नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। खासकर Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही कम होने से तेल और गैस की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। कई देशों में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है, जहां पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ चुके हैं।
इसी बीच, भारत में स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया है कि सरकार इस संकट का बोझ आम लोगों पर नहीं पड़ने देगी। उन्होंने यह बात नोएडा में जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान कही, जहां उन्होंने लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की।
दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा रास्तों में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचती है। मौजूदा हालात में इस रास्ते के प्रभावित होने से ग्लोबल सप्लाई चेन पर असर पड़ा है, जिसका असर कई देशों में महंगाई के रूप में दिख रहा है।
भारत ने इस स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर काम शुरू कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, Russia समेत अन्य देशों से तेल और गैस की सप्लाई बढ़ाने पर बातचीत चल रही है। इससे देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
सरकार का कहना है कि जरूरी कदम उठाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो। फिलहाल भारत में पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।
वैश्विक स्तर पर चल रहे इस संकट के बीच सरकार की कोशिश है कि देश के अंदर स्थिति सामान्य बनी रहे। अब देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात कैसे बदलते हैं और इसका असर भारत पर कितना पड़ता है।




