार सिंह ने विचार और नीति के आकलन की जरूरत की बात कही। वहीं श्री शांतनु गुप्ता ने शिक्षा से समाज के जुड़ाव पर जोर दिया।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि एकल अभियान शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और ग्राम विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत बनाने पर फोकस किया जा रहा है।