
तहलका डेस्क।
नई दिल्ली। भारत अब आपदाओं के बाद जागने के बजाय उनसे पहले ही सुरक्षा कवच तैयार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में देश के भीतर ऊष्ण लहर (हीटवेव) के कारण होने वाली जनहानि को पूरी तरह समाप्त करना है। गाजियाबाद में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने देश की बदलती आपदा प्रबंधन नीति का खाका पेश किया। सरकार का स्पष्ट मानना है कि हमारा दृष्टिकोण केवल संकट आने पर ‘प्रतिक्रिया’ देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें ‘सक्रिय’ और ‘पूर्व तैयारी’ वाली कार्यप्रणाली को अपनाना होगा।
यह महत्वपूर्ण अवसर NDRF की 8वीं बटालियन के लिए ऐतिहासिक रहा, जिसे उसकी दो दशकों की उत्कृष्ट सेवाओं के लिए ‘प्रेसिडेंट्स कलर’ से सम्मानित किया गया। 2006 में गठित यह बल आज प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं के समय देश की सबसे भरोसेमंद ढाल बन चुका है। गृह मंत्री के अनुसार, यह सम्मान केवल एक इकाई का नहीं, बल्कि राज्य आपदा बलों, एनसीसी, एनएसएस और ‘आपदा मित्रों’ जैसे हजारों स्वयंसेवकों के सामूहिक समर्पण का प्रतीक है।
वर्तमान परिदृश्य में चक्रवात, भूकंप और बाढ़ जैसी विभीषिकाओं के दौरान ‘शून्य जनहानि और न्यूनतम संपत्ति नुकसान’ ही शासन का प्राथमिक लक्ष्य है। विशेष रूप से हीटवेव जैसी उभरती गंभीर चुनौती से निपटने के लिए गृह मंत्रालय ने एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया है। शाह ने विश्वास जताया कि आने वाले समय में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से लू के कारण होने वाली मौतों को शून्य पर लाया जा सकेगा।
भारत ने वैश्विक स्तर पर भी आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में अपनी धाक जमाई है। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरों को देखते हुए NDRF को भविष्य की चुनौतियों के लिए निरंतर तैयार रहने का आह्वान किया गया है। वर्तमान में 18,000 से अधिक कर्मियों और 16 बटालियनों के साथ यह बल अब तक 12,000 से अधिक सफल अभियानों को अंजाम दे चुका है, जो इसकी सक्षमता का प्रमाण है।



