नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर मानवीय आधार पर बड़ा कदम उठाया है। ईरान के युद्धपोत IRIS Lavan को तकनीकी समस्या के चलते भारतीय बंदरगाह में शरण दी गई, जिससे जहाज और उस पर सवार कैडेट सुरक्षित बच गए। इस पूरे मामले का खुलासा विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने किया है।
जयशंकर ने बताया कि ईरान की ओर से भारत को संदेश मिला था कि उनका एक जहाज तकनीकी दिक्कत का सामना कर रहा है और भारतीय बंदरगाह में आने की अनुमति चाहता है। यह संदेश फरवरी के आखिर में मिला था। स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने मानवीय आधार पर जहाज को भारत आने की इजाजत दे दी।
सरकार की अनुमति मिलने के बाद यह ईरानी युद्धपोत केरल के कोच्चि बंदरगाह पहुंचा, जहां फिलहाल वह सुरक्षित खड़ा है। जहाज पर मौजूद कई युवा कैडेट को भी सुरक्षित उतार लिया गया है और उन्हें पास के सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।
विदेश मंत्री के अनुसार, यह जहाज पहले एक अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए इस क्षेत्र में आया था। लेकिन पश्चिम एशिया में अचानक बढ़े तनाव और समुद्र में बिगड़ते हालात के कारण जहाज मुश्किल स्थिति में फंस गया था। ऐसे में भारत ने परिस्थिति को समझते हुए मदद का हाथ बढ़ाया।
बताया जा रहा है कि उस समय ईरान के तीन जहाज इस क्षेत्र में मौजूद थे। इनमें से एक जहाज श्रीलंका के त्रिंकोमाली बंदरगाह पहुंच गया, जबकि एक अन्य जहाज रास्ते में ही हादसे का शिकार हो गया। ऐसे हालात में IRIS Lavan को भारत में शरण मिलना उसके लिए बड़ी राहत साबित हुआ।
जयशंकर ने बताया कि खाड़ी देशों में करीब 90 लाख से एक करोड़ भारतीय रहते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा है। भारत लगातार समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाए रखने और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।




